नोटिस पढा तो पलटी पूरी कहानी… वायरल वीडियो से कंचन सिन्हा ने झाड़ा पल्ला! अरुण भदौरिया के कानूनी नोटिस का जवाब—“वीडियो मेरा नहीं, छेड़छाड़ कर किसी और ने किया वायरल”, कैलाशानंद गिरि, रवींद्र पुरी और हरि गिरि के सम्मान की कही बात,, कैलाश आनंद गिरि महाराज के सम्मान की बात, तीनों संतों के प्रति जताई श्रद्धा,, ‘कंचन गिरि’ से ‘कंचन सिन्हा’ तक… नाम ने भी खींचा ध्यान,, एक तरफ नोटिस की तल्खी… दूसरी तरफ जवाब में आया सम्मान
फिलहाल इस विवाद में आरोप बनाम इनकार आमने-सामने,,अब देखना यह है कि इस ‘वायरल वीडियो कांड’ का अगला सीन अदालत में खुलता है या फिर किसी नए वीडियो के साथ कहानी एक बार फिर करवट लेती है।

नोटिस पढा तो पलटी पूरी कहानी… वायरल वीडियो से कंचन सिन्हा ने झाड़ा पल्ला!
अरुण भदौरिया के कानूनी नोटिस का जवाब—“वीडियो मेरा नहीं, छेड़छाड़ कर किसी और ने किया वायरल”, कैलाशानंद गिरि, रवींद्र पुरी और हरि गिरि के सम्मान की कही बात,,
कैलाश आनंद गिरि महाराज के सम्मान की बात, तीनों संतों के प्रति जताई श्रद्धा,,
‘कंचन गिरि’ से ‘कंचन सिन्हा’ तक… नाम ने भी खींचा ध्यान,,
एक तरफ नोटिस की तल्खी… दूसरी तरफ जवाब में आया सम्मान

हरिद्वार। संतों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामला कानूनी नोटिस तक पहुंचा तो जवाब में कहानी ही बदल गई। अधिवक्ता अरुण भदौरिया की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद साध्वी कंचन गिरि की ओर से उनके अधिवक्ता अशोक कुमार कदवाल, गाजियाबाद के माध्यम से जवाब भेजा गया है। जवाब में “साध्वी कंचन सिन्हा” के हस्ताक्षर हैं और सबसे बड़ा दावा यही है—“वायरल वीडियो मेरा नहीं है।”
वीडियो वायरल… आरोप लगे… नोटिस पहुंचा और फिर आया पलटवार
पूरा मामला उस कथित वीडियो से जुड़ा है, जिसमें आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश आनंद गिरि महाराज की थाईलैंड यात्रा, मसाज और निजी आचरण को लेकर कथित टिप्पणियां किए जाने का आरोप लगाया गया था। अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने अपने अधिवक्ता कमल भदौरिया और सुमेधा भदौरिया के माध्यम से साध्वी कंचन गिरि को कानूनी नोटिस भेजकर इन कथित बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा था।
नोटिस में आरोप लगाया गया था कि वीडियो के जरिए संतों की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बातें सार्वजनिक की गईं। नोटिस में स्वामी रवींद्र पुरी महाराज और स्वामी हरि गिरि महाराज को लेकर कथित आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया गया था।
नोटिस में सवाल सीधा था—आखिर ये बातें किस आधार पर कही गईं? इनके समर्थन में क्या प्रमाण हैं?
साथ ही कथित वीडियो हटाने और धार्मिक भावनाओं को पहुंची ठेस पर लिखित खेद व्यक्त करने की मांग भी की गई थी।
लेकिन जवाब आया तो कहानी का ‘ट्विस्ट’ सामने आ गया
साध्वी की ओर से भेजे गए कानूनी जवाब में कहा गया है कि संबंधित वीडियो उन्होंने वायरल नहीं किया। जवाब में दावा किया गया कि किसी गलत व्यक्ति ने उनके वीडियो का दुरुपयोग किया और उसमें छेड़छाड़ कर गलत वीडियो तैयार कर वायरल किया।
यानी जिस वीडियो को लेकर विवाद ने तूल पकड़ा, उसके संबंध में साध्वी की ओर से सीधा इनकार सामने आया है।
जवाब में कहा गया है कि उन्हें बदनाम करने और उनके चरित्र को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया। उन्होंने संबंधित बयान देने और वीडियो वायरल करने दोनों से इनकार किया है।
कैलाश आनंद गिरि महाराज के सम्मान की बात, तीनों संतों के प्रति जताई सम्मानित श्रद्धा
कानूनी जवाब में साध्वी कंचन सिन्हा ने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाश आनंद गिरि महाराज के प्रति सम्मान और आस्था होने की बात कही है। साथ ही स्वामी रवींद्र पुरी महाराज और स्वामी हरि गिरि महाराज के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया गया है।
जवाब में यह भी कहा गया है कि उन्होंने किसी भी धार्मिक संत का अपमान नहीं किया और न ही उनके संबंध में ऐसा कोई वीडियो वायरल किया।
‘कंचन गिरि’ से ‘कंचन सिन्हा’ तक… नाम ने भी खींचा ध्यान
इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। जिस नोटिस में साध्वी कंचन गिरि का उल्लेख किया गया था, उसका जवाब “साध्वी कंचन सिन्हा” के नाम से दिया गया है। अब विवाद का अगला अध्याय इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूम रहा है कि आखिर वायरल वीडियो का असली स्रोत क्या है? वीडियो वास्तविक है या उसमें छेड़छाड़ की गई? यदि छेड़छाड़ हुई तो किसने की? और इसे वायरल करने के पीछे किसका हाथ है?
इन सवालों के जवाब अब कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आने बाकी हैं।
एक तरफ नोटिस की तल्खी… दूसरी तरफ जवाब में आया सम्मान
अरुण भदौरिया की ओर से भेजे गए नोटिस में कथित बयान को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया था। वहीं जवाब में साध्वी की ओर से कहा गया है कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया और संतों के प्रति उनकी पूरी श्रद्धा एवं सम्मान है।
फिलहाल इस विवाद में आरोप बनाम इनकार आमने-सामने हैं। कानूनी नोटिस के बाद आया जवाब कहानी में नया ट्विस्ट जरूर लेकर आया है, लेकिन वायरल वीडियो की सच्चाई और उसके स्रोत पर अंतिम तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।
अब देखना यह है कि इस ‘वायरल वीडियो कांड’ का अगला सीन अदालत में खुलता है या फिर किसी नए वीडियो के साथ कहानी एक बार फिर करवट लेती है।



