सख्ती और संवेदनशीलता की मिसाल: ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती की कार्यशैली चर्चा में निडर निर्भीक एक आयरन लेडी अधिकारी,, हरिद्वार में अवैध दवा माफियाओं के कारोबार पर कसता लगातार प्रहार, 40 से अधिक मुकदमे दर्ज कराए,, नशे के खिलाफ जनजागरण और अनुशासित जीवनशैली से बनी अलग पहचान,, संघर्षों से भरा बचपन, मजबूत बनी सोच

इन्तजार रजा हरिद्वार- सख्ती और संवेदनशीलता की मिसाल: ड्रग्स इंस्पेक्टर अनीता भारती की कार्यशैली चर्चा में निडर निर्भीक एक आयरन लेडी अधिकारी,,
हरिद्वार में अवैध दवा माफियाओं के कारोबार पर कसता लगातार प्रहार, 40 से अधिक मुकदमे दर्ज कराए,,
नशे के खिलाफ जनजागरण और अनुशासित जीवनशैली से बनी अलग पहचान,,
संघर्षों से भरा बचपन, मजबूत बनी सोच
हरिद्वार। धार्मिक नगरी में अवैध और प्रतिबंधित दवाओं के कारोबार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहीं इन दिनों अपनी कार्यशैली और जीवन मूल्यों के कारण चर्चा में हैं। हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र की ड्रग इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत अनीता भारती न केवल दवा माफिया के खिलाफ कड़े कदम उठा रही हैं, बल्कि समाज में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का भी काम कर रही हैं।
उनकी सख्त कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हरिद्वार में अवैध और प्रतिबंधित दवाइयों की बिक्री के मामलों में अब तक 40 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इन कार्रवाइयों से दवा माफिया और नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
अनुशासन और ईमानदारी पर आधारित कार्यशैली
ड्रग इंस्पेक्टर अपनी सख्त लेकिन पारदर्शी कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। उनके अनुसार सरकारी सेवा केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है।
वह अपने काम में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे बड़ा मूल्य मानती हैं। यही कारण है कि उनके कार्यकाल में दवा कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं पर लगातार कार्रवाई होती रही है।
हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र में मेडिकल स्टोरों, दवा गोदामों और वितरण केंद्रों की नियमित जांच कर वह यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रतिबंधित या नशीली दवाओं की अवैध बिक्री न हो। बिना चिकित्सकीय पर्चे के दवाइयां बेचने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है।
उनकी इस सख्ती से जहां अवैध कारोबारियों में डर का माहौल है, वहीं आम लोगों में विश्वास भी बढ़ा है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन गंभीर है।
संघर्षों से भरा बचपन, मजबूत बनी सोच
ड्रग इंस्पेक्टर का जीवन संघर्ष और मेहनत की कहानी भी है। उनका जन्म उत्तराखंड के जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र के एक छोटे से गांव में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने बेरिनाग में की और आगे की पढ़ाई के लिए नैनीताल चली गईं।
उन्होंने से बी-फार्मा की डिग्री प्राप्त की। लेकिन पढ़ाई के दौरान ही उनके जीवन में एक बड़ा झटका लगा जब उनके पिता का कैंसर के कारण निधन हो गया।
पिता उनके आदर्श थे और उनकी सीख आज भी अनीता भारती के जीवन का मार्गदर्शन करती है। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई और उन्होंने अपने चार छोटे भाई-बहनों की देखभाल की जिम्मेदारी निभाई।
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और मेहनत के दम पर वर्ष 2010 में लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर ड्रग इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुईं।
नशे के खिलाफ जनजागरण को बनाया मिशन
ड्रग्स इंस्पेक्टर के रूप में कार्य करते हुए केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहतीं। उनका मानना है कि नशे की समस्या से लड़ने के लिए समाज को भी जागरूक होना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से हरिद्वार में पुलिस, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर “ड्रग्स के खिलाफ जनजागरण अभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान में कई सामाजिक संगठन भी भाग ले रहे हैं।
स्कूलों और कॉलेजों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में बताया जाता है और उन्हें इससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है।
उनका मानना है कि यदि युवाओं को सही समय पर जागरूक किया जाए तो उन्हें नशे की लत से बचाया जा सकता है।
समाज में मूल्यों और शिक्षा को देती हैं महत्व
ड्रग इंस्पेक्टर समाज में नैतिक मूल्यों और शिक्षा को बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। उनका कहना है कि समाज में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए केवल लड़कियों को संस्कार सिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लड़कों को भी अच्छे संस्कार देना जरूरी है।
उनके अनुसार माता-पिता को अपने बेटों को केवल सफल अधिकारी बनाने का लक्ष्य नहीं रखना चाहिए बल्कि उन्हें अच्छा इंसान बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
इसके साथ ही वह लड़कियों की शिक्षा को आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा माध्यम मानती हैं। उनका कहना है कि शिक्षा ही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाती है।
सख्ती के साथ संवेदनशीलता की पहचान
हरिद्वार में कार्य करते हुए ने यह साबित किया है कि एक अधिकारी सख्ती के साथ संवेदनशीलता भी रख सकता है। दवा माफिया के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ वह समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी काम कर रही हैं।
उनकी ईमानदार कार्यशैली और अनुशासित जीवनशैली आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। यही वजह है कि प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम जनता में भी उनके काम की सराहना की जा रही है।
हरिद्वार में नशे के खिलाफ चल रही यह मुहिम धीरे-धीरे एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है, जिसमें प्रशासन और समाज दोनों की भागीदारी अहम बनती जा रही है।



