SIR पर हरिद्वार में कांग्रेस का बड़ा हल्ला बोल, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन मतदाता सूची पर कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल—CEC ज्ञानेश कुमार समेत निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की मांग, फॉर्म-7 का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

SIR पर हरिद्वार में कांग्रेस का बड़ा हल्ला बोल, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
मतदाता सूची पर कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल—CEC ज्ञानेश कुमार समेत निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की मांग, फॉर्म-7 का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

हरिद्वार। उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर हरिद्वार में सियासी तापमान बढ़ गया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और फॉर्म-7 की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से एडीएम प्रशासन को सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को हटाने की मांग भी ज्ञापन में रखी। निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर यही तीनों वर्तमान में CEC/EC के रूप में दर्ज हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर किसी भी प्रकार की शंका नहीं रहनी चाहिए। पार्टी ने मांग की कि पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया सत्यापन, सुनवाई और पारदर्शिता के साथ हो।
फॉर्म-7 पर कांग्रेस का सीधा सवाल—किसके आवेदन पर किसका नाम हट रहा है?
कांग्रेस ने SIR के दौरान दाखिल किए गए फॉर्म-7 आवेदनों का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं तो ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि किसी मतदाता का नाम केवल आपत्ति या फॉर्म-7 के आधार पर हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति का वास्तविक सत्यापन किया जाए और उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिले। पार्टी ने यह भी मांग रखी कि फॉर्म-7 की संख्या, आपत्तियों के निस्तारण और नाम हटाने की प्रक्रिया से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
1.73 लाख फॉर्म-7 और 95 हजार से ज्यादा ‘इनएलिजिबल’—SIR पर बढ़ी बहस
SIR को लेकर बहस तब और तेज हुई जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के हवाले से सामने आया कि उत्तराखंड में करीब 1.73 लाख फॉर्म-7 आवेदन आए और इनमें 95 हजार से अधिक मामलों को ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखा गया। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार CEO कार्यालय ने बताया कि इस श्रेणी में ऐसे मतदाता शामिल थे जिन्होंने मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए या स्वयं अथवा परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए।निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार ऐसे मतदाताओं के लिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का रास्ता बंद नहीं हुआ है। वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 के माध्यम से नाम शामिल कराने का अनुरोध कर सकते हैं। यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखे जाने का अर्थ अपने आप में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है। CEO कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाता आगे नाम शामिल कराने की प्रक्रिया अपना सकते हैं।
हरिद्वार में प्रशासन भी कर रहा SIR की लगातार समीक्षा
हरिद्वार जिला प्रशासन की आधिकारिक SIR वेबसाइट पर राजनीतिक दलों के साथ बैठक, बूथ स्तर की गतिविधियां और मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित सूचनाएं जारी की जा रही हैं। प्रशासन के अनुसार अतिरिक्त जिलाधिकारी प्रशासन जितेंद्र कुमार की अध्यक्षता में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई। वहीं जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने SIR कार्यों की समीक्षा की और बूथ संख्या 122 सहित विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार उत्तराखंड में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 3 अक्टूबर 2026 को किया जाना है।
‘पात्र का नाम न कटे, अपात्र का नाम न जुड़े’—कांग्रेस की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी व्यवस्था है। इसलिए नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसी पात्र नागरिक को अनावश्यक परेशानी न हो।
ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की कि—
- फॉर्म-7 के आवेदन विधानसभा क्षेत्रवार सार्वजनिक किए जाएं।
- असामान्य संख्या में फॉर्म-7 दाखिल करने वालों की जांच हो।
- प्रत्येक आपत्ति का वास्तविक सत्यापन किया जाए।
- संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
