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मदरसा कार्रवाई से मचा हड़कंप! 20 मदरसे सील… शादाब शम्स का बड़ा वार—‘गुमराह करने वालों का सच अब सामने आ गया!’ धामी सरकार के सख्त रुख के बीच वक्फ बोर्ड अध्यक्ष का दावा—पंजीकरण से रोकने वालों ने मुस्लिम समाज को किया गुमराह, अब नियम मानने वाले मदरसा संचालकों की सराहना

शादाब शम्स का बड़ा वार—‘मुस्लिम समाज को गुमराह करने वालों का सच अब खुलकर सामने आ गया!’

मदरसा कार्रवाई से मचा हड़कंप! 20 मदरसे सील… शादाब शम्स का बड़ा वार—‘गुमराह करने वालों का सच अब सामने आ गया!’

धामी सरकार के सख्त रुख के बीच वक्फ बोर्ड अध्यक्ष का दावा—पंजीकरण से रोकने वालों ने मुस्लिम समाज को किया गुमराह, अब नियम मानने वाले मदरसा संचालकों की सराहना

चमोली/पोखरी। उत्तराखंड में मदरसों को लेकर चल रही कार्रवाई ने अब सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। नियमों और पंजीकरण की अनदेखी करने वाले मदरसों पर कार्रवाई का सिलसिला जारी है और इसी बीच उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

शम्स के मुताबिक, प्रदेश में अब तक करीब 20 मदरसों को सीज किया जा चुका है, जबकि कई अन्य मामलों में कार्रवाई लंबित है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की मंशा किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि मुस्लिम बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में लाना है।

एक तरफ नियम… दूसरी तरफ विरोध!

शादाब शम्स ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया पहले ही तय कर दी गई थी। उनके अनुसार मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लाई गई और मदरसों में शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रावधान लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए।

उन्होंने कहा कि मदरसों के लिए उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद से पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से संबंधित पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

‘रजिस्ट्रेशन मत कराओ… कोर्ट चले जाएंगे!’

शम्स ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस व्यवस्था का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि मदरसा संचालकों को कथित तौर पर पंजीकरण न कराने के लिए कहा गया और यह भरोसा दिलाया गया कि मामला न्यायालय में ले जाया जाएगा।अब शम्स के मुताबिक कार्रवाई शुरू होने के बाद उस विरोध का परिणाम सामने दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि करीब 20 मदरसों को सील किया जा चुका है और कई मदरसों पर कार्रवाई अभी लंबित है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने संचालकों को नियमों के अनुसार आगे बढ़ने से रोका, उनके कारण कई संस्थान परेशानी में फंसे।

‘अब गुमराह करने वालों से बाहर आ रहा मुस्लिम समाज!’

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने अपने बयान में सबसे तीखा हमला करते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को लंबे समय से गुमराह किया जा रहा था, लेकिन अब धीरे-धीरे लोग वास्तविकता समझ रहे हैं।

उन्होंने नियमों के मुताबिक पंजीकरण कराने वाले मदरसा संचालकों की सराहना करते हुए कहा कि जो संस्थान सरकारी नियमों का पालन कर रहे हैं, वे बच्चों के भविष्य को लेकर सकारात्मक कदम उठा रहे हैं।

अब अगली बारी किसकी?

मदरसों पर कार्रवाई और पंजीकरण का मुद्दा अब उत्तराखंड में चर्चा का बड़ा विषय बनता जा रहा है। करीब 20 मदरसों के सीज किए जाने के दावे और आगे लंबित कार्रवाई के संकेतों के बाद सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा और बढ़ेगा?

फिलहाल चमोली के पोखरी से शादाब शम्स के बयान ने इस पूरे मामले में नई सियासी गर्मी पैदा कर दी है—एक तरफ सरकार का नियमों पर जोर, दूसरी तरफ विरोध के आरोप और बीच में मुस्लिम बच्चों की शिक्षा का सवाल।

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