SIR में फर्जी आपत्तियों पर सियासी संग्राम, विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरा,, एक वोट भी कटने नहीं देंगे, फर्जी शिकायत करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई: विधायकों की दो टूक; बल्क में फॉर्म-7 दाखिल करने के आरोपों पर ADM ने बताई निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन,,
हरिद्वार में साप्ताहिक SIR बैठक में गरमाया मुद्दा, फुरकान अहमद, मौ.शहजाद और काजी निजामुद्दीन , रवि बहादुर, विरेंद्र जाति, ममता राकेश आदि विधायकों सहित मनोज धनगर ने तीखे उठाए सवाल; ADM जितेंद्र कुमार बोले—नियम से अधिक आपत्तियों पर होगी क्रॉस वेरिफिकेशन और कानून के तहत कार्रवाई

SIR में फर्जी आपत्तियों पर सियासी संग्राम, विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरा,,
एक वोट भी कटने नहीं देंगे, फर्जी शिकायत करने वालों पर हो कड़ी कार्रवाई: विधायकों की दो टूक; बल्क में फॉर्म-7 दाखिल करने के आरोपों पर ADM ने बताई निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन,,
हरिद्वार में साप्ताहिक SIR बैठक में गरमाया मुद्दा, फुरकान अहमद, मौ.शहजाद और काजी निजामुद्दीन , रवि बहादुर, विरेंद्र जाति, ममता राकेश आदि विधायकों सहित मनोज धनगर ने तीखे उठाए सवाल; ADM जितेंद्र कुमार बोले—नियम से अधिक आपत्तियों पर होगी क्रॉस वेरिफिकेशन और कानून के तहत कार्रवाई
हरिद्वार। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर हरिद्वार में सियासी घमासान तेज हो गया है। बुधवार को हुई साप्ताहिक बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने मतदाताओं के नाम पर कथित तौर पर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां दाखिल किए जाने का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। नेताओं ने आरोप लगाया कि कई ऐसे मतदाताओं के नाम पर भी आपत्तियां लगाई जा रही हैं, जिनका कहना है कि उन्होंने स्वयं किसी प्रकार की शिकायत नहीं की है।
बैठक में फुरकान अहमद विधायक, शहजाद विधायक, विधायक काजी निजामुद्दीन, रवि बहादुर विधायक, विधायक विरेंद्र जाति, विधायक ममता राकेश और मनोज धनगर समेत अन्य प्रतिनिधियों ने कथित फर्जी एवं थोक आपत्तियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई की मांग की।
फुरकान अहमद बोले—92 आपत्तियों में कई लोगों ने कहा, हमने शिकायत की ही नहीं
फुरकान अहमद ने बैठक में कहा कि उनकी विधानसभा के बूथ संख्या 85 और 86 में करीब 92 आपत्तियां सामने आई हैं। उनका दावा है कि जिन लोगों के नाम से आपत्तियां दाखिल की गईं, उनमें से कई लोगों ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने ऐसी कोई आपत्ति दर्ज ही नहीं कराई।उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक ही तरीके से बड़ी संख्या में आपत्तियां कौन दाखिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के नाम से फर्जी तरीके से आपत्ति लगाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
फुरकान ने कहा कि राजनीतिक दल भी यह चाहते हैं कि फर्जी वोट न बने, लेकिन किसी वास्तविक मतदाता का वोट भी गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए। उनका कहना था कि घर-घर जाकर BLO द्वारा किए गए सत्यापन के बाद अब अचानक बड़ी संख्या में आपत्तियां सामने आना गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
शहजाद की चेतावनी—सुनवाई नहीं हुई तो सड़क पर उतरेंगे
विधायक शहजाद ने बैठक के दौरान तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा कि जनता अपने वोट की हिफाजत करना जानती है। उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र में भी एक बूथ पर करीब 36 शिकायतें सामने आई हैं और कुछ लोग यह कह रहे हैं कि उनके नाम से शिकायत दर्ज कर दी गई, जबकि उन्होंने स्वयं ऐसी कोई शिकायत नहीं की।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि मामले में उचित सुनवाई नहीं हुई तो विपक्ष सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा। शहजाद ने कहा कि यह लड़ाई लंबी है और जनता के मताधिकार की रक्षा के लिए इसे मजबूती से लड़ा जाएगा।
मनोज धनगर का आरोप—बूथ से दूर बैठे लोग कर रहे आपत्तियां
मनोज धनगर ने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोग भी मतदाताओं के नाम पर आपत्तियां दाखिल कर रहे हैं, जिनका संबंधित बूथ या गांव से कोई सीधा सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत या झूठी सूचना देकर किसी मतदाता का नाम कटवाने का प्रयास करता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।धनगर ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर किसी वास्तविक मतदाता के अधिकार को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
ADM जितेंद्र कुमार ने स्पष्ट की फॉर्म-7 की सीमा
बैठक में ADM जितेंद्र कुमार ने निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन स्पष्ट करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के BLA-2 प्रतिनिधियों और सामान्य नागरिकों के लिए फॉर्म-7 दाखिल करने की अलग-अलग व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि सामान्य नागरिक SIR अवधि में निर्धारित सीमा के अनुसार फॉर्म-7 दाखिल कर सकते हैं, जबकि BLA-2 के लिए आयोग द्वारा अलग प्रावधान किया गया है।उन्होंने कहा कि सभी ERO को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित सीमा से अधिक फॉर्म स्वीकार करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन किया जाए। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित सीमा से अधिक आपत्तियां दाखिल करता है तो उसके लिए घोषणा और सत्यापन की व्यवस्था है। ऐसे मामलों में ERO और AERO स्तर से क्रॉस वेरिफिकेशन कराया जा सकता है।
ADM ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन या गलत शिकायत सामने आती है तो Representation of the People Act के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
काजी निजामुद्दीन बोले—फर्जी शिकायत साबित हुई तो मुकदमा हो
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि बैठक में उन्होंने निर्वाचन आयोग के संबंधित अधिकारियों के सामने चुनावी मैनुअल और नियमों का हवाला देते हुए बल्क में आपत्तियां स्वीकार नहीं किए जाने की मांग रखी।
उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किए जाने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में शिकायत झूठी साबित होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
काजी ने यह भी आरोप लगाया कि कई परिवारों के सदस्यों के नाम से एक-दूसरे के खिलाफ आपत्तियां दर्ज होने के मामले सामने आए हैं, जबकि संबंधित लोग ऐसी शिकायत से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमों के विपरीत बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए और वास्तविक मतदाताओं को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया में उलझाया गया तो कांग्रेस को हाईकोर्ट का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
एक वोट भी छूटा तो सवाल उठेगा—विपक्ष का स्पष्ट संदेश
SIR को लेकर बैठक में विपक्ष की सबसे बड़ी मांग यही रही कि मतदाता सूची को शुद्ध करने की प्रक्रिया में फर्जी नामों पर कार्रवाई जरूर हो, लेकिन किसी वास्तविक मतदाता का नाम केवल गलत या फर्जी आपत्ति के आधार पर न काटा जाए।
नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में हर वैध मतदाता का वोट महत्वपूर्ण है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों के मुताबिक होनी चाहिए।अब बड़ा सवाल यह है कि जिन बूथों पर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 और कथित फर्जी आपत्तियों की शिकायतें सामने आई हैं, वहां निर्वाचन अधिकारी जांच में क्या कार्रवाई करते हैं। फिलहाल हरिद्वार में SIR का मुद्दा प्रशासनिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।



