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राम मंदिर चंदा प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग! वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, दानराशि और चढ़ावे के प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल,, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग; दान, नकदी, स्वर्ण-रजत एवं अन्य संपत्तियों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी उठी मांग,, समाजसेवी अधिवक्ता डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव बोले— यदि कहीं अनियमितता हुई है तो सच सामने आना चाहिए, केवल एसआईटी नहीं बल्कि सीबीआई जांच जरूरी,,

राम मंदिर चंदा प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग! वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, दानराशि और चढ़ावे के प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल,,

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग; दान, नकदी, स्वर्ण-रजत एवं अन्य संपत्तियों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी उठी मांग,,

समाजसेवी अधिवक्ता डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव बोले— यदि कहीं अनियमितता हुई है तो सच सामने आना चाहिए, केवल एसआईटी नहीं बल्कि सीबीआई जांच जरूरी,,

हरिद्वार, 16 जून। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दानराशि और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता प्रकरण को लेकर हरिद्वार के समाजसेवी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है।

प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है। इस मंदिर के निर्माण के लिए हिन्दू समाज ने लगभग पांच शताब्दियों तक संघर्ष किया और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ उदारतापूर्वक दान दिया। ऐसे में यदि दानराशि या चढ़ावे के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है।

उन्होंने ज्ञापन में मांग की कि मंदिर ट्रस्ट अथवा उससे जुड़े कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि दानराशि, नकदी, स्वर्ण, रजत और अन्य बहुमूल्य संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रबंधन प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही है।

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करना और सत्य को सामने लाना है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इस मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, लेकिन मामले की व्यापकता और संवेदनशीलता को देखते हुए केवल एसआईटी जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उन्होंने पूरे प्रकरण की सीबीआई से स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराए जाने की मांग करते हुए दानराशि और चढ़ावे का विशेष फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी आवश्यकता जताई है।

डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि जांच से न केवल तथ्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन व्यवस्था पर विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा। अब इस ज्ञापन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां इस मांग पर क्या निर्णय लेती हैं

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