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हरेला महोत्सव बनेगा हरित क्रांति का महाअभियान, हरिद्वार में 16 जुलाई को एक दिन में लगेंगे 30 हजार पौधे,, ‘हरित हरिद्वार’ मिशन के तहत 5.80 लाख पौधारोपण का लक्ष्य, हर पौधे की ऐप से होगी निगरानी, संरक्षण की तय होगी जिम्मेदारी,, डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध का आह्वान— केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना ही सच्ची पर्यावरण सेवा, हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी,,

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने जानकारी दी कि 'हरित हरिद्वार' कार्यक्रम के तहत कुल 5 लाख 80 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि हरेला महोत्सव के दिन एक ही दिन में 30 हजार पौधे लगाए जाएंगे। यह अभियान केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधि, विद्यालय, महाविद्यालय, स्वयं सहायता समूह, युवा मंगल दल, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

हरेला महोत्सव बनेगा हरित क्रांति का महाअभियान, हरिद्वार में 16 जुलाई को एक दिन में लगेंगे 30 हजार पौधे,,

‘हरित हरिद्वार’ मिशन के तहत 5.80 लाख पौधारोपण का लक्ष्य, हर पौधे की ऐप से होगी निगरानी, संरक्षण की तय होगी जिम्मेदारी,,

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध का आह्वान— केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना ही सच्ची पर्यावरण सेवा, हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी,,

हरिद्वार, 29 जून। उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक हरेला महोत्सव को इस वर्ष हरिद्वार जनपद में ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। 16 जुलाई 2026 को पूरे जिले में व्यापक जनभागीदारी के साथ एक विशाल वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत एक ही दिन में 30 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं ‘हरित हरिद्वार’ अभियान के अंतर्गत पूरे जनपद में 5 लाख 80 हजार पौधों के रोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि इस बार पौधे लगाने तक ही अभियान सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अत्याधुनिक मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रत्येक पौधे की जियो-टैगिंग, निगरानी, सिंचाई और संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता डीएफओ हरिद्वार स्वप्निल अनिरुद्ध ने की। बैठक में वन विभाग सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को अभियान की विस्तृत कार्ययोजना समझाई गई तथा स्पष्ट निर्देश दिए गए कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन बने।

बैठक को संबोधित करते हुए डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है। आज बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र और बढ़ते तापमान जैसी चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। यदि समाज आज जागरूक नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, पर्याप्त जल और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को पूरे उत्तराखंड में हरेला महोत्सव मनाया जाएगा। इसी क्रम में हरिद्वार में जिला स्तर पर सभी विभागों की बैठक आयोजित कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। प्रत्येक विभाग को उसकी जिम्मेदारी सौंप दी गई है ताकि अभियान पूरी तैयारी और समन्वय के साथ सफल बनाया जा सके।

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने जानकारी दी कि ‘हरित हरिद्वार’ कार्यक्रम के तहत कुल 5 लाख 80 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि हरेला महोत्सव के दिन एक ही दिन में 30 हजार पौधे लगाए जाएंगे। यह अभियान केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधि, विद्यालय, महाविद्यालय, स्वयं सहायता समूह, युवा मंगल दल, स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन और आम नागरिक भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि इस बार वृक्षारोपण अभियान की सबसे बड़ी विशेषता डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम होगी। जिला प्रशासन ने एक विशेष ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से लगाए गए प्रत्येक पौधे की जियो-टैगिंग की जाएगी। संबंधित विभाग पौधे लगाने के बाद उसकी फोटो, स्थान, प्रजाति और जिम्मेदार अधिकारी का विवरण ऐप पर अपलोड करेंगे। इसके बाद उसी ऐप के माध्यम से समय-समय पर पौधों की सिंचाई, सुरक्षा, वृद्धि और जीवितता की निगरानी की जाएगी। यदि किसी स्थान पर पौधा नष्ट होता है तो उसकी सूचना भी दर्ज होगी और वहां पुनः पौधारोपण कराया जाएगा।

बैठक में सभी विभागों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन तत्काल करें। सरकारी कार्यालय, विद्यालय, महाविद्यालय, अस्पताल, पार्क, सड़क किनारे, नदी और नालों के तट, सामुदायिक भूमि तथा खाली सरकारी भूमि को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्थानीय जलवायु के अनुरूप छायादार, औषधीय और फलदार प्रजातियों के पौधों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने कहा कि 10 जुलाई तक गड्ढों की खुदाई, जैविक खाद, पौधों का आवंटन, ट्री-गार्ड, सिंचाई और परिवहन की सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद 11 से 15 जुलाई तक सभी पौधारोपण स्थलों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा ताकि अभियान के दिन किसी प्रकार की कमी न रह जाए।

उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि वृक्षारोपण की सफलता पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी जीवितता से तय होगी। इसलिए पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित सिंचाई, सुरक्षा, देखभाल और आवश्यकतानुसार पुनः रोपण की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया, स्थानीय मीडिया, पोस्टर-बैनर, डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा विद्यालयों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। “एक परिवार–दो पौधे” अभियान के माध्यम से प्रत्येक परिवार को कम से कम दो पौधे लगाने और उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

डीएफओ ने कहा कि आगामी महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए ‘हरित हरिद्वार’ अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारी भी निभाए तो हरिद्वार न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी राष्ट्रीय उदाहरण बनेगा।

बैठक के अंत में सभी विभागों ने संकल्प लिया कि हरेला महोत्सव को केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का महाअभियान बनाया जाएगा। प्रशासन ने आमजन से भी अपील की कि वे वृक्षारोपण को अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानें, क्योंकि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और सुरक्षित भविष्य देने का सबसे बड़ा माध्यम है।

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