ऑफिसर ऑफ द निर्णायक प्रशासन” — दूरदर्शी नेतृत्व जिसने गढ़ी थी हरिद्वार के विकास की मजबूत नींव,, Haridwar-Roorkee Development Authority के तत्कालीन सचिव उत्तम सिंह चौहान का कार्यकाल बना ‘हरिद्वार विकास’ का प्रतीक,, सख्त कार्रवाई, पारदर्शी व्यवस्था और योजनाबद्ध विस्तार से बदली प्राधिकरण की कार्यसंस्कृति

इन्तजार रजा हरिद्वार- “ऑफिसर ऑफ द निर्णायक प्रशासन” — दूरदर्शी नेतृत्व जिसने गढ़ी थी हरिद्वार के विकास की मजबूत नींव,,
Haridwar-Roorkee Development Authority के तत्कालीन सचिव उत्तम सिंह चौहान का कार्यकाल बना ‘हरिद्वार विकास’ का प्रतीक,,
सख्त कार्रवाई, पारदर्शी व्यवस्था और योजनाबद्ध विस्तार से बदली प्राधिकरण की कार्यसंस्कृति
हरिद्वार। तेजी से विस्तार करते शहरों में विकास की असली पहचान सिर्फ ऊंची इमारतें नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित नियोजन, कानून का पालन और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई रणनीति होती है। हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र में विकास की इसी सोच को मजबूती देने का श्रेय (HRDA) के तत्कालीन सचिव उत्तम सिंह चौहान को दिया जाता है।
उनका कार्यकाल आज भी प्राधिकरण में “हरिद्वार विकास” के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। विभागीय अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों के बीच उनकी कार्यशैली को एक ऐसे प्रशासनिक मॉडल के रूप में देखा जाता है, जिसने सख्ती और सुविधा के बीच संतुलन स्थापित किया।
अवैध निर्माण पर निर्णायक प्रहार
हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र में अनियोजित और अवैध निर्माण लंबे समय से चुनौती बने हुए थे। बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण, भूमि उपयोग परिवर्तन की अनदेखी और नियमों की अवहेलना आम समस्या थी।
उत्तम सिंह चौहान ने सचिव पद संभालते ही इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। नियमित निरीक्षण अभियान चलाए गए, नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए और आवश्यकता पड़ने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी की गई।
उनकी स्पष्ट नीति थी — “नियम सबके लिए समान।” इस सख्ती का असर यह हुआ कि प्राधिकरण की कार्रवाई को गंभीरता से लिया जाने लगा। अवैध निर्माण करने वालों के बीच यह संदेश गया कि प्रशासन अब सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कार्रवाई भी करेगा।
इस कदम से न केवल नियमों का पालन सुनिश्चित हुआ, बल्कि शहर के नियोजित विकास की दिशा भी मजबूत हुई।
लंबित फाइलों का निस्तारण और पारदर्शिता पर जोर
किसी भी विकास प्राधिकरण की विश्वसनीयता उसके दफ्तरों में दिखाई देती है। नक्शा पास कराने, लेआउट स्वीकृति और अन्य अनुमतियों में देरी अक्सर आम नागरिकों की सबसे बड़ी शिकायत होती है।
उत्तम सिंह चौहान ने इस समस्या को गंभीरता से लिया। लंबित मामलों की समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की गई। विभागीय बैठकों में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रत्येक फाइल तय समयसीमा में निपटाई जाए।
ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा देने की पहल भी उनके कार्यकाल में तेज हुई। डिजिटल माध्यम से आवेदन और ट्रैकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और आवेदकों को अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिली।
इस बदलाव ने विभाग की छवि को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया और आम लोगों के बीच भरोसा मजबूत हुआ।
संवेदनशील क्षेत्र में संतुलित प्रशासन
हरिद्वार धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यहां किसी भी विकास योजना को लागू करना केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी विषय होता है।
उत्तम सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल में इस संतुलन को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। विकास योजनाओं को लागू करते समय स्थानीय आवश्यकताओं, धार्मिक आस्थाओं और पर्यावरणीय पहलुओं का ध्यान रखा गया।
उनकी निर्णय क्षमता और स्पष्ट कार्यशैली ने प्राधिकरण को कई जटिल परिस्थितियों से सफलतापूर्वक बाहर निकाला। यही कारण है कि उनके कार्यकाल को आज भी विभाग में एक मानक के रूप में देखा जाता है।
टीम वर्क और जवाबदेही की नई संस्कृति
सिर्फ आदेश देना ही प्रशासन नहीं होता; टीम को प्रेरित करना और जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उत्तम सिंह चौहान ने नियमित समीक्षा बैठकें शुरू कीं, जिनमें विभिन्न परियोजनाओं और लंबित मामलों की प्रगति की निगरानी की जाती थी। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली को बढ़ावा दिया गया।
इससे विभाग में जवाबदेही की भावना विकसित हुई। कर्मचारियों के बीच कार्य के प्रति गंभीरता बढ़ी और एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का माहौल बना।
उनकी नेतृत्व शैली में सख्ती और संवाद दोनों का संतुलन था, जिसने विभाग की कार्यसंस्कृति को नई दिशा दी।
हरिद्वार विकास का स्थायी प्रतीक
आज जब हरिद्वार–रुड़की क्षेत्र के विकास की चर्चा होती है, तो उत्तम सिंह चौहान के कार्यकाल का उल्लेख अनिवार्य रूप से सामने आता है। उनके कार्यकाल में शुरू की गई कई प्रक्रियाएं और सुधार आज भी प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में समाहित हैं।
अवैध निर्माण पर नियंत्रण, समयबद्ध निस्तारण, डिजिटल प्रक्रिया की मजबूती और योजनाबद्ध विस्तार — ये सभी पहलू “हरिद्वार विकास” की उस अवधारणा का हिस्सा बन चुके हैं, जिसे उन्होंने मजबूत आधार दिया।
इसी कारण प्राधिकरण के भीतर और बाहर उनका कार्यकाल एक प्रतीक के रूप में देखा जाता है — ऐसा प्रतीक जो यह दर्शाता है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति स्पष्ट हो, तो विकास को सही दिशा दी जा सकती है।
“ऑफिसर ऑफ द मंथ” के रूप में उन्हें याद करना सिर्फ एक सम्मान नहीं, बल्कि उस कार्यसंस्कृति को सलाम है, जिसने हरिद्वार के विकास को नियोजित और संतुलित स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



