हरिद्वार की सड़कों पर मौत का खेल रोकने को डीएम मयूर दीक्षित का सख्त वार बार-बार हादसे वाले ब्लैक स्पॉट का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट, 15 अक्टूबर तक हर सड़क होगी गड्ढामुक्त,, ओवरस्पीडिंग, नशे में ड्राइविंग और आंकड़े बता रहे हैं सड़क पर नियमों की कितनी बड़ी अनदेखी ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा; सात महीने में परिवहन विभाग ने काटे 31 हजार से अधिक चालान
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, सचिव जिला विधिक प्राधिकरण सिमरनजीत कौर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता डी.पी. सिंह, एआरटीओ नेहा झा, आरटीओ प्रवर्तन कृष्ण चंद्र पलारिया, सीओ ट्रैफिक बिपेंद्र सिंह, यूपीसीएल अभियंता दीपक सैनी, उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, लोनिवि अधिशासी अभियंता हरिद्वार योगेश कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे

हरिद्वार की सड़कों पर मौत का खेल रोकने को डीएम मयूर दीक्षित का सख्त वार
बार-बार हादसे वाले ब्लैक स्पॉट का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट, 15 अक्टूबर तक हर सड़क होगी गड्ढामुक्त,, ओवरस्पीडिंग, नशे में ड्राइविंग और आंकड़े बता रहे हैं सड़क पर नियमों की कितनी बड़ी अनदेखी,,
ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा; सात महीने में परिवहन विभाग ने काटे 31 हजार से अधिक चालान

हरिद्वार, 17 अगस्त 2026।
हरिद्वार की सड़कों पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर जिला प्रशासन अब सिर्फ बैठकों और कागजी निर्देशों तक सीमित रहने के मूड में नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सोमवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति (DRSC) की बैठक में अधिकारियों को सीधे और सख्त निर्देश दिए। डीएम ने साफ कहा कि जिन स्थानों पर बार-बार सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, उन दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए और हादसों की वास्तविक वजह सामने लाकर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में सड़क सुरक्षा, सड़कों की हालत, यातायात व्यवस्था, प्रवर्तन कार्रवाई और दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर विभागवार समीक्षा की गई। बैठक में डीएम का सबसे बड़ा फोकस उन सड़कों और स्थानों पर रहा, जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं के कारणों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान जरूरी है। केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय दुर्घटना से पहले खतरे को पहचानकर उसे खत्म करना होगा।
15 अक्टूबर तक हर सड़क गड्ढामुक्त करने का अल्टीमेटम
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी विभागों को स्पष्ट समयसीमा देते हुए निर्देश दिए कि 15 अक्टूबर तक जनपद की सभी सड़कें हर हाल में गड्ढामुक्त की जाएं। उन्होंने कहा कि खराब सड़कें और खुले गड्ढे खुद दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं। ऐसे में सड़क मरम्मत के कार्य में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
डीएम ने अधिकारियों से कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, पुलिस, नगर निकाय, यूपीसीएल तथा अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करना होगा। सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों की लगातार समीक्षा करते हुए कमियों को तत्काल दूर किया जाए।
उन्होंने विशेष रूप से ओवरस्पीडिंग, नशे में वाहन चलाने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि केवल चालान काटना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वाहन चालकों और आम जनता को यातायात नियमों तथा सड़क सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक भी किया जाए।
आंकड़े बता रहे हैं सड़क पर नियमों की कितनी बड़ी अनदेखी
बैठक में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने जनवरी 2026 से जुलाई 2026 तक की प्रवर्तन कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। आंकड़े बताते हैं कि सड़क पर नियमों की अनदेखी किस स्तर तक पहुंच चुकी है।
परिवहन विभाग की कार्रवाई में ओवरस्पीडिंग के 8,175 चालान, बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चलाने पर 19,429 चालान, सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने पर 1,224 चालान, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करने पर 371 चालान, माल वाहनों में यात्रियों को बैठाने के 362 चालान तथा नशे में वाहन चलाने पर 5 चालान किए गए। वहीं लाइसेंस/ओवरलोडिंग से संबंधित कार्रवाई में भी 1,289 चालान किए गए।
पुलिस विभाग ने भी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बड़े स्तर पर कार्रवाई की। पुलिस द्वारा ओवरस्पीडिंग के 8,465 चालान, बिना हेलमेट वाहन चलाने पर 15,846 चालान, वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग करने पर 1,026 चालान, नशे में वाहन चलाने पर 652 चालान, माल वाहनों में ओवरलोडिंग पर 475 चालान, मालवाहनों में यात्रियों का परिवहन करने पर 399 चालान, रेड लाइट जंप करने पर 329 चालान तथा सीट बेल्ट का प्रयोग नहीं करने पर 469 चालान किए गए। इसके अलावा 53 मामलों को ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन के लिए आरटीओ को भेजा गया।
इन आंकड़ों से साफ है कि सड़क सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती केवल सड़क की खराब हालत नहीं, बल्कि वाहन चालकों द्वारा नियमों की खुलेआम अनदेखी भी है। हेलमेट और सीट बेल्ट से लेकर ओवरस्पीडिंग और नशे में ड्राइविंग तक, नियम तोड़ने वालों की संख्या चिंता बढ़ाने वाली है।
अब सिर्फ चालान नहीं, हादसों की जड़ पर चोट
डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े अभियान सिर्फ आंकड़े बढ़ाने तक सीमित न रहें। जिन स्थानों पर बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं, वहां सड़क की डिजाइन, संकेतक, रोशनी, यातायात दबाव, स्पीड नियंत्रण, मोड़, अतिक्रमण और अन्य संभावित कारणों की जांच की जाए। थर्ड पार्टी ऑडिट के बाद सामने आने वाली कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। बैठक में संबंधित विभागों ने अपने-अपने स्तर पर किए जा रहे सड़क सुरक्षा कार्यों की जानकारी दी और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सुझाव रखे। अधिकारियों को जागरूकता अभियानों और प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, सचिव जिला विधिक प्राधिकरण सिमरनजीत कौर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता डी.पी. सिंह, एआरटीओ नेहा झा, आरटीओ प्रवर्तन कृष्ण चंद्र पलारिया, सीओ ट्रैफिक बिपेंद्र सिंह, यूपीसीएल अभियंता दीपक सैनी, उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, लोनिवि अधिशासी अभियंता हरिद्वार योगेश कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अब देखना यह होगा कि 15 अक्टूबर की समयसीमा तक हरिद्वार की सड़कें वास्तव में गड्ढामुक्त होती हैं या फिर सड़क सुरक्षा के नाम पर जारी निर्देश एक और सरकारी फाइल बनकर रह जाते हैं।



