कलियर-धनौरी में गरीबों के अवैध कब्जो पर चला बुलडोजर, लेकिन बड़े कब्जाधारियों पर कब होगी कार्रवाई? यूपी सिंचाई विभाग की मुहिम पर उठे बड़े सवाल,, झोपड़ियां, छोटी दुकानें और कमजोर लोगों के आशियाने मिनटों में जमींदोज, मगर कलियर में कुछ होटल्स के सामने लावारिस करोड़ों की सरकारी जमीन पर वर्षों से जमे रसूखदारों तक क्यों नहीं पहुंच रहा बुलडोजर? कलियर-दादुपुर-गोविंदपुर रोड पर सरकारी भूमि के इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज, हाईकोर्ट स्टे वाले क्षेत्रों में भी निर्माण जारी रहने के आरोपों ने बढ़ाई विभाग की मुश्किलें,,

कलियर-धनौरी में गरीबों के अवैध कब्जो पर चला बुलडोजर, लेकिन बड़े कब्जाधारियों पर कब होगी कार्रवाई? यूपी सिंचाई विभाग की मुहिम पर उठे बड़े सवाल,,
झोपड़ियां, छोटी दुकानें और कमजोर लोगों के आशियाने मिनटों में जमींदोज, मगर कलियर मे कुछ होटल्स के सामने लावारिस करोड़ों की सरकारी जमीन पर वर्षों से जमे रसूखदारों तक क्यों नहीं पहुंच रहा बुलडोजर?
कलियर-दादुपुर-गोविंदपुर रोड पर सरकारी भूमि के इस्तेमाल को लेकर चर्चाएं तेज, हाईकोर्ट स्टे वाले क्षेत्रों में भी निर्माण जारी रहने के आरोपों ने बढ़ाई विभाग की मुश्किलें,,

इन्तजार रज़ा, पिरान कलियर/दादुपुर गोविंदपुर कलियर और धनौरी क्षेत्र में बुधवार को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की भूमि से अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। तहसील प्रशासन, सिंचाई विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने कई झोपड़ियां, अस्थायी दुकानें और अन्य निर्माण हटाकर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने का दावा किया। लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि क्या सरकारी बुलडोजर केवल गरीबों और कमजोर वर्ग तक ही सीमित है?
कार्रवाई के दौरान पीर गैब अली शाह, दरगाह इमाम साहब मार्ग और धनौरी क्षेत्र में कई अस्थायी निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। वन गुज्जरों की झोपड़ियां हों या सड़क किनारे अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले छोटे दुकानदार, बुलडोजर ने किसी को नहीं बख्शा। प्रशासन का तर्क है कि सरकारी भूमि पर किसी को भी कब्जे की अनुमति नहीं दी जा सकती।
लेकिन इसी कार्रवाई के बीच स्थानीय लोगों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों का कहना है कि कलियर-दादुपुर-गोविंदपुर मुख्य मार्ग के किनारे यूपी सिंचाई विभाग की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि पर वर्षों से कई बड़े कब्जे मौजूद हैं। कुछ स्थानों पर होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा सरकारी भूमि का उपयोग पार्किंग और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किए जाने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। इसके बावजूद वहां कार्रवाई न होना लोगों को हैरान कर रहा है।
क्षेत्र में चर्चा है कि जहां गरीब की झोपड़ी पर बुलडोजर कुछ ही मिनटों में पहुंच जाता है, वहीं प्रभावशाली लोगों के कब्जों तक पहुंचते-पहुंचते कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। यही कारण है कि विभाग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
पिरान कलियर में रुड़की रोड पर कई बड़े होटलों के सामने यूपी सिंचाई विभाग की लावारिस करोड़ों की जमीन के साथ दादुपुर-गोविंदपुर क्षेत्र को लेकर भी कई गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ विवादित भूमि पर न्यायालयीय मामलों और स्टे आदेशों के बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी हैं। यदि ऐसा है तो यह केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा का नहीं बल्कि कानून के पालन का भी बड़ा मुद्दा है। लोगों का सवाल है कि आखिर इन मामलों में जिम्मेदार विभागों की भूमिका क्या है और कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन कानून का डंडा सबके लिए बराबर होना चाहिए। यदि छोटे दुकानदारों, गरीब परिवारों और झोपड़ीवासियों पर कार्रवाई की जा सकती है तो करोड़ों की सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे बड़े लोगों पर भी वही नियम लागू होने चाहिए।
अभियान के दौरान सहायक अभियंता अनुज बंसल, अर्जुन सिंह, बी.डी. धीमान, राजेंद्र सिंह, जिलेदार अजीजुर्रहमान, अजय शर्मा, मनोज सैनी, मनोज कुमार, वैभव चौधरी, राजस्व विभाग की टीम तथा भारी पुलिस बल मौजूद रहा।
अब पूरे क्षेत्र की निगाहें अगले कदम पर टिकी हैं। क्या यूपी सिंचाई विभाग का बुलडोजर केवल कमजोर वर्ग तक सीमित रहेगा, या फिर सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए बैठे प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी समान साहस के साथ कार्रवाई होगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में विभाग की अगली कार्रवाई तय करेगी।



