हरिद्वार में मजदूर नेताओं पर गुंडा एक्ट के विरोध में उबाल! रोशनाबाद कलेक्ट्रेट में गूंजा विरोध, एक दर्जन से अधिक ज्ञापन सौंपकर प्रशासन को दी चेतावनी,, “मजदूर नेता गुंडे नहीं, हक की लड़ाई लड़ने वाले प्रतिनिधि हैं” — संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा ने प्रशासन पर लगाया पूंजीपतियों के दबाव में कार्रवाई करने का आरोप,, “फर्जी मुकदमे और गुंडा एक्ट वापस लो” — सामाजिक संगठनों, मजदूर यूनियनों और नागरिकों ने कहा, मजदूर आंदोलन को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला,,

हरिद्वार में मजदूर नेताओं पर गुंडा एक्ट के विरोध में उबाल! रोशनाबाद कलेक्ट्रेट में गूंजा विरोध, एक दर्जन से अधिक ज्ञापन सौंपकर प्रशासन को दी चेतावनी,,
“मजदूर नेता गुंडे नहीं, हक की लड़ाई लड़ने वाले प्रतिनिधि हैं” — संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा ने प्रशासन पर लगाया पूंजीपतियों के दबाव में कार्रवाई करने का आरोप,,
“फर्जी मुकदमे और गुंडा एक्ट वापस लो” — सामाजिक संगठनों, मजदूर यूनियनों और नागरिकों ने कहा, मजदूर आंदोलन को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला,,
हरिद्वार। सिडकुल क्षेत्र में मजदूर नेताओं पर दर्ज मुकदमों और दो प्रमुख श्रमिक नेताओं पंकज कुमार तथा जय प्रकाश पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को हरिद्वार का रोशनाबाद कलेक्ट्रेट परिसर विरोध प्रदर्शनों से गूंज उठा। संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार, विभिन्न सामाजिक संगठनों और बड़ी संख्या में न्यायप्रिय नागरिकों ने प्रदर्शन कर जिलाधिकारी हरिद्वार को एक दर्जन से अधिक ज्ञापन सौंपे और कार्रवाई को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन पूंजीपतियों के दबाव में काम कर रहा है और मजदूरों की आवाज उठाने वाले नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान मजदूर संगठनों ने कहा कि मजदूरों की जायज मांगों को सुनने और समाधान करने के बजाय उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के संयोजक एवं फूड्स श्रमिक संगठन (आईटीसी) के महामंत्री गोविन्द सिंह ने कहा कि पहले मजदूर कमेटी के प्रतिनिधियों सहित पंकज कुमार, जय प्रकाश और नीता के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए और अब पंकज कुमार व जय प्रकाश पर गुंडा एक्ट का नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई सिडकुल के बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने और मजदूर आंदोलन को कमजोर करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि मजदूर अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ गुंडा एक्ट जैसी कठोर धाराओं का इस्तेमाल न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि मजदूर नेताओं पर लगाए गए सभी कथित फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं तथा गुंडा एक्ट की कार्रवाई को निरस्त किया जाए। साथ ही सिडकुल क्षेत्र में श्रमिकों के कथित शोषण और उत्पीड़न पर रोक लगाकर उनकी लंबित मांगों का समाधान किया जाए।
कलेक्ट्रेट परिसर में हुए प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र के राजकिशोर, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की हरिद्वार प्रभारी नीता एवं सचिव दीपा, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयोजक नासिर अहमद, जन अधिकार संगठन के अध्यक्ष सुनील आनंद, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की उपाध्यक्ष रजनी सहित विभिन्न मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
इसके अलावा भेल मजदूर ट्रेड यूनियन के महामंत्री अवधेश कुमार, सीमेंस वर्कर्स यूनियन के अशोक गिरि और प्रदीप, किर्बी श्रमिक कमेटी के प्रधान कृष्ण मुरारी, एवरेडी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार एवं महामंत्री अनिल कुमार, देवभूमि श्रमिक संगठन के महामंत्री दिनेश कुमार, एवरेस्ट इंडस्ट्रीज मजदूर यूनियन के महामंत्री सतीश कुमार, कर्मचारी संगठन सत्यम ऑटो के महिपाल, एडवोकेट प्रशांत कुमार शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं कानूनी सलाहकार एडवोकेट रूपचंद आजाद समेत बड़ी संख्या में मजदूर और भोजनमाताएं मौजूद रहीं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मजदूर नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।



