नशे के काले कारोबार का खेल अब नहीं चलेगा! हरिद्वार में प्रशासन का ‘मिशन क्लीन’ शुरू, किसकी बारी कब आएगी?… नशे के सौदागरों पर प्रशासन की तीसरी नजर! कहीं दुकानों पर छापेमारी तो कहीं नशा मुक्ति केंद्रों की जांच, स्कूलों में भी बजेगा जागरूकता का बिगुल; एडीएम जितेंद्र कुमार ने अधिकारियों को दिया अल्टीमेटम…

हरिद्वार। धर्मनगरी में नशे का कारोबार करने वालों की अब खैर नहीं! प्रतिबंधित तंबाकू, गुटखा और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री करने वालों पर प्रशासन ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। अब सवाल सिर्फ नशे के सौदागरों तक सीमित नहीं, बल्कि उन ठिकानों पर भी उठेंगे जहां नशे की गिरफ्त में आए लोगों को नई जिंदगी देने का दावा किया जाता है। प्रशासन ने एक तरफ अवैध कारोबार पर कार्रवाई का खाका तैयार किया है तो दूसरी तरफ नशा मुक्ति केंद्रों की व्यवस्थाओं की भी पड़ताल करने का फैसला लिया है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार ने जिला कार्यालय सभागार में नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन मैकेनिज्म (NCORD) की बैठक लेकर अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि नशामुक्त अभियान में अब ढिलाई नहीं चलेगी। सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें और अभियान का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
दुकान से तस्करी के नेटवर्क तक… किस पर गिरेगी गाज?
बैठक में एडीएम ने निर्देश दिए कि जनपद में प्रतिबंधित तंबाकू, गुटखा और नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए नियमित अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई की जाए। नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध बिक्री पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों पर कानून का शिकंजा कसा जा सके।
नशा मुक्ति केंद्र भी जांच के घेरे में!
प्रशासन की नजर अब नशा मुक्ति केंद्रों पर भी है। जनपद में संचालित सभी नशा मुक्ति केंद्रों का संबंधित विभागों के अधिकारी संयुक्त निरीक्षण करेंगे। केंद्रों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, उपचार व्यवस्था, साफ-सफाई और निर्धारित मानकों की जांच की जाएगी। यदि कहीं खामियां या अनियमितताएं मिलती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों में उठेगा सवाल—नशा या सुनहरा भविष्य?
नशे के खिलाफ प्रशासन अब सीधे युवाओं तक पहुंचने की तैयारी में है। शिक्षा विभाग को सभी विद्यालयों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों के बीच नशामुक्ति विषय पर निबंध और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। मकसद साफ है—युवाओं को नशे के खतरों से पहले ही आगाह करना और उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकना।
अब सिर्फ बैठक नहीं, धरातल पर दिखेगा एक्शन!
एडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि नशामुक्त हरिद्वार का लक्ष्य केवल प्रशासनिक कार्रवाई से हासिल नहीं होगा। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ अभियान को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
बैठक में डिप्टी जेलर प्रमोद भानु, पुलिस उपाधीक्षक संजय चौहान, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गणेश, सहायक कृषि अधिकारी उत्तम सिंह चौहान, डीसी हेल्थ रोहित यादव, डीसी जीएसटी एवं सेवा कर दीपक कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुबोध शर्मा, जिला सूचना अधिकारी रती लाल शाह, एसीएमओ डॉ. नमिता पंत और इंस्पेक्टर एएनटीएफ शांति कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन का यह ‘मिशन क्लीन’ नशे के अवैध कारोबार की जड़ों तक पहुंचेगा या फिर कार्रवाई सिर्फ बैठकों और निर्देशों तक सिमटकर रह जाएगी? आने वाले दिनों में इसकी असली तस्वीर सामने आएगी।




