वोट कटौती पर सियासी संग्राम तेज, अनुपमा रावत और मनोज धनगर ने खोला मोर्चा,, फॉर्म-7 के जरिए चार दिन में 507 मतदाताओं के नाम हटाने की कवायद का दावा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल,, अनुपमा बोलीं—समुदाय विशेष को चुन-चुनकर निशाना बनाने की कोशिश, मनोज धनगर ने कहा—हर आवेदन का हो भौतिक सत्यापन, गलत जानकारी देने वालों पर हो कार्रवाई

वोट कटौती पर सियासी संग्राम तेज, अनुपमा रावत और मनोज धनगर ने खोला मोर्चा,,
फॉर्म-7 के जरिए चार दिन में 507 मतदाताओं के नाम हटाने की कवायद का दावा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल,,
अनुपमा बोलीं—समुदाय विशेष को चुन-चुनकर निशाना बनाने की कोशिश, मनोज धनगर ने कहा—हर आवेदन का हो भौतिक सत्यापन, गलत जानकारी देने वालों पर हो कार्रवाई
हरिद्वार। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किए जाने के आरोपों को लेकर कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत और वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं धनगर समाज महासभा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मनोज धनगर ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निर्वाचन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक अनुपमा रावत ने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों को चुन-चुनकर चिह्नित कर निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने दावा किया कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश में किया जा रहा है।
चार दिन में 507 नामों पर फॉर्म-7 का दावा
अनुपमा रावत के मुताबिक 6 अगस्त को एक, 7 अगस्त को 126, 8 अगस्त को 49 और 9 अगस्त को 331 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 दाखिल किए गए। इस तरह चार दिनों में कुल 507 मतदाताओं के नाम हटाने की कवायद किए जाने का दावा किया गया है।
विधायक का कहना है कि संबंधित सूची में शामिल कई मतदाता आज भी अपने मतदान क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और पूर्व में मतदान भी कर चुके हैं। ऐसे में उनके नाम हटाने के लिए आवेदन किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोग कथित तौर पर मतदाता सूची को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
अनुपमा रावत ने बताया कि मामले को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई तो वह स्वयं पुलिस थाने पहुंचकर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई करेंगी। साथ ही जरूरत पड़ने पर जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना देने की चेतावनी भी दी।
मनोज धनगर ने पूछा—एक व्यक्ति ने कितने आवेदन किए?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज धनगर ने भी पूरे मामले को गंभीर बताते हुए निर्वाचन अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं तो यह जांच का विषय है।
धनगर ने कहा कि निर्वाचन विभाग को प्रत्येक फॉर्म-7 आवेदन का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। जिस मतदाता के नाम को हटाने के लिए आवेदन किया गया है, उससे मौके पर संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जानी चाहिए। साथ ही संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। किसी भी वैध मतदाता का नाम गलत सूचना, भ्रम या दुर्भावना के आधार पर हटाने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। धनगर ने मांग की कि जांच में यदि किसी आवेदन में गलत जानकारी या फर्जी तथ्य पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
निर्वाचन विभाग की जांच पर टिकी नजर
कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और प्रत्येक आवेदन की सत्यता की जांच कराने की मांग की है। हालांकि सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब मामले में निर्वाचन विभाग की जांच और आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार दिनों में कथित तौर पर दाखिल किए गए 507 फॉर्म-7 आवेदनों में कितने वास्तविक हैं और कितने मामलों में मतदाता वास्तव में अपात्र हैं। यदि शिकायतों में तथ्य सामने आते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।इस दौरान मोहम्मद शफीक, अब्दुल हमीद, मुशर्रफ अंसारी, ताहिर, नदीम अंसारी, रऊफ खान, जहीर, शाहीन, शमा, शाहनवाज, हसीन, जाबिर सहित कई लोग मौजूद रहे।



