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हरिद्वार कचहरी में चोरी कर कानून को दी चुनौती, लेकिन 10 दिन में धराशायी हुए शातिर: सिडकुल पुलिस ने तीन चोर दबोचे, चौथा पहले से है जेल में बंद,, जिला बार एसोसिएशन की निर्माणाधीन लाइब्रेरी से चोरी हुई विद्युत सामग्री और ₹28 हजार नकद बरामद, सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने खोला पूरा राज,, जिस न्यायालय परिसर को बनाया था निशाना, उसी अदालत में पेश होकर पहुंचे सलाखों के पीछे; सिडकुल पुलिस की सटीक जांच बनी अपराधियों पर भारी

हरिद्वार कचहरी में चोरी कर कानून को दी चुनौती, लेकिन 10 दिन में धराशायी हुए शातिर: सिडकुल पुलिस ने तीन चोर दबोचे, चौथा पहले से है जेल में बंद,,

जिला बार एसोसिएशन की निर्माणाधीन लाइब्रेरी से चोरी हुई विद्युत सामग्री और ₹28 हजार नकद बरामद, सीसीटीवी व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने खोला पूरा राज,,

जिस न्यायालय परिसर को बनाया था निशाना, उसी अदालत में पेश होकर पहुंचे सलाखों के पीछे; सिडकुल पुलिस की सटीक जांच बनी अपराधियों पर भारी

हरिद्वार। कानून की चौखट पर ही चोरी की वारदात को अंजाम देकर पुलिस और न्याय व्यवस्था को खुली चुनौती देने वाले शातिर चोर आखिरकार कानून के शिकंजे में फंस ही गए। हरिद्वार के रोशनाबाद स्थित न्यायालय कचहरी परिसर में जिला बार एसोसिएशन की निर्माणाधीन लाइब्रेरी से लाखों रुपये की विद्युत सामग्री चोरी करने वाले गिरोह का सिडकुल पुलिस ने मात्र दस दिनों में पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी की विद्युत सामग्री तथा उसे बेचकर हासिल किए गए ₹28 हजार नकद बरामद किए हैं, जबकि वारदात में शामिल चौथा आरोपी पहले से ही एक अन्य मुकदमे में जिला कारागार रोशनाबाद में बंद है।

सबसे दिलचस्प और प्रतीकात्मक पहलू यह रहा कि जिन आरोपियों ने न्यायालय परिसर को ही अपना आसान निशाना समझा था, शनिवार को उन्हीं को कड़ी सुरक्षा के बीच उसी न्यायालय में पेश किया गया। अदालत के आदेश पर तीनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश भी दिया कि कानून से बच निकलना अपराधियों के लिए आसान नहीं है।

एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर ने कहा कि 

**”हरिद्वार पुलिस अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। न्यायालय परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर हुई चोरी हमारे लिए बड़ी चुनौती थी। सिडकुल पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर मात्र दस दिनों में पूरे मामले का सफल खुलासा किया। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी की विद्युत सामग्री और चोरी का सामान बेचकर प्राप्त ₹28 हजार की नकदी बरामद की गई है, जबकि चौथे आरोपी के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जनपद में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। हरिद्वार पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करती रहेगी और प्रत्येक अपराधी को कानून के दायरे में लाया जाएगा।” — नवनीत सिंह भुल्लर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, हरिद्वार

मामले की शुरुआत 23 जुलाई 2026 को हुई, जब जिला बार एसोसिएशन के सचिव विपिन चंद द्विवेदी ने थाना सिडकुल में लिखित शिकायत देकर बताया कि कचहरी परिसर में निर्माणाधीन लाइब्रेरी से एल्यूमिनियम, ग्लास और महंगी विद्युत सामग्री चोरी कर ली गई है। न्यायालय परिसर जैसी अत्यंत संवेदनशील जगह पर हुई इस चोरी ने पुलिस महकमे में भी हलचल मचा दी। मामला प्रतिष्ठा से जुड़ा होने के कारण वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल विशेष जांच टीम गठित की गई।

थाना अध्यक्ष अजय शाह के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने घटना की जांच पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया और स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। लगातार दस दिनों तक चली जांच के बाद पुलिस चार संदिग्धों तक पहुंच गई। सभी संदिग्ध ज्वालापुर क्षेत्र के निवासी निकले।

जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि वारदात में शामिल पंकज राठौर पहले से ही थाना ज्वालापुर के एक अन्य मुकदमे में जिला कारागार रोशनाबाद में बंद है। इसके बाद पुलिस ने अन्य तीन आरोपियों आदिल, गुलफाम और आवेश को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की। पहले तो आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उनके सामने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य रखे गए तो वे ज्यादा देर तक सच छिपा नहीं सके। अंततः तीनों ने 21 जुलाई को जिला बार एसोसिएशन की निर्माणाधीन लाइब्रेरी में चोरी करने की बात स्वीकार कर ली।

पूछताछ के बाद आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ज्वालापुर के बागोवाली क्षेत्र पहुंची। वहां झाड़ियों में छिपाकर रखे गए एक सफेद प्लास्टिक के कट्टे से बिजली के तारों के 15 डिब्बे बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि चोरी की अन्य सामग्री उन्होंने राह चलते लोगों को बेच दी थी और उससे मिली रकम आपस में बांट ली थी।

बरामदगी के दौरान पुलिस ने आदिल के कब्जे से ₹11 हजार, गुलफाम से ₹8 हजार और आवेश से ₹9 हजार नकद बरामद किए। कुल ₹28 हजार की यह राशि चोरी के सामान को बेचकर प्राप्त की गई थी। इसके बाद पुलिस ने बरामदगी के आधार पर मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी करते हुए तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। वहीं जेल में बंद चौथे आरोपी पंकज राठौर को भी इस मुकदमे में नामजद कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

गिरफ्तार आरोपियों में आदिल पुत्र उमर शाद निवासी मोहल्ला घोसीयान, गुलफाम पुत्र विव्वा उर्फ हबीब निवासी मोहल्ला पावधोई तथा आवेश पुत्र रिजवान निवासी मोहल्ला घोसीयान, थाना ज्वालापुर शामिल हैं। चौथा आरोपी पंकज राठौर पुत्र विनोद कुमार निवासी गूगाल रोड, पांडेवाला, ज्वालापुर वर्तमान में जिला कारागार रोशनाबाद में निरुद्ध है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में तकनीकी जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज ने निर्णायक भूमिका निभाई। यदि अपराधी यह समझ रहे थे कि न्यायालय परिसर में चोरी कर वे कानून की पकड़ से बच जाएंगे, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। पुलिस ने न केवल चोरी का खुलासा किया, बल्कि चोरी की गई सामग्री और नकदी भी बरामद कर मामले को मजबूत साक्ष्यों के साथ न्यायालय तक पहुंचाया।

इस सफल कार्रवाई में थाना अध्यक्ष अजय शाह, उपनिरीक्षक देवेंद्र सिंह चौहान, हेड कांस्टेबल सोहन सिंह राणा तथा कांस्टेबल गजेंद्र प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हरिद्वार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जनपद में अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। कानून को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी और हर अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

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