ऊधम सिंह नगर में ग्रामोत्थान की नई उड़ान! IFAD टीम ने ग्रामीण नवाचार, स्वरोजगार और तकनीकी बदलावों की जमकर की सराहना,, “मशरूम यूनिट से AI आधारित डेयरी तक दिखा विकास का नया मॉडल” — दो दिवसीय MTR विजिट में IFAD टीम ने ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को बताया प्रेरणादायक,, “महिलाएं बनीं बदलाव की ताकत, गांवों में रोजगार और नवाचार का बढ़ा दायरा” — ऊधम सिंह नगर में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की सफलता ने खींचा अंतरराष्ट्रीय टीम का ध्यान,,

इन्तजार रजा हरिद्वार- ऊधम सिंह नगर में ग्रामोत्थान की नई उड़ान! IFAD टीम ने ग्रामीण नवाचार, स्वरोजगार और तकनीकी बदलावों की जमकर की सराहना,,
“मशरूम यूनिट से AI आधारित डेयरी तक दिखा विकास का नया मॉडल” — दो दिवसीय MTR विजिट में IFAD टीम ने ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को बताया प्रेरणादायक,,
“महिलाएं बनीं बदलाव की ताकत, गांवों में रोजगार और नवाचार का बढ़ा दायरा” — ऊधम सिंह नगर में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की सफलता ने खींचा अंतरराष्ट्रीय टीम का ध्यान,,
ऊधम सिंह नगर, 22 मई। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जनपद में ग्रामीण विकास, स्वरोजगार और नवाचार आधारित गतिविधियों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय MTR (मिड टर्म रिव्यू) विजिट के दौरान IFAD टीम ने जिले में संचालित विभिन्न परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक बदलावों की सराहना की।
21 मई से 22 मई 2026 तक चले इस महत्वपूर्ण निरीक्षण कार्यक्रम में IFAD टीम सदस्य सुश्री अयुरजाना पुंतसागदावा और श्री विनय तुली के साथ उपायुक्त परियोजना श्री नरेश कुमार और प्रबंधक एम एंड ई (REAP) श्री विनय गुनवंत शामिल रहे। टीम ने विभिन्न विकासखंडों का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर संचालित योजनाओं और उनकी उपयोगिता को करीब से समझा।
निरीक्षण की शुरुआत विकासखंड जसपुर से हुई, जहां टीम ने वे-साइड अमेनिटीज तथा सीबीओ स्तर पर संचालित मशरूम यूनिट का निरीक्षण किया। यहां स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण समूहों द्वारा संचालित स्वरोजगार गतिविधियों को देखकर टीम प्रभावित दिखाई दी। IFAD टीम ने कहा कि ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
निरीक्षण के दौरान यह बात भी सामने आई कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब पारंपरिक रोजगार के बजाय आधुनिक और वैकल्पिक आजीविका के साधनों पर तेजी से काम हो रहा है। महिलाओं की भागीदारी ने न सिर्फ आर्थिक गतिविधियों को मजबूत किया है बल्कि सामाजिक बदलाव को भी गति दी है।
इसके बाद टीम ने विकासखंड बाजपुर का दौरा किया, जहां ग्रामोत्थान रीप परियोजना के तहत स्थापित लाइब्रेरी, पिंक ई-रिक्शा और मधुवन गौशाला का निरीक्षण किया गया। यहां सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना AI आधारित स्मार्ट पशु निगरानी सिस्टम।
गौशाला में पशुओं के गले में लगाए गए आधुनिक स्मार्ट डिवाइस ने टीम का ध्यान खींचा। यह उपकरण पशुओं की गतिविधियों, स्वास्थ्य और व्यवहार की निगरानी करता है तथा डेयरी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाता है। IFAD टीम ने इस तकनीक को ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा कि इससे उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार संभव है।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में तकनीक के इस प्रयोग को टीम ने भविष्य की जरूरत बताते हुए इसकी प्रशंसा की। अधिकारियों ने भी बताया कि आधुनिक तकनीक को गांवों तक पहुंचाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
दौरे के दूसरे दिन मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी और परियोजना निदेशक डीआरडीए हिमांशु जोशी ने IFAD टीम के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही गतिविधियों, सामुदायिक सहभागिता, कन्वर्जेंस मॉडल और रोजगार आधारित पहलों की विस्तृत जानकारी साझा की।
बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि ग्रामोत्थान परियोजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है बल्कि यह गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।
इसके बाद टीम विकासखंड खटीमा पहुंची, जहां उन्होंने कन्वर्जेंस आधारित गतिविधियों और कई नवाचार मॉडल का निरीक्षण किया। टीम ने यहां संचालित मूंज घास ग्रोथ सेंटर, सीबीओ स्तर पर संचालित रेस्टोरेंट, लाइब्रेरी और पेवर ब्लॉक (टाइल्स निर्माण इकाई) का भ्रमण किया।
इन इकाइयों से जुड़े लाभार्थियों ने भी टीम के सामने अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीणों ने बताया कि परियोजना के माध्यम से उन्हें सिर्फ रोजगार ही नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।
टीम ने माना कि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर रोजगार सृजन का यह मॉडल दूसरे क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। निरीक्षण के दौरान यह साफ दिखाई दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की दिशा में योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनका प्रभाव जमीनी स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है।
दो दिवसीय इस निरीक्षण के अंत में IFAD टीम ने परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन, नवाचार आधारित गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता पर संतोष व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में और बेहतर परिणामों की उम्मीद जताई।
इस दौरान जिला परियोजना प्रबंधक शुभंकर कुमार झा, सहायक प्रबंधक, ब्लॉक टीम, सीएलएफ टीम और विभिन्न परियोजना से जुड़े सदस्य भी मौजूद रहे।
ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना अब केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण बदलाव और आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी बनती दिखाई दे रही है।



