उत्तराखंड में गुटखा कारोबार पर धामी सरकार का हंटर! एक साल तक प्रतिबंधित पान मसाले की नो एंट्री, नियम तोड़ा तो कानून से होगा सीधा सामना!….. विनय शंकर पांडेय के आदेश से तंबाकू-निकोटीन युक्त उत्पादों पर शिकंजा, दुकान से गोदाम तक कारोबारियों की बढ़ेगी मुश्किल; निर्माण, भंडारण, सप्लाई और बिक्री पर एक साल की रोक
उत्तराखंड में गुटखा कारोबार पर सरकार का बड़ा वार! 365 दिन की पाबंदी से मचेगा हड़कंप, तंबाकू-निकोटीन वाले पान मसाले पर भी शिकंजा..... विनय शंकर पांडेय ने जारी किया प्रतिबंध का आदेश, निर्माण से लेकर बिक्री तक पर रोक; सभी जिलों के अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश, उल्लंघन करने वालों की बढ़ेंगी मुश्किलें

उत्तराखंड में गुटखा कारोबार पर धामी सरकार का हंटर! एक साल तक प्रतिबंधित पान मसाले की नो एंट्री, नियम तोड़ा तो कानून से होगा सीधा सामना!…..
विनय शंकर पांडेय के आदेश से तंबाकू-निकोटीन युक्त उत्पादों पर शिकंजा, दुकान से गोदाम तक कारोबारियों की बढ़ेगी मुश्किल; निर्माण, भंडारण, सप्लाई और बिक्री पर एक साल की रोक

देहरादून…उत्तराखंड में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाले के कारोबार पर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। जनस्वास्थ्य के मुद्दे पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगाने का आदेश जारी किया है। 13 अक्टूबर 2026 को जारी इस आदेश ने संबंधित कारोबारियों के सामने नियमों के पालन की चुनौती खड़ी कर दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय की ओर से जारी आदेश का दायरा केवल दुकानों तक सीमित नहीं है। थोक कारोबार से लेकर गोदामों में रखे माल और वितरण व्यवस्था तक प्रतिबंधित उत्पादों की जांच की जा सकती है। साफ है कि आदेश के दायरे में आने वाले उत्पादों का कारोबार जारी रखना अब कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
पैकेट का खेल नहीं चलेगा! अलग-अलग बेचने पर भी नियमों की नजर
तंबाकू और पान मसाला अलग-अलग पैकेटों में बेचकर प्रतिबंध से बचने की कोशिश पर भी आदेश में ध्यान दिया गया है। इसमें ऐसे उत्पादों को शामिल किया गया है, जिनमें तंबाकू या निकोटीन मौजूद है, चाहे उन्हें एक साथ बेचा जाए या अलग-अलग पैकेटों में उपलब्ध कराया जाए। यानी उत्पाद की पैकिंग या बिक्री का तरीका बदलने भर से वह प्रतिबंध के दायरे से बाहर नहीं हो जाता। हालांकि, कार्रवाई के लिए यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित उत्पाद वास्तव में आदेश में शामिल प्रतिबंधित श्रेणी में आता है या नहीं।
दुकानदार हों या थोक कारोबारी, उल्लंघन पर कस सकता है शिकंजा
आदेश के बाद जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अधिकारियों को प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर नजर रखनी होगी। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ लागू कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मामले के तथ्यों के आधार पर उत्पाद जब्त करने, जुर्माना लगाने, प्रतिष्ठान सील करने या प्राथमिकी दर्ज करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, हर मामले में कार्रवाई का स्वरूप संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही तय होगा।
कानून की धारा का हवाला, जनस्वास्थ्य के नाम पर सख्त फैसला
खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने आदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 का उल्लेख किया है। इसमें विनियम 2.3.4 और अधिनियम की धारा 30(2)(क) के तहत प्रतिबंध लगाने की शक्ति का हवाला दिया गया है। तंबाकू और निकोटीन का सेवन मुंह के कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। ऐसे में प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर नियंत्रण को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सभी जिलों तक पहुंचा आदेश, अब कार्रवाई की बारी
आदेश की प्रतियां स्वास्थ्य विभाग, सभी जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्साधिकारियों और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भेजी गई हैं। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रतिबंध आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहने के लिए जारी किया गया है। अब असली चुनौती आदेश को जमीन पर लागू करने की है। बाजार में प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता रोकने के लिए निगरानी और कानूनी कार्रवाई अहम होगी।
सरकार का संदेश साफ है—जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। प्रतिबंधित श्रेणी के गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाले का कारोबार करने वालों को नियमों का पालन करना होगा, वरना कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।



