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दादुपुर गोविंदपुर में सरकारी जमीन (यू.पी सिंचाई विभाग) पर ‘कब्जा सिंडिकेट’ को जल्द करेंगे  बेनकाब! यू.पी अधिशासी अभियंता विकास त्यागी की सख्ती के बाद मचा हड़कंप, कल से कड़ी निगरानी के आदेश…,, “हाई कोर्ट के स्टे वाले इलाके के पास धड़ल्ले से चल रहा था निर्माण, यू.पी सिंचाई विभाग के एक्शन विकास त्यागी की अगुवाई में  विभागीय दलबल ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया काम— अब हर गतिविधि पर रहेगी नजर!” “विकास त्यागी बोले— सरकारी जमीन पर किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे अवैध कब्जा, जांच के बाद होगा ध्वस्तीकरण”

इन्तजार रजा हरिद्वार- दादुपुर गोविंदपुर में सरकारी जमीन (यू.पी सिंचाई विभाग) पर ‘कब्जा सिंडिकेट’ को जल्द करेंगे  बेनकाब! यू.पी अधिशासी अभियंता विकास त्यागी की सख्ती के बाद मचा हड़कंप, कल से कड़ी निगरानी के आदेश…,,

“हाई कोर्ट के स्टे वाले इलाके के पास धड़ल्ले से चल रहा था निर्माण, यू.पी सिंचाई विभाग के एक्शन विकास त्यागी की अगुवाई में  विभागीय दलबल ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया काम— अब हर गतिविधि पर रहेगी नजर!”

“विकास त्यागी बोले— सरकारी जमीन पर किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे अवैध कब्जा, जांच के बाद होगा ध्वस्तीकरण”

हरिद्वार के दादुपुर गोविंदपुर क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की करोड़ों रुपये कीमत की सरकारी भूमि पर चल रहे कथित कब्जे और अवैध निर्माण के खेल पर अब विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। लंबे समय से विवादों में रही नहर पटरी और उससे सटी सरकारी जमीन पर पक्के निर्माण की शिकायतों के बीच बुधवार को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी स्वयं विभागीय टीम और अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे, जहां निरीक्षण के दौरान चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रुकवा दिया गया।

विभागीय कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने निर्माण करा रहे लोगों से दस्तावेज मांगे, लेकिन संबंधित पक्ष कोई वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके बाद विभाग ने साफ संकेत दे दिए कि यदि जांच में निर्माण सरकारी भूमि पर पाया गया तो अगला कदम सीधे ध्वस्तीकरण होगा।

अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने मौके पर ही अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कल से पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जाए और नहर पटरी व सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का नया निर्माण या अतिक्रमण न होने दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विभाग की जमीन पर कब्जे की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि दादुपुर गोविंदपुर क्षेत्र में वर्षों से सरकारी जमीन पर धीरे-धीरे कब्जे किए जा रहे थे, लेकिन अब इन कब्जों ने स्थायी निर्माण का रूप लेना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले अस्थायी ढांचे बनाए गए और बाद में उन्हें पक्के भवनों में बदला जाने लगा। कई निर्माण रात के अंधेरे में तेजी से किए गए ताकि विभागीय कार्रवाई से बचा जा सके।

मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आसपास के खसरा नंबर 91 पर हाई कोर्ट से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश लागू बताया जा रहा है। इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी रहना सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने कहा कि सिंचाई विभाग लगातार अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रहा है और हरिद्वार प्रशासन के सहयोग से पहले भी कई अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मौके पर मिला निर्माण संदिग्ध प्रतीत हो रहा है और उसका अभिलेखीय परीक्षण कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया निर्माण नहर से कुछ दूरी पर दिखाई दे रहा है, लेकिन जिस नाले के किनारे यह ढांचा खड़ा किया गया है वह नहर प्रणाली से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विभागीय टीम रिकॉर्ड और सीमांकन के आधार पर यह तय करेगी कि निर्माण किस खसरे में आता है।

विकास त्यागी ने दो टूक कहा कि यदि जांच में यह निर्माण सरकारी भूमि या हाई कोर्ट से स्टे वाले क्षेत्र में पाया जाता है तो नोटिस जारी करने के बाद तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए विभाग पूरी गंभीरता से काम कर रहा है और किसी भी दबाव में नहीं आएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विवादित भूमि पर कोर्ट का स्टे लागू था तो आखिर इतने दिनों तक निर्माण कार्य कैसे चलता रहा? क्या स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और संबंधित एजेंसियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही थी? क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि बिना संरक्षण के सरकारी जमीन पर इतने बड़े स्तर पर निर्माण संभव नहीं हो सकता।

स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, सीमांकन और कब्जाधारियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पूरी सरकारी जमीन पर स्थायी कब्जे हो जाएंगे।फिलहाल विभागीय सख्ती और अधिशासी अभियंता विकास त्यागी के कड़े निर्देशों के बाद कब्जाधारियों में बेचैनी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि विभाग की चेतावनी आगे बुलडोजर कार्रवाई में बदलती है या मामला फिर कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।

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