सुमन नगर में जलभराव से हाहाकार, कॉलोनियां बसीं और बिजली कनेक्शन मिले कैसे? विभागों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,,

सुमन नगर में जलभराव से हाहाकार, कॉलोनियां बसीं और बिजली कनेक्शन मिले कैसे? विभागों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल,,
घर पानी में डूबे, जल निकासी व्यवस्था की खुली पोल; HRDA से लेकर बिजली विभाग तक की भूमिका पर उठे सवाल
वाजिद अली हरिद्वार। सुमन नगर क्षेत्र में लगातार जलभराव की समस्या ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बारिश के बाद कई रिहायशी इलाकों और कॉलोनियों में पानी भरने से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास और रास्तों तक पहुंच गया है। इससे लोगों में नाराजगी है और वे स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुमन नगर क्षेत्र में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश के दौरान हर साल स्थिति गंभीर हो जाती है। इसके बावजूद समय रहते नालियों और जल निकासी के इंतजामों को दुरुस्त नहीं किया जाता। लोगों का सवाल है कि जब मानसून से पहले जलभराव वाले क्षेत्रों की जानकारी संबंधित विभागों को रहती है तो स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
डीएम तक पहुंच चुकी है शिकायत
जलभराव की समस्या को लेकर क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के समक्ष भी अपनी समस्या रखी थी। लोगों का कहना है कि प्रशासन तक शिकायत पहुंचने के बावजूद मौके पर अपेक्षित राहत और स्थायी समाधान नहीं होने से उनकी परेशानी बनी हुई है। प्रभावित लोगों ने जल निकासी की व्यवस्था सुधारने के साथ क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है।
कॉलोनियों के विकास पर HRDA की निगरानी पर सवाल
सुमन नगर क्षेत्र में विकसित हो रही रिहायशी कॉलोनियों को लेकर हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण यानी HRDA की भूमिका भी चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर प्लॉटिंग और निर्माण कार्य हुए हैं। कुछ कॉलोनियों के खिलाफ पूर्व में कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आती रही है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां पूरी तरह रुकती दिखाई नहीं देतीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी कॉलोनी के नक्शे या जरूरी स्वीकृतियां स्पष्ट नहीं थीं तो वहां बड़े स्तर पर निर्माण और प्लॉटिंग कैसे आगे बढ़ी? विभागीय स्तर पर समय रहते निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं हुई? हालांकि इन सवालों पर संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
मामला केवल कॉलोनियों की वैधता और जल निकासी तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई रिहायशी क्षेत्रों में विद्युत ट्रांसफार्मर और बिजली की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि बिजली कनेक्शन और विद्युत ढांचे की स्थापना किस प्रक्रिया और किन दस्तावेजों के आधार पर की गई।
यदि किसी क्षेत्र में कॉलोनी विकास से संबंधित स्वीकृतियां अधूरी थीं, तो वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए। वहीं, बिजली विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
जलभराव के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि जलभराव की समस्या का समाधान किसी एक विभाग के भरोसे संभव नहीं है। नगर निकाय, HRDA, सिंचाई और जल निकासी से जुड़े विभागों के साथ अन्य संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करना चाहिए।
लोगों का कहना है कि यदि अनियोजित निर्माण के कारण प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते प्रभावित हुए हैं तो इसकी भी जांच होनी चाहिए। फिलहाल क्षेत्रवासियों की मांग है कि पहले जलभराव से तत्काल राहत दिलाई जाए और इसके बाद पूरे क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था, कॉलोनी विकास तथा मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाए।





