उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर सरकार का बड़ा संदेश! “देवभूमि की संस्कृति और सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” — मुख्यमंत्री ने दोहराई जीरो टॉलरेंस नीति,, “दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक की गैर-जमानती सजा” — धर्मांतरण के मामलों में कठोर कार्रवाई के निर्देश

उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर सरकार का बड़ा संदेश!
“देवभूमि की संस्कृति और सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” — मुख्यमंत्री ने दोहराई जीरो टॉलरेंस नीति,,
“दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक की गैर-जमानती सजा” — धर्मांतरण के मामलों में कठोर कार्रवाई के निर्देश
इन्तजार रजा, हरिद्वार.. देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सौहार्द और धार्मिक आस्थाओं की रक्षा को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश में किसी भी प्रकार के जबरन, प्रलोभन या षड्यंत्रपूर्वक कराए जाने वाले धर्मांतरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यहां सदियों से विभिन्न समुदायों के बीच आपसी भाईचारा और सौहार्द की परंपरा रही है। यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस सौहार्द को बिगाड़ने अथवा किसी भी प्रकार के दबाव, लालच, धोखे या प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरण कराने का प्रयास करता है तो उसे कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दिलाई जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जबरन धर्मांतरण के मामलों में दोष सिद्ध होने पर 10 वर्ष तक की गैर-जमानती सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही आर्थिक दंड की व्यवस्था भी की गई है ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धर्मांतरण से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और प्रत्येक मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक संतुलन की रक्षा करना है।
सरकार का मानना है कि उत्तराखंड की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं, लोक आस्थाओं और सामाजिक एकता से है। ऐसे में किसी भी प्रकार की गतिविधि जो समाज में विभाजन पैदा करे या लोगों की धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करे, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि यदि कहीं जबरन धर्मांतरण, प्रलोभन या दबाव की सूचना मिले तो तत्काल प्रशासन और पुलिस को अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समरसता और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक छवि को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और सरकार इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाती रहेगी।



