उत्तराखण्ड लोकायुक्त के गठन की प्रक्रिया में बड़ा कदम! अध्यक्ष और सदस्यों के चयन हेतु बनी पांच सदस्यीय खोजबीन समिति,, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आलोक वर्मा को सौंपी गई समिति की कमान; पूर्व मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डे, सुभाष कुमार, राधा रतूड़ी और दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल को बनाया गया सदस्य,, लोकायुक्त अध्यक्ष और सदस्यों के लिए उपयुक्त नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को सौंपेगी समिति; उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम-2014 के तहत होगी आगे की कार्रवाई,,

उत्तराखण्ड लोकायुक्त के गठन की प्रक्रिया में बड़ा कदम! अध्यक्ष और सदस्यों के चयन हेतु बनी पांच सदस्यीय खोजबीन समिति,,
सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आलोक वर्मा को सौंपी गई समिति की कमान; पूर्व मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डे, सुभाष कुमार, राधा रतूड़ी और दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल को बनाया गया सदस्य,,
लोकायुक्त अध्यक्ष और सदस्यों के लिए उपयुक्त नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को सौंपेगी समिति; उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम-2014 के तहत होगी आगे की कार्रवाई,,
उत्तराखण्ड में लोकायुक्त के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय खोजबीन समिति (सर्च कमेटी) का गठन कर दिया है। यह समिति उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 की धारा 4(4) के तहत लोकायुक्त के अध्यक्ष और सदस्यों के पदों के लिए उपयुक्त नामों का पैनल तैयार करेगी।
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आलोक वर्मा को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति में उत्तराखण्ड शासन के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डे, सुभाष कुमार और राधा रतूड़ी को सदस्य नामित किया गया है। इसके अलावा दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 की धारा 4(1) के अंतर्गत गठित चयन समिति की 4 जून 2026 को हुई बैठक में विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया। चयन समिति की संस्तुति के आधार पर गठित खोजबीन समिति लोकायुक्त अध्यक्ष एवं सदस्य पदों के लिए योग्य व्यक्तियों के नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति के अध्यक्ष को उपलब्ध कराएगी।
सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से लोकायुक्त संस्था को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी तथा भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए एक मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित होगी।



