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दरगाह की जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार, कार्रवाई गायब! रातों-रात खड़ी हुई दुकान आज भी मौजूद, ‘कागजी एक्शन’ पर उठे सवाल,, अवैध कब्जा हटाने का दावा या सच छिपाने की कोशिश? दुकान नहीं हुई ध्वस्त, सिर्फ दिशा बदलने की चर्चा; दरगाह प्रबंधन की कार्यशैली कटघरे में,, एफआईआर नहीं, जब्ती नहीं, सख्त कार्रवाई नहीं! आखिर किसके भरोसे फल-फूल रहा कब्जों का खेल; वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर प्रश्न,,

दरगाह की जमीन पर कब्जों का ‘नाइट ऑपरेशन’ बेनकाब! रातों-रात खड़ी हुई दुकान आज भी जस की तस, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ घुमाया गया मुंह,, अवैध कब्जा हटाने का दावा या आंखों में धूल झोंकने की कोशिश? दरगाह प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल; करोड़ों की वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा पर फिर खड़े हुए प्रश्नचिह्न,, कब्जाधारियों पर मुकदमा क्यों नहीं? दुकान जब्त क्यों नहीं हुई? क्या किसी प्रभावशाली कर्मचारी के संरक्षण में चल रहा है अवैध कब्जों का खेल, अंदरूनी मिलीभगत की चर्चाएं तेज,,

दरगाह की जमीन पर अवैध कब्जा बरकरार, कार्रवाई गायब! रातों-रात खड़ी हुई दुकान आज भी मौजूद, ‘कागजी एक्शन’ पर उठे सवाल,,

अवैध कब्जा हटाने का दावा या सच छिपाने की कोशिश? दुकान नहीं हुई ध्वस्त, सिर्फ दिशा बदलने की चर्चा; दरगाह प्रबंधन की कार्यशैली कटघरे में,,

एफआईआर नहीं, जब्ती नहीं, सख्त कार्रवाई नहीं! आखिर किसके भरोसे फल-फूल रहा कब्जों का खेल; वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर प्रश्न,,

पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक की करोड़ों रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कुछ दिन पहले पानी की टंकी के निकट दरगाह भूमि पर रातों-रात खड़ी की गई लोहे की दुकान को लेकर दरगाह प्रबंधन द्वारा कार्रवाई का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस अवैध दुकान को हटाने की बात कही गई, वह आज भी मौके पर मौजूद है। चर्चा यह है कि कब्जा हटाने के बजाय केवल दुकान की दिशा बदल दी गई और इसे ही कार्रवाई का नाम देकर मामला शांत करने का प्रयास किया गया। यदि यह दावा सही है तो सवाल यह है कि आखिर अवैध कब्जा हटाया गया या सिर्फ उसका स्वरूप बदल दिया गया?

जानकारों का कहना है कि किसी भी सरकारी अथवा वक्फ भूमि पर अवैध कब्जा होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाना चाहिए, अवैध ढांचे को हटाकर जब्त किया जाना चाहिए और भूमि को पूरी तरह मुक्त कराया जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में अब तक ऐसी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण कार्य शुरू होने के समय ही इसकी सूचना संबंधित जिम्मेदारों तक पहुंच गई थी, फिर भी पूरी दुकान खड़ी कैसे हो गई? यदि सूचना मिलने के बावजूद कब्जा नहीं रोका गया तो क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या फिर किसी प्रकार का संरक्षण?

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ हो सकता है। लोगों का कहना है कि बिना संरक्षण के दरगाह की भूमि पर कोई व्यक्ति इतनी आसानी से कब्जा नहीं कर सकता। यही वजह है कि कब्जाधारियों के खिलाफ न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही अवैध ढांचे को पूरी तरह हटाया गया।

हैरानी की बात यह भी है कि जिस स्थान पर यह नया कब्जा सामने आया है, वहां आसपास अन्य अवैध कब्जों की भी चर्चा होती रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से वक्फ संपत्तियों पर कब्जों का दायरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय केवल औपचारिकताएं निभाता नजर आता है।

एक ओर जिला प्रशासन पूरे जनपद में अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर दरगाह की बहुमूल्य संपत्तियों पर हुए ताजा कब्जे के मामले में अपेक्षित कठोरता दिखाई नहीं दे रही। यही कारण है कि अब लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर दरगाह की संपत्तियों की रक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और जवाबदेह कौन है?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दरगाह प्रबंधन और संबंधित अधिकारी इस मामले में वास्तविक कार्रवाई करेंगे, कब्जाधारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा, अवैध ढांचा जब्त किया जाएगा और पूरी जमीन कब्जामुक्त कराई जाएगी, या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों और बयानों तक सीमित रह जाएगा।

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