समुद्र मंथन की थीम पर सजेगा कुंभ का भव्य स्वागत द्वार,, मंडावर-छुटमलपुर से दिखेगी देवभूमि की सांस्कृतिक झलक, ₹2.04 करोड़ से तैयार हो रहा 6.5 मीटर ऊंचा प्रवेश द्वार

समुद्र मंथन की थीम पर सजेगा कुंभ का भव्य स्वागत द्वार,,
मंडावर-छुटमलपुर से दिखेगी देवभूमि की सांस्कृतिक झलक, ₹2.04 करोड़ से तैयार हो रहा 6.5 मीटर ऊंचा प्रवेश द्वार

हरिद्वार, 17 अगस्त 2026।
आगामी कुंभ मेला-2027 में हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए उत्तर प्रदेश की सीमा पर मंडावर-छुटमलपुर में भव्य स्वागत द्वार आकार ले रहा है। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा और कुंभ की आध्यात्मिक परंपरा को केंद्र में रखकर तैयार किया जा रहा यह प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के लिए महज स्वागत स्थल नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की पहली भव्य झलक बनेगा।
मेला प्रशासन की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाए जा रहे इस स्वागत द्वार के लिए राज्य सरकार ने 204.19 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। लगभग साढ़े छह मीटर ऊंचे इस द्वार को कुंभ नगरी हरिद्वार की ओर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षक प्रवेश बिंदु के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी वास्तुकला, सज्जा और थीम में कुंभ के आध्यात्मिक महत्व के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को प्रमुखता दी जाएगी।
समुद्र मंथन की गाथा से जुड़ेगा कुंभ का आध्यात्मिक संदेश
कुंभ पर्व की धार्मिक मान्यता और समुद्र मंथन की पौराणिक कथा का गहरा संबंध माना जाता है। समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश की कथा को कुंभ पर्व की धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। इसी वजह से स्वागत द्वार की समुद्र मंथन थीम श्रद्धालुओं को कुंभ की पौराणिक और आध्यात्मिक यात्रा से जोड़ने का काम करेगी।
मंडावर से हरिद्वार की ओर बढ़ते ही श्रद्धालुओं को कुंभ की भव्यता का अहसास कराने के लिए प्रवेश क्षेत्र का सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा। उद्देश्य यह है कि कुंभ क्षेत्र में प्रवेश से पहले ही श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और उत्सव का भव्य वातावरण महसूस हो।
कई राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनेगा पहली झलक का केंद्र
मंडावर-छुटमलपुर का यह मार्ग उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। ऐसे में कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की पहली भव्य मुलाकात इसी स्वागत द्वार से होगी।
स्वागत द्वार के आसपास आवश्यक सौंदर्यीकरण और आकर्षक सज्जा की व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिससे पूरा क्षेत्र कुंभ की भावना के अनुरूप दिखाई दे। धार्मिक प्रतीकों और सांस्कृतिक तत्वों के माध्यम से श्रद्धालुओं को उत्तराखंड की परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
दिसंबर तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
स्वागत द्वार का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण में गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने निर्माण कार्य की नियमित निगरानी करने तथा निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को कहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परियोजना के प्रत्येक चरण की निगरानी की जाए, ताकि कुंभ से पहले स्वागत द्वार पूरी भव्यता के साथ तैयार हो सके।
मंडावर का यह प्रवेश द्वार आगामी कुंभ में हरिद्वार की पहचान, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का नया प्रतीक बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समुद्र मंथन की पौराणिक गाथा से सजा यह द्वार श्रद्धालुओं को सिर्फ कुंभ नगरी में प्रवेश नहीं कराएगा, बल्कि हरिद्वार की आध्यात्मिक विरासत और देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से भी रूबरू कराएगा।



