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पिरान कलियर दरगाह में आखिर किसके संरक्षण में पनप रही हैं अनियमितताएं? बकाया, अवैध कब्जे और उगाही के आरोपों से गरमाया मामला,, मुस्लिम आस्था के बड़े केंद्र दरगाह पिरान कलियर प्रबंधन पर लगातार उठ रहे सवाल, जवाबदेही तय करने के बजाय क्यों साधी जा रही है चुप्पी? श्रद्धालुओं का सवाल—अगर सब कुछ पारदर्शी है तो फिर जांच से परहेज क्यों? दरगाह प्रशासन से जवाब की मांग तेज,, गोलक गबन कांड की फाइल भी समेटी

पिरान कलियर दरगाह में आखिर किसके संरक्षण में पनप रही हैं अनियमितताएं? बकाया, अवैध कब्जे और उगाही के आरोपों से गरमाया मामला,,

मुस्लिम आस्था के बड़े केंद्र दरगाह पिरान कलियर प्रबंधन पर लगातार उठ रहे सवाल, जवाबदेही तय करने के बजाय क्यों साधी जा रही है चुप्पी?

श्रद्धालुओं का सवाल—अगर सब कुछ पारदर्शी है तो फिर जांच से परहेज क्यों? दरगाह प्रशासन से जवाब की मांग तेज,, गोलक गबन कांड की फाइल भी समेटी

रुड़की/पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी (रह.) की दरगाह एक बार फिर गंभीर सवालों के केंद्र में है। दरगाह की व्यवस्था को लेकर लगातार बकाया वसूली, कथित अवैध कब्जों, वित्तीय अनियमितताओं और अवैध उगाही जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। इन मामलों पर समय-समय पर शिकायतें और आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी और दरगाह प्रशासन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे?

स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई जनता के सामने रखी जानी चाहिए।

दरगाह से जुड़े बकाया मामलों को लेकर भी लंबे समय से चर्चाएं होती रही हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जिन लोगों पर दरगाह का बकाया है, उनसे वसूली की कार्रवाई कितनी हुई और कितनी राशि अभी तक लंबित है? यदि बकाया वसूली में ढिलाई बरती गई है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

इसके साथ ही दरगाह की भूमि पर कथित अवैध कब्जों का मुद्दा भी लगातार चर्चा में बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी या वक्फ की संपत्ति पर अवैध कब्जे हैं तो उन्हें हटाने के लिए सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। आखिर कार्रवाई में देरी की वजह क्या है?

कथित अवैध उगाही के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यदि ऐसी शिकायतें मिली हैं तो उनकी जांच कहां तक पहुंची? क्या किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई या मामले सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए? ऐसे सवाल अब खुलकर उठने लगे हैं।

सबसे अधिक चर्चा दरगाह प्रशासक की चुप्पी को लेकर हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि शिकायतों में दम है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लगातार चुप्पी लोगों के मन में संदेह पैदा कर रही है।

सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने मांग की है कि दरगाह की आय-व्यय, दुकानों के आवंटन, बकाया वसूली, भूमि अभिलेख और प्रशासनिक व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। साथ ही पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

अब लोगों की निगाहें शासन, वक्फ बोर्ड और दरगाह प्रशासन पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि आस्था के इस पवित्र केंद्र से जुड़े सभी सवालों पर पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाएगा और यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

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