हरिद्वार में महिलाओं की सुरक्षा को और मिली मजबूती! एसएसपी के आदेश पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों के लिए आंतरिक स्थानीय शिकायत समिति का पुनर्गठन, सीओ ओशिन जोशी को सौंपी गई अध्यक्षता,, अधिवक्ता रीमा शाहिम, समाजसेवी नेहा मलिक और रंजना शर्मा बनीं सदस्य, निष्पक्ष और संवेदनशील शिकायत निस्तारण पर रहेगा विशेष फोकस

हरिद्वार में महिलाओं की सुरक्षा को और मिली मजबूती!
एसएसपी के आदेश पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न मामलों के लिए आंतरिक स्थानीय शिकायत समिति का पुनर्गठन, सीओ ओशिन जोशी को सौंपी गई अध्यक्षता,,
अधिवक्ता रीमा शाहिम, समाजसेवी नेहा मलिक और रंजना शर्मा बनीं सदस्य, निष्पक्ष और संवेदनशील शिकायत निस्तारण पर रहेगा विशेष फोकस
इन्तजार रजा हरिद्वार। कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में हरिद्वार पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरिद्वार के निर्देश पर कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के तहत गठित आंतरिक स्थानीय शिकायत समिति (Internal Local Complaints Committee) का पुनर्गठन किया गया है। समिति की अध्यक्षता सीओ ओशिन जोशी को सौंपी गई है, जबकि अधिवक्ता रीमा शाहिम, समाजसेवी नेहा मलिक और रंजना शर्मा को समिति का सदस्य नामित किया गया है।
यह पुनर्गठन राष्ट्रीय महिला आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया है, ताकि कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई अधिक प्रभावी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से की जा सके। समिति का उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि महिलाओं में विश्वास का वातावरण तैयार करना भी है, जिससे वे बिना किसी भय के अपनी बात समिति के समक्ष रख सकें।
नवगठित समिति में सदस्य बनाए जाने के बाद अधिवक्ता रीमा शाहिम ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार और पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और न्याय के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ करेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ऐसी समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
रीमा शाहिम ने अपने संदेश में कहा कि जिम्मेदारियां उन्हीं लोगों को सौंपी जाती हैं, जिनमें समाज के लिए कुछ बेहतर करने का जज़्बा और क्षमता होती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समिति में रहते हुए हर शिकायत को गंभीरता, गोपनीयता और निष्पक्षता के साथ सुना जाएगा तथा पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
समिति के पुनर्गठन का उद्देश्य कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तैयार करना है। अक्सर कई महिलाएं सामाजिक दबाव, बदनामी के डर या नौकरी पर असर पड़ने की आशंका के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पाती हैं। ऐसे में यह समिति उन्हें सुरक्षित मंच उपलब्ध कराएगी, जहां उनकी शिकायतों को कानून के दायरे में रहते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना और निस्तारित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा का एक मजबूत माध्यम है। इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समितियों का सक्रिय और निष्पक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। हरिद्वार पुलिस द्वारा समिति का पुनर्गठन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
समिति में पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल करने का उद्देश्य यह भी है कि शिकायतों की सुनवाई में विविध अनुभवों का लाभ मिले और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं भरोसेमंद बन सके।
हरिद्वार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। शिकायत मिलने पर संबंधित अधिनियम के प्रावधानों के तहत निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल का निर्माण और न्यायपूर्ण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में स्थानीय शिकायत समिति का यह पुनर्गठन हरिद्वार पुलिस की संवेदनशील एवं जवाबदेह कार्यशैली का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। इससे महिलाओं का कानून और प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।



