हरिद्वार में ‘जल मिशन’ की सुस्त रफ्तार पर सीडीओ का बड़ा एक्शन! SARA योजना की समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा, धीमे कामों पर अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार,, “फाइलों में नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए काम” — मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने लंबित डीपीआर पर जताई नाराजगी, निर्माण कार्यों में तेजी लाने के दिए सख्त निर्देश,, “जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और कटाव रोकने पर मिशन मोड में काम करो” — विभागों को तालमेल बढ़ाने, वृक्षारोपण और संवेदनशील क्षेत्रों के सर्वे की बनाई नई रणनीति,,

हरिद्वार में ‘जल मिशन’ की सुस्त रफ्तार पर सीडीओ का बड़ा एक्शन! SARA योजना की समीक्षा बैठक में फूटा गुस्सा, धीमे कामों पर अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार,,
“फाइलों में नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए काम” — मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने लंबित डीपीआर पर जताई नाराजगी, निर्माण कार्यों में तेजी लाने के दिए सख्त निर्देश,,
“जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और कटाव रोकने पर मिशन मोड में काम करो” — विभागों को तालमेल बढ़ाने, वृक्षारोपण और संवेदनशील क्षेत्रों के सर्वे की बनाई नई रणनीति,,
हरिद्वार, 25 मई। हरिद्वार जनपद में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन से जुड़ी महत्वाकांक्षी स्प्रिंग एवं रिवर रिजुविनेशन ऑथोरिटी (SARA) योजना की धीमी रफ्तार अब अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बनती दिख रही है। विकास भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र का सख्त और आक्रामक रुख देखने को मिला। बैठक में योजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि अब कागजी प्रगति नहीं, बल्कि जमीन पर परिणाम चाहिए।
बैठक के दौरान योजना से जुड़े विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट सामने रखी गई, जहां पाया गया कि कई योजनाओं के कार्य बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। इतना ही नहीं, कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तक अभी तैयार नहीं की गई है। इस स्थिति पर मुख्य विकास अधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास योजनाओं में किसी भी प्रकार की सुस्ती अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि योजनाएं केवल प्रस्तावों और बैठकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि जनपद के विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करना है, तो विभागों को तेज गति से धरातल पर उतरना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि लंबित डीपीआर को तत्काल तैयार किया जाए और निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से शुरू कराया जाए।
बैठक के दौरान सीडीओ ने विभागीय समन्वय की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच तालमेल के अभाव में योजनाओं की गति प्रभावित हो रही है। उन्होंने लघु सिंचाई, सिंचाई, एचआरडी और संबंधित खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि उनके अधीन संचालित सभी कार्यों का विस्तृत विवरण लघु सिंचाई विभाग को उपलब्ध कराया जाए, ताकि योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग की जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण अब केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि भविष्य की आवश्यकता बन चुका है। बढ़ते जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए हर विभाग को गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने सभी विभागों को निर्देशित किया कि जल संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावी एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए।
वृक्षारोपण को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। सीडीओ ने कहा कि वृक्षारोपण सिर्फ संख्या बढ़ाने का अभियान नहीं होना चाहिए बल्कि उसके लिए पहले से उचित स्थानों का चयन और वैज्ञानिक योजना तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां पौधारोपण होना है, वहां पहले से स्थान चिन्हित किए जाएं और उनकी सुरक्षा व देखरेख की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में सिंचाई विभाग को विशेष जिम्मेदारी सौंपते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में भूमि कटाव की समस्या लगातार सामने आ रही है, वहां तत्काल सर्वे कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए वृक्षारोपण और संरक्षण आधारित मजबूत कार्ययोजना बनाई जाए ताकि कटाव की समस्या का स्थायी समाधान निकल सके। बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि योजनाओं की गति और गुणवत्ता दोनों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी, अधिशासी अभियंता सिंचाई ओम जी गुप्ता, लघु सिंचाई विभाग के अभियंता भरत राम, सहायक निदेशक मत्स्य गरिमा शर्मा, खंड विकास अधिकारी बहादराबाद मानस मित्तल, रुड़की की खंड विकास अधिकारी सुमन कुटियाल सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि हरिद्वार में अब SARA योजना को केवल फाइलों से निकालकर धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है, और सुस्ती दिखाने वाले विभागों पर प्रशासन की नजर और सख्ती दोनों बढ़ने वाली है।



