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BIG BREAKING: UKSSSC पेपर लीक मामले में CBI कोर्ट का बड़ा अपडेट, तीन आरोपियों पर आरोप तय होने का रास्ता साफ,, मोहम्मद खालिद, बहन साबिया और सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य, 18 अगस्त को अगली सुनवाई,, CBI का दावा—परीक्षा केंद्र से निकले थे प्रश्नपत्र के तीन पन्ने, मोबाइल से खींची तस्वीरें बाहर भेजीं; सुमन ने कथित तौर पर कुछ ही मिनटों में तैयार किए थे जवाब

BIG BREAKING: UKSSSC पेपर लीक मामले में CBI कोर्ट का बड़ा अपडेट, तीन आरोपियों पर आरोप तय होने का रास्ता साफ,,

मोहम्मद खालिद, बहन साबिया और सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य, 18 अगस्त को अगली सुनवाई,,

CBI का दावा—परीक्षा केंद्र से निकले थे प्रश्नपत्र के तीन पन्ने, मोबाइल से खींची तस्वीरें बाहर भेजीं; सुमन ने कथित तौर पर कुछ ही मिनटों में तैयार किए थे जवाब

देहरादून/हरिद्वार। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को अदालत से अहम आधार मिलने की बात सामने आई है। विशेष CBI न्यायालय ने मुख्य आरोपी मोहम्मद खालिद, उसकी बहन साबिया और सह आरोपी तत्कालीन सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ आरोप तय किए जाने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य होने का रुख अपनाया है। मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को प्रस्तावित है।

इस घटनाक्रम के बाद आरोपियों के खिलाफ उत्तराखंड के सख्त नकल विरोधी कानून समेत संबंधित धाराओं में मुकदमे की कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ होने की बात कही जा रही है। हालांकि अंतिम दोषसिद्धि अभी नहीं हुई है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का परीक्षण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।

इस मामले में CBI की चार्जशीट के अनुसार तीन आरोपियों—मोहम्मद खालिद, साबिया और टिहरी के एक डिग्री कॉलेज की निलंबित सहायक प्रोफेसर सुमन—के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दिसंबर 2025 में CBI द्वारा विशेष अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

परीक्षा केंद्र से शुरू हुई पेपर लीक की कड़ी!

CBI की जांच के मुताबिक 21 सितंबर 2025 को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान कथित तौर पर पेपर के तीन पन्ने परीक्षा केंद्र से बाहर पहुंचे। जांच एजेंसी के अनुसार अभ्यर्थी मोहम्मद खालिद हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट स्थित परीक्षा केंद्र में परीक्षा दे रहा था।

आरोप है कि खालिद मोबाइल फोन परीक्षा केंद्र के भीतर ले जाने में सफल रहा। परीक्षा शुरू होने के बाद उसने प्रश्नपत्र के कुछ पन्नों की तस्वीरें खींचीं और बाद में वॉशरूम जाने की अनुमति ली। जांच में वॉशरूम में जैमर नहीं होने की बात सामने आने के बाद CBI ने आरोप लगाया कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें बाहर भेजी गईं।

CBI के अनुसार ये तस्वीरें खालिद की बहन साबिया के माध्यम से टिहरी में तैनात सहायक प्रोफेसर सुमन तक पहुंचीं। सुमन पर आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र के सवालों को हल कर उनके उत्तर व्हाट्सऐप के माध्यम से वापस भेजे। पूर्व रिपोर्टों में भी जांच एजेंसी के हवाले से कहा गया था कि खालिद ने परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के स्क्रीनशॉट प्रोफेसर सुमन को भेजे थे और सुमन ने सवाल हल किए।

बचाव पक्ष की दलील—सुमन को नहीं पता था कि पेपर असली है

आरोप तय करने की कार्यवाही के दौरान बचाव पक्ष ने सुमन की भूमिका पर अलग दलील रखी। उनका पक्ष था कि सुमन को यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें भेजे गए प्रश्न किसी चल रही भर्ती परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र के हैं।

वहीं CBI की ओर से इस दलील का विरोध करते हुए प्रश्नपत्र पर मौजूद विशिष्ट QR कोड और सुमन के प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया से परिचित होने सहित अन्य परिस्थितिजन्य और डिजिटल साक्ष्यों का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसी के मुताबिक सुमन ने बाद में पकड़े जाने की आशंका के चलते मोबाइल से संबंधित तस्वीरें और संदेश डिलीट कर दिए थे। हालांकि CBI का दावा है कि डिजिटल एवं तकनीकी जांच के दौरान इन गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए।

अब 18 अगस्त की सुनवाई पर नजरें टिकी हैं। यदि अदालत आरोप तय करती है तो मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष को अपने साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित करने होंगे। दूसरी ओर आरोपियों को भी अदालत के समक्ष अपना बचाव रखने का पूरा अधिकार रहेगा।

नोट: आरोप अभी न्यायालय में विचाराधीन हैं; आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं है।

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