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बीएचईएल में उबाल: PPP भुगतान और लंबित मांगों पर भड़के श्रमिक, प्रबंधन को दो टूक— “अब नहीं तो आंदोलन होगा आर-पार!” “20% ज्यादा टर्नओवर और 192% अधिक मुनाफे के बावजूद श्रमिकों को नहीं मिला सम्मानजनक लाभ, बीएमकेपी इंटक ने खोला मोर्चा” “सीएफएफपी गेट पर सैकड़ों कर्मचारियों का प्रदर्शन, दो दिवसीय JCM मीटिंग बुलाने की मांग तेज— लैपटॉप, ओवरटाइम, मेडिकल और भर्ती नीति पर भी उठी आवाज”

इन्तजार रजा हरिद्वार- बीएचईएल में उबाल: PPP भुगतान और लंबित मांगों पर भड़के श्रमिक, प्रबंधन को दो टूक— “अब नहीं तो आंदोलन होगा आर-पार!”

“20% ज्यादा टर्नओवर और 192% अधिक मुनाफे के बावजूद श्रमिकों को नहीं मिला सम्मानजनक लाभ, बीएमकेपी इंटक ने खोला मोर्चा”

“सीएफएफपी गेट पर सैकड़ों कर्मचारियों का प्रदर्शन, दो दिवसीय JCM मीटिंग बुलाने की मांग तेज— लैपटॉप, ओवरटाइम, मेडिकल और भर्ती नीति पर भी उठी आवाज”

हरिद्वार स्थित (बीएचईएल) में श्रमिकों का गुस्सा अब खुलकर सड़क पर उतर आया है। शानदार मुनाफे और रिकॉर्ड टर्नओवर के बावजूद कर्मचारियों को प्लांट परफॉर्मेंस पेमेंट (PPP) न मिलने और लंबित मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से नाराज सैकड़ों श्रमिकों ने बुधवार शाम भेल मजदूर कल्याण परिषद (बीएमकेपी) इंटक के बैनर तले सीएफएफपी गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया।शाम करीब 4 बजे शुरू हुए इस विशाल विरोध प्रदर्शन में श्रमिकों ने बीएचईएल कॉरपोरेट प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि जल्द दो दिवसीय जेसीएम (ज्वाइंट कमेटी मीटिंग) बुलाकर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

सभा का संचालन संगठन के अध्यक्ष मुकुल राज और उपाध्यक्ष प्रशांत दीप गुप्ता ने किया, जबकि अध्यक्षता राजेंद्र चौहान ने की। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संगठन के महामंत्री एवं केंद्रीय नेता राजवीर सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बीएचईएल ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है।उन्होंने बताया कि इस वर्ष कंपनी का कुल टर्नओवर 34,629 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। वहीं कंपनी का कर पूर्व लाभ (PBT) 2116 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 192 प्रतिशत ज्यादा है।

राजवीर सिंह ने सवाल उठाया कि जब कंपनी रिकॉर्ड मुनाफे में है और इस सफलता में श्रमिकों की दिन-रात की मेहनत शामिल है, तो फिर कर्मचारियों को सम्मानजनक PPP भुगतान देने में देरी क्यों की जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट प्रबंधन अब तक जेसीएम मीटिंग की तारीख तक घोषित नहीं कर पाया है, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

सभा में नेताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रबंधन श्रमिकों की उपेक्षा बंद करे और लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय ले। कर्मचारियों ने मांग उठाई कि वेज रिवीजन 2017 के तहत तय समझौते के अनुसार पांच वर्ष पूरे होने के बाद श्रमिकों को दोबारा लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएं। कर्मचारियों को मिले पुराने लैपटॉप अब सात वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं और तकनीकी रूप से अनुपयोगी हो गए हैं।

इसके अलावा “न्यू इंसेंटिव स्कीम 2024” में सुधार की मांग भी प्रमुखता से उठी। नेताओं ने कहा कि 30 जनवरी 2026 को आयोजित इंसेंटिव सब-कमेटी की बैठक में कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी, जिसके चलते अभी तक श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।

प्रदर्शन में भेल हरिद्वार टाउनशिप स्थित केंद्रीय विद्यालय सेक्टर-04 को पूर्व की भांति पूर्ण रूप से संचालित करने और कक्षा-1 में नए प्रवेश शुरू करने की मांग भी उठी। कर्मचारियों ने कहा कि स्कूल व्यवस्था कमजोर होने से कर्मचारियों के परिवार प्रभावित हो रहे हैं।

श्रमिकों ने यह भी मांग की कि रविवार अथवा अवकाश के दिन कार्य कराने और निर्धारित समय से अधिक ड्यूटी लेने पर कर्मचारियों को “सी-ऑफ” के बजाय ओवरटाइम भुगतान दिया जाए। नेताओं का कहना था कि लगातार बढ़ते उत्पादन लक्ष्य पूरे कराने के लिए श्रमिकों से अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है, लेकिन उसके बदले उचित भुगतान नहीं दिया जा रहा।

मेडिकल सुविधाओं को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल सहित आसपास के बड़े मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों को भेल हरिद्वार के पैनल में शामिल किया जाए, ताकि कर्मचारियों और उनके परिजनों को बेहतर इलाज मिल सके। साथ ही मेडिकल डिपेंडेंसी सीलिंग लिमिट को 1500 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की मांग भी जोरशोर से उठी।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी कर्मचारियों ने सवाल उठाए। संगठन ने कहा कि वर्ष 2026 में होने वाली आर्टिजन्स भर्ती में नए चयनित कर्मचारियों को TSW अवधि के दौरान राज्य सरकार के न्यूनतम वेतन के बजाय पूर्व की तरह 29,500 रुपये कंसोलिडेट वेज दिया जाए।

विरोध प्रदर्शन के बाद संगठन की ओर से प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में साफ चेतावनी दी गई कि यदि जल्द जेसीएम मीटिंग आयोजित नहीं की गई और कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन व्यापक आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

इस दौरान राकेश चौहान, अश्वनी चौहान, अमित सिंह, रविंद्र चौहान, आशुतोष चौहान, धर्मेंद्र मिश्रा, मनोज यादव, संदीप चौहान, अमरीश कुमार, रितेश गौड़, अनिल चौहान, अजय धीमान, कपिल पुंडीर, इम्तियाज अहमद, देवेंद्र गुर्जर, पंकज कुमार, सुशील नेगी, ताज मोहम्मद, रजनीश शर्मा, दिव्य चौहान, संदीप जोशी, राजेश बिष्ट, तेजवीर सिंह, विजय धीमान, विकास राजपूत, दीपक प्रजापति, ओमकृष्ण निगम, कुर्बान अहमद, नितिन गोयल, वैभव, सुमित गुप्ता और गुरुनाम समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।

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