- नाम हटाने से पहले प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाए।
- आपत्तियों और उनके निस्तारण की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में निर्वाचन आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों को हटाने की मांग भी रखी है। यह मांग कांग्रेस का राजनीतिक पक्ष है; इसके समर्थन में प्रस्तुत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस ज्ञापन से नहीं होती।
अब सुनिए कांग्रेस नेताओं के ब्यान
मनोज धनगर, कांग्रेसी नेता हरिद्वार
“SIR के नाम पर मतदाता सूची को लेकर लोगों में कई सवाल हैं। हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित जांच और सुनवाई के नहीं हटना चाहिए। फॉर्म-7 के जरिए होने वाली हर आपत्ति की निष्पक्ष जांच हो और पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दलों व जनता के सामने पारदर्शी रखी जाए।”
राजवीर चौहान, कांग्रेसी नेता हरिद्वार
“मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि किसी नागरिक के नाम को लेकर आपत्ति है तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। हम मांग करते हैं कि SIR के दौरान प्राप्त फॉर्म-7 का विधानसभा क्षेत्रवार पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और बड़ी संख्या में आवेदन करने वालों की भूमिका की जांच की जाए।”
तेलूराम प्रधान, कांग्रेसी नेता हरिद्वार
“हम किसी पात्र मतदाता का अधिकार छिनने नहीं देंगे। SIR में जो भी प्रक्रिया चल रही है, उसमें पारदर्शिता जरूरी है। हमारा सवाल है कि कितने फॉर्म-7 आए, कितने स्वीकार हुए और कितने मामलों में नाम हटाने की कार्रवाई हुई—इसका पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि किसी तरह की आशंका न रहे।”
राव आफाक अली, कांग्रेसी नेता हरिद्वार
“आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का शुद्ध और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है। हमारा विरोध किसी वैध प्रक्रिया से नहीं है, लेकिन हर प्रक्रिया कानून और पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। किसी भी पात्र मतदाता को केवल कागजी आपत्ति के आधार पर अपने मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।”
वीरेंद्र रावत, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी, हरिद्वार कांग्रेस
“हमने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन इसलिए दिया है क्योंकि मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हमारी मांग है कि SIR की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हो। फॉर्म-7 और नाम हटाने से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं, ताकि जनता को वास्तविक स्थिति पता चले और किसी पात्र मतदाता के अधिकार पर असर न पड़े।”
महेश प्रताप राणा, कांग्रेसी नेता हरिद्वार
“चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व है और इसकी शुरुआत सही मतदाता सूची से होती है। हमारा स्पष्ट कहना है कि पात्र का नाम नहीं कटना चाहिए और अपात्र का नाम नहीं जुड़ना चाहिए। SIR में जहां भी आपत्ति है, वहां सत्यापन और सुनवाई हो तथा पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए।”
आगामी चुनाव से पहले SIR बना बड़ा सियासी मुद्दा
हरिद्वार कांग्रेस के इस ज्ञापन के बाद SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। कांग्रेस ने जहां निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अधिकारियों को हटाने की मांग की है, वहीं निर्वाचन तंत्र SIR को निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित कर रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा है कि SIR नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है तथा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ नियमित बैठकें भी की जा रही हैं। हरिद्वार जिला प्रशासन की SIR वेबसाइट पर भी राजनीतिक दलों के साथ बैठकों और पुनरीक्षण कार्य की जानकारी लगातार अपडेट की जा रही है।
3 अक्टूबर पर टिकी निगाहें—फाइनल सूची खोलेगी SIR की अगली तस्वीर
अब इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण तारीख 3 अक्टूबर 2026 है। इसी दिन उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी है।
इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि SIR के दौरान कितने नाम अंतिम सूची में बरकरार रहे, कितने नए नाम जुड़े और कितने नामों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। साथ ही जिन मतदाताओं को ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखा गया है, उनके लिए फॉर्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। हरिद्वार में कांग्रेस के ज्ञापन ने फिलहाल SIR को लेकर चुनावी बहस को नई धार दे दी है—अब सवाल सिर्फ मतदाता सूची का नहीं, बल्कि उसकी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर जनता के भरोसे का भी है।



