कलियर में नशे के सौदागरों पर STF और पुलिस का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! मेडिकल स्टोर में छिपा था नशे का कथित खेल, दो गिरफ्तार,, दवा के नाम पर नशे की सप्लाई का आरोप—पैकिंग और लेबल हटाकर बेचे जा रहे थे कैप्सूल, छापे में 1,150 कैप्सूल और 10 कोडीन सिरप बरामद

कलियर में नशे के सौदागरों पर STF और पुलिस का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! मेडिकल स्टोर में छिपा था नशे का कथित खेल, दो गिरफ्तार,,
दवा के नाम पर नशे की सप्लाई का आरोप—पैकिंग और लेबल हटाकर बेचे जा रहे थे कैप्सूल, छापे में 1,150 कैप्सूल और 10 कोडीन सिरप बरामद

हरिद्वार/कलियर, 15 सितंबर।
पिरान कलियर में नशीली दवाओं के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ STF ने एक बार फिर बड़ा एक्शन लिया है। इस बार निशाने पर आया मोनी मेडिकल स्टोर। सूचना थी कि मेडिकल स्टोर की आड़ में नशीली दवाओं की बिक्री की जा रही है। सूचना मिलते ही STF, कलियर पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम सक्रिय हुई और दुकान पर दबिश दे दी।
तलाशी के दौरान टीम को जो मिला, उसने कार्रवाई को बड़ी बरामदगी में बदल दिया। पुलिस के मुताबिक दुकान से 1,150 Puroxiwin Spas कैप्सूल और 10 Codectus TR कोडीन कफ सिरप बरामद किए गए। मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 40 वर्षीय कुर्बान अली निवासी महमूदपुर और 24 वर्षीय आदिल निवासी मुकरपुर के रूप में हुई है।
एक सूचना… और सीधे मेडिकल स्टोर पर पहुंची टीम
STF निरीक्षक भवानी शंकर पंत को सूचना मिली थी कि पिरान कलियर में मोनी मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं का कथित कारोबार चल रहा है।
STF ने सूचना को गंभीरता से लेते हुए टीम तैयार की। कार्रवाई में STF के साथ ड्रग विभाग और कलियर पुलिस को भी शामिल किया गया।
संयुक्त टीम जब मोनी मेडिकल स्टोर पहुंची तो दुकान पर मौजूद दोनों आरोपियों से पूछताछ की गई। इसके बाद दुकान की नियमानुसार तलाशी शुरू हुई।
रैक में छिपा था ‘नशे का स्टॉक’
पुलिस के अनुसार तलाशी के दौरान काउंटर के ऊपरी रैक से 10 Codectus TR सिरप बरामद हुए। पुलिस के अनुसार इन सिरप में Triprolidine HCL और Codeine Phosphate मौजूद है।
इसके बाद टीम को पन्नियों में रखे कैप्सूल मिले। चार पन्नियों में 215-215 कैप्सूल बताए गए, जबकि अतिरिक्त 290 कैप्सूल भी बरामद किए गए।
कुल संख्या पहुंची—
1,150 कैप्सूल।
पुलिस के अनुसार बरामद कैप्सूल पर Puroxiwin Spas लिखा हुआ था।
पैकिंग गायब, कैप्सूल खुले—पुलिस के सामने आरोपियों ने क्या बताया?
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि ये कैप्सूल ट्रामाडोल हैं और उन्हें मूल पैकिंग तथा लेबल हटाकर लूज में बेचा जाता था।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनके पास इन दवाओं की खरीद और बिक्री से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं था। नशीले कैप्सूल नशे के आदी लोगों को बेचने और मुनाफा कमाने की बात भी पूछताछ में सामने आने का पुलिस ने दावा किया है।
मौके पर किसी चिकित्सक का प्रिस्क्रिप्शन भी नहीं मिला।
अब NDPS एक्ट में फंसे दोनों आरोपी
बरामदगी और पूछताछ के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को NDPS Act की धारा 8/22/29 के तहत गिरफ्तार कर लिया।
मामले में मु0अ0सं0 212/2026 दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है।
कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल
इस कार्रवाई ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी मात्रा में नशीली दवाएं मेडिकल स्टोर तक कैसे पहुंचीं? इन्हें किससे खरीदा गया? कौन-कौन लोग इन दवाओं के खरीदार थे? और क्या इसके पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क काम कर रहा था?
इन सवालों का जवाब पुलिस की आगे की जांच में सामने आएगा।
STF के साथ ड्रग्स विभाग भी मैदान में
इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि ड्रग विभाग के अधिकारियों ने भी संयुक्त टीम के साथ कार्रवाई में हिस्सा लिया।
STF देहरादून से निरीक्षक भवानी शंकर पंत, उपनिरीक्षक दीपक मैठाणी, हेड कांस्टेबल देशराज और कांस्टेबल रवि पंत शामिल रहे।
कलियर पुलिस से अ0उ0नि0 रामअवतार, हेड कांस्टेबल इसरार और हेड कांस्टेबल माजिद कार्रवाई में शामिल रहे।
ड्रग विभाग से ड्रग इंस्पेक्टर विनोद जगुड़ी और ड्रग इंस्पेक्टर हरीश सिंह टीम का हिस्सा रहे।
कलियर में नशे के कारोबार पर बढ़ी सख्ती
पिरान कलियर और आसपास के क्षेत्रों में नशीली दवाओं के कथित कारोबार को लेकर पुलिस और STF की कार्रवाई लगातार चर्चा में रही है। ताजा कार्रवाई में मेडिकल स्टोर से बड़ी संख्या में कैप्सूल और कोडीन सिरप बरामद होने के बाद अब जांच का फोकस केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगा।
यदि जांच में सप्लाई चेन सामने आती है तो कार्रवाई की आंच आगे तक पहुंच सकती है।
फिलहाल दो आरोपी सलाखों के पीछे हैं, नशीली दवाओं की खेप पुलिस के कब्जे में है और मुकदमा अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है।
कलियर में STF का संदेश साफ है—नशे का कारोबार चाहे किसी गली से चले या मेडिकल स्टोर की आड़ में, पुलिस की नजर से बचना आसान नहीं।



