अलर्टउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरेंपॉलिटिकल तड़काप्रदर्शन

लक्सर में पत्रकार विवाद ने पकड़ी ‘जनआंदोलन’ की रफ्तार! 29 मई को तहसील घेराव की तैयारी, समर्थन में उतरे कई संगठन और  विधायक मौ शहजाद और उमेश कुमार ,, “पत्रकारों से कथित अभद्रता पर बढ़ा सियासी और सामाजिक दबाव” — प्रेस क्लब, किसान संगठन, भीम आर्मी और व्यापार मंडल ने खोला मोर्चा, प्रशासन की चुप्पी पर उठने लगे सवाल,, “तहसील बंद से सड़क तक संघर्ष की चेतावनी” — विधायक उमेश कुमार बोले, ‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और होगा उग्र’, 29 मई पर टिकी सबकी नजरें,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- लक्सर में पत्रकार विवाद ने पकड़ी ‘जनआंदोलन’ की रफ्तार! 29 मई को तहसील घेराव की तैयारी, समर्थन में उतरे कई संगठन और  विधायक मौ शहजाद और उमेश कुमार ,,

“पत्रकारों से कथित अभद्रता पर बढ़ा सियासी और सामाजिक दबाव” — प्रेस क्लब, किसान संगठन, भीम आर्मी और व्यापार मंडल ने खोला मोर्चा, प्रशासन की चुप्पी पर उठने लगे सवाल,,

“तहसील बंद से सड़क तक संघर्ष की चेतावनी” — विधायक उमेश कुमार बोले, ‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और होगा उग्र’, 29 मई पर टिकी सबकी नजरें,,

लक्सर। लक्सर तहसील में पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शुरुआत में यह विवाद केवल पत्रकारों और तहसील कर्मचारियों के बीच टकराव तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब इसने बड़ा सामाजिक और राजनीतिक स्वरूप लेना शुरू कर दिया है। पत्रकारों के समर्थन में जिले के कई प्रेस संगठन, किसान संगठन, भीम आर्मी, व्यापार मंडल और जनप्रतिनिधि खुलकर सामने आ गए हैं। ऐसे में आगामी 29 मई को प्रस्तावित आंदोलन अब एक सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि संभावित जनआंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।

मामले को लेकर लक्सर का माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। पत्रकार संगठनों का आरोप है कि तहसील में तैनात कुछ कर्मचारियों द्वारा पत्रकारों के साथ कथित अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बाद पत्रकारों में गहरा रोष है। इस घटना के बाद लक्सर प्रेस क्लब एसोसिएशन ने संबंधित कर्मचारियों के स्थानांतरण की मांग उठाई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से न तो कोई ठोस वार्ता हुई और न ही कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने आई।

इसी प्रशासनिक चुप्पी और कथित उदासीनता के विरोध में अब 29 मई को बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया गया है। आंदोलन की रणनीति को लेकर लगातार बैठकें और संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह लड़ाई केवल पत्रकारों के सम्मान की नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान की भी है।

विवाद के बीच अब विभिन्न संगठनों का समर्थन मिलने से आंदोलन का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। हरिद्वार जिले के विभिन्न प्रेस क्लबों ने पत्रकारों के समर्थन में अपनी एकजुटता दिखाई है। इसके साथ-साथ किसान संगठनों और भीम आर्मी ने भी आंदोलन में शामिल होने की घोषणा कर दी है।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप भी साफ दिखाई देने लगा है। लक्सर से बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद और खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार खुलकर पत्रकारों के पक्ष में सामने आए हैं। दोनों नेताओं ने आंदोलन को समर्थन देने का संकेत देकर प्रशासनिक दबाव को और बढ़ा दिया है।

खानपुर विधायक उमेश कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि पत्रकारों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा और यदि आवश्यकता पड़ी तो तहसील बंद कराने जैसे बड़े कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

उनके इस बयान के बाद आंदोलन की गंभीरता और बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब कोई मुद्दा मीडिया से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक मंचों तक पहुंच जाता है, तो वह केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह जाता, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा विषय बन जाता है।

वहीं दूसरी ओर लक्सर व्यापार मंडल ने भी आंदोलन को अपना समर्थन देने का ऐलान किया है। जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में व्यापारी प्रतिनिधि प्रेस क्लब पहुंचकर पत्रकारों के साथ एकजुटता दिखाएंगे। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आंदोलन को स्थानीय स्तर पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है।

स्थानीय लोगों के बीच भी इस पूरे प्रकरण को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। कुछ लोग इसे पत्रकारों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि प्रशासन को समय रहते संवाद स्थापित कर विवाद का समाधान निकालना चाहिए था।

अब सभी की निगाहें 29 मई पर टिक गई हैं। बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन आंदोलन से पहले कोई सकारात्मक पहल करेगा, बातचीत का रास्ता निकालेगा और तनाव कम करने की कोशिश करेगा, या फिर लक्सर की सड़कों पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेगा।फिलहाल जिस तरह समर्थन का दायरा बढ़ता जा रहा है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला अब सिर्फ पत्रकारों और कर्मचारियों के बीच विवाद नहीं रहा, बल्कि एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिन लक्सर की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

Related Articles

Back to top button