मानसून से पहले हरिद्वार प्रशासन अलर्ट, डीएम मयूर दीक्षित ने सभी विभागों को दिए सख्त निर्देश,, जलभराव रोकने के लिए नालों-नालियों की सफाई, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अग्रिम तैयारियां पूरी करने का आदेश,, जर्जर स्कूल भवनों में नहीं होगी पढ़ाई, आपदा से निपटने के लिए खाद्य सामग्री, राहत व्यवस्था और समन्वय पर विशेष जोर,,
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) अमित कुमार चन्द, उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, अधिशासी अभियंता सिंचाई ओमजी गुप्ता, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विपिन चौहान, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे

मानसून से पहले हरिद्वार प्रशासन अलर्ट, डीएम मयूर दीक्षित ने सभी विभागों को दिए सख्त निर्देश,,
जलभराव रोकने के लिए नालों-नालियों की सफाई, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अग्रिम तैयारियां पूरी करने का आदेश,,
जर्जर स्कूल भवनों में नहीं होगी पढ़ाई, आपदा से निपटने के लिए खाद्य सामग्री, राहत व्यवस्था और समन्वय पर विशेष जोर,,
हरिद्वार, 29 जून। आगामी मानसून को देखते हुए हरिद्वार जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने सोमवार को जिला कार्यालय सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां समयबद्ध ढंग से पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए संभावित आपदाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव, सड़क क्षति, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में प्रशासन का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पहले से प्रभावी तैयारी कर नुकसान को न्यूनतम करना है। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि अपने-अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएं ताकि बारिश के दौरान आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
डीएम ने नगर निगम, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों, जिला पंचायत, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों में नालों, नालियों और कलमठों की व्यापक सफाई तत्काल सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जल निकासी की व्यवस्था सुचारु रहेगी तो अधिकांश क्षेत्रों में जलभराव की समस्या स्वतः कम हो जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सफाई कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका स्थलीय सत्यापन भी किया जाए।
बैठक में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि जनपद के सभी जर्जर विद्यालय भवनों का तत्काल सर्वे कराया जाए। जिन भवनों की स्थिति असुरक्षित है, वहां किसी भी स्थिति में पठन-पाठन संचालित न किया जाए। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के आदेश दिए ताकि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।
संभावित आपदा की स्थिति में राहत कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को आवश्यक खाद्य सामग्री के पैकेट पहले से तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में बाढ़ अथवा अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण लोगों का संपर्क टूटता है तो राहत सामग्री तत्काल उपलब्ध कराई जा सके। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने और आपूर्ति व्यवस्था को भी सुचारु रखने के निर्देश दिए गए।
सिंचाई विभाग को बाढ़ संभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए डीएम ने कहा कि संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण कर सभी सुरक्षात्मक उपाय समय रहते पूरे किए जाएं। नदी किनारे बसे क्षेत्रों, तटबंधों तथा जल निकासी तंत्र की नियमित निगरानी की जाए ताकि किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि मानसून के दौरान सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी सक्रियता तथा जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या आपदा की सूचना मिलने पर संबंधित विभाग बिना समय गंवाए आपसी समन्वय स्थापित कर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसके लिए प्रत्येक विभाग को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभानी होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जाए, संचार व्यवस्था सुचारु बनी रहे तथा फील्ड स्तर पर तैनात कर्मचारियों से नियमित संपर्क बनाए रखा जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लेने और राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न होने देने के भी निर्देश दिए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) अमित कुमार चन्द, उप नगर आयुक्त दीपक गोस्वामी, अधिशासी अभियंता सिंचाई ओमजी गुप्ता, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता योगेश कुमार, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विपिन चौहान, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
मानसून से पहले आयोजित इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट है कि हरिद्वार जिला प्रशासन इस बार पूर्व तैयारी और बेहतर समन्वय के माध्यम से संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की रणनीति पर कार्य कर रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी कर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की जनहानि अथवा अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।



