राजस्व बढ़ाने के लिए धामी सरकार का बड़ा ‘एक्शन प्लान’, लक्जरी EV की सब्सिडी पर कैंची—AI से खुलेगा टैक्स चोरी का खेल!…. वर्चुअल रजिस्ट्री से लेकर ग्रीन सेस तक बड़े फैसले, आबकारी के ₹355 करोड़ पुराने बकाये पर भी शिकंजा—सरकार ने विभागों को दिया साफ संदेश, राजस्व लक्ष्य से समझौता नहीं!

राजस्व बढ़ाने के लिए धामी सरकार का बड़ा ‘एक्शन प्लान’, लक्जरी EV की सब्सिडी पर कैंची—AI से खुलेगा टैक्स चोरी का खेल!….
वर्चुअल रजिस्ट्री से लेकर ग्रीन सेस तक बड़े फैसले, आबकारी के ₹355 करोड़ पुराने बकाये पर भी शिकंजा—सरकार ने विभागों को दिया साफ संदेश, राजस्व लक्ष्य से समझौता नहीं!
उत्तराखंड में सरकारी खजाने को मजबूत करने के लिए धामी सरकार ने अब राजस्व वसूली को लेकर कमर कस ली है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में तय राजस्व लक्ष्य को शत-प्रतिशत हासिल करने के लिए सरकार ने विभागवार समीक्षा के बाद ऐसा एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसमें टैक्स चोरी से लेकर राजस्व रिसाव तक पर सीधा प्रहार करने की तैयारी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में परिवहन, वाणिज्य कर, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन, आबकारी, खनन, वन और ऊर्जा विभाग की स्थिति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
बैठक में सामने आया कि 31 जुलाई 2026 तक राज्य के कुल ₹67,526 करोड़ के राजस्व लक्ष्य के मुकाबले ₹17,743 करोड़ यानी करीब 26 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हो चुका है। वहीं राज्य के अपने राजस्व का लक्ष्य ₹25,219 करोड़ है, जिसके मुकाबले ₹8,299 करोड़ यानी 32 प्रतिशत की वसूली हुई है। सरकार अब बचे हुए लक्ष्य को तेजी से पूरा करने के लिए राजस्व के हर संभावित स्रोत को खंगालने की तैयारी में है।
लक्जरी EV वालों को बड़ा झटका! सब्सिडी पर लगेगी कैंची
सबसे बड़ा फैसला लक्जरी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर सामने आया है। परिवहन विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में ₹1,703 करोड़ का राजस्व लक्ष्य दिया गया है, जिसके मुकाबले शुरुआती चार महीनों में ₹530 करोड़ यानी 31 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।
बैठक में यह बात सामने आई कि इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जा रही सब्सिडी के कारण करीब ₹74 करोड़ के राजस्व नुकसान का आकलन सामने आया है। इसके बाद मुख्य सचिव ने लक्जरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के सामने रखने के निर्देश दिए हैं।
यानी अब महंगी और लक्जरी EV खरीदने वालों को मिलने वाली सरकारी राहत पर सरकार पुनर्विचार करने जा रही है। सरकार का फोकस साफ है—जहां राजस्व की बड़ी गुंजाइश है, वहां नीति की समीक्षा होगी और खजाने के नुकसान को रोका जाएगा।
AI बनेगा टैक्स चोरों का ‘डिटेक्टर’, बिजली खपत से खुलेगा कारोबार का राज!
टैक्स चोरी करने वालों के लिए इससे भी बड़ा झटका वाणिज्य कर विभाग की योजना है। GST में चालू वित्तीय वर्ष के लिए ₹12,200 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चार महीनों में करीब ₹3,830 करोड़ यानी 31 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।
अब सरकार टैक्स चोरी और राजस्व लीकेज पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर विकसित करने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार विश्व बैंक के सहयोग से आगामी 5 से 6 महीनों में AI आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा।
सबसे खास बात यह है कि सिस्टम केवल कागजी आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहेगा। उद्योगों की बिजली खपत, रियल एस्टेट से जुड़े आंकड़ों और आयकर डेटा का मिलान करके संदिग्ध गतिविधियों और संभावित टैक्स लीकेज की पहचान की जाएगी।
यानी कागजों में छोटा कारोबार और जमीन पर बड़ा कारोबार दिखाने वालों के आंकड़ों का अंतर अब डिजिटल सिस्टम की नजर से बचाना आसान नहीं होगा।
वर्चुअल रजिस्ट्री से दफ्तरों के चक्कर होंगे कम!
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में भी सरकार ने बड़ा बदलाव करने की तैयारी की है। विभाग का चालू वित्तीय वर्ष का लक्ष्य ₹3,092 करोड़ है, जिसके मुकाबले अब तक ₹1,143 करोड़ यानी 37 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।
हालांकि रजिस्टर्ड दस्तावेजों की संख्या में 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव ने आगामी 3 से 5 महीनों में चरणबद्ध तरीके से वर्चुअल रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही UCC पोर्टल को सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों से जोड़ने और वसीयत के पंजीकरण को आसान बनाने की दिशा में भी काम करने को कहा गया है।
बाहरी राज्यों के वाहनों पर भी नजर, हर एंट्री प्वाइंट पर ANPR कैमरे!
उत्तराखंड में दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसके लिए प्रदेश के एंट्री प्वाइंट्स पर ANPR यानी ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरे लगाने की तैयारी है।
इससे वाहनों की पहचान और निगरानी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी और ग्रीन सेस की वसूली को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास होगा।
आबकारी विभाग को भी टारगेट—₹355 करोड़ पुराने बकाये की होगी वसूली
आबकारी विभाग भी सरकार की निगाह में है। विभाग का लक्ष्य ₹5,384 करोड़ है और शुरुआती चार महीनों में ₹1,623 करोड़ यानी करीब 30 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।
सरकार ने वर्ष 2016-17 से लंबित ₹355 करोड़ के बकाये की तत्काल वसूली के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही स्थानीय फलों से वाइनरी स्थापित करने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था तैयार करने और बाजार में विभिन्न ब्रांडों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
खनन में धीमी रफ्तार पर भी सरकार सख्त
खनन विभाग के लिए ₹1,500 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित है, लेकिन शुरुआती चार महीनों में महज ₹267 करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ है। सरकार ने रॉयल्टी दरों में संशोधन के साथ-साथ गौला, नंदौर और दाबका नदियों में खनन पट्टों के नवीनीकरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बिना जनता पर अतिरिक्त बोझ डाले बिजली ड्यूटी में बदलाव की तैयारी
वाटर टैक्स की वसूली अदालत के आदेश के बाद प्रभावित होने से राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए ऊर्जा विभाग को भी रास्ता तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक भार डाले बिना इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के पुनर्गठन का प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
कुल मिलाकर सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है—राजस्व का लक्ष्य कागजों पर नहीं, जमीन पर पूरा करना है। लक्जरी EV की सब्सिडी से लेकर GST चोरी, बाहरी वाहनों के ग्रीन सेस, वर्चुअल रजिस्ट्री, पुराने आबकारी बकाये और खनन राजस्व तक सरकार ने कमाई के हर मोर्चे को कसने की तैयारी कर ली है।
अब असली परीक्षा अधिकारियों की होगी—एक्शन प्लान कितना तेजी से जमीन पर उतरता है और सरकारी खजाने में कितना अतिरिक्त राजस्व पहुंचता है, आने वाले महीनों में यही सबसे बड़ा सवाल होगा।




