मातृ मृत्यु रोकथाम को लेकर डीएम मयूर दीक्षित का सख्त फोकस, गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी के निर्देश,, हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर विशेष निगरानी, EDD Calling से गर्भवती महिलाओं का होगा नियमित फॉलो-अप; एएनसी जांच और सुरक्षित प्रसव को लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय,,
डेंगू सीजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, आशा कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन क्षेत्रीय सर्वे के निर्देश; अनाधिकृत निजी क्लीनिकों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई

मातृ मृत्यु रोकथाम को लेकर डीएम मयूर दीक्षित का सख्त फोकस, गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी के निर्देश,,
हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर विशेष निगरानी, EDD Calling से गर्भवती महिलाओं का होगा नियमित फॉलो-अप; एएनसी जांच और सुरक्षित प्रसव को लेकर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय,,
डेंगू सीजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, आशा कार्यकर्ताओं को प्रतिदिन क्षेत्रीय सर्वे के निर्देश; अनाधिकृत निजी क्लीनिकों पर होगी नियमानुसार कार्रवाई
हरिद्वार, 13 अगस्त 2026। मातृ मृत्यु की रोकथाम और गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्वास्थ्य विभाग को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी कक्ष में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित मातृ मृत्यु समीक्षा बैठक में जिले में मातृ स्वास्थ्य की स्थिति, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, हाई रिस्क प्रेगनेंसी, एएनसी जांच, सुरक्षित प्रसव तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मातृ मृत्यु की रोकथाम के लिए केवल अस्पताल स्तर पर उपचार पर्याप्त नहीं है, बल्कि गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि तक प्रत्येक महिला की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित एएनसी जांच और समयबद्ध फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं को चिन्हित कर उनकी लगातार निगरानी की जाए, ताकि किसी भी संभावित जटिलता का समय रहते पता लगाकर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
हाई रिस्क प्रेगनेंसी पर विशेष निगरानी, एएनएम-आशा-सीएचओ की जिम्मेदारी तय
जिलाधिकारी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में मेडिकल ऑफिसर, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और सीएचओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्तरों पर जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय करते हुए गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट किया जाए। किसी भी हाई रिस्क गर्भावस्था को सामान्य श्रेणी में न रखा जाए और ऐसी महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही परामर्श से गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। इसलिए स्वास्थ्यकर्मी केवल कागजी रिकॉर्ड पूरा करने तक सीमित न रहें, बल्कि गर्भवती महिला और उसके परिवार से नियमित संपर्क कर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं।
EDD Calling से गर्भवती महिलाओं की होगी नियमित निगरानी
बैठक में जिलाधिकारी ने EDD Calling व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं से निर्धारित समय पर फोन के माध्यम से संपर्क कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली जाए और उन्हें आवश्यक जांच, उपचार, दवाओं तथा प्रसव से संबंधित परामर्श उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि EDD Calling के माध्यम से प्रसव की संभावित तिथि के आसपास गर्भवती महिला की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा सकती है। इससे समय पर अस्पताल पहुंचने, आवश्यक चिकित्सकीय तैयारी करने और किसी आपात स्थिति में तत्काल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधानों और सामुदायिक नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए एएनसी जांच, संस्थागत प्रसव और सुरक्षित मातृत्व को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों को गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराने और किसी भी गंभीर लक्षण को नजरअंदाज न करने के लिए जागरूक किया जाए।
अनाधिकृत निजी क्लीनिकों पर कार्रवाई, पात्र बालिकाओं का HPV टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश
समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने जिले में संचालित अनाधिकृत निजी क्लीनिकों के संबंध में भी अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बिना अनुमति अथवा मानकों का पालन किए संचालित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने प्रत्येक पात्र बालिका को चिन्हित कर HPV टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि पात्र बालिकाओं की पहचान, टीकाकरण और जागरूकता के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर उसका नियमित अनुश्रवण किया जाए।
डेंगू सीजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, रोजाना होगा क्षेत्रीय सर्वे
बैठक में डेंगू सीजन को लेकर भी जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी ब्लॉक प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और डेंगू की संभावित स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रतिदिन क्षेत्रीय सर्वे कराने के निर्देश दिए। डेंगू के संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां लोगों को मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई, पानी जमा न होने देने और आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक करने को कहा गया। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि किसी क्षेत्र में डेंगू के संभावित मामले सामने आते हैं तो तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय किया जाए।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, जिला सूचना/एमसीएच नोडल डॉ. कोमल एस. कोठारी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एसडीएच रुड़की डॉ. ए.के. मिश्रा, डॉ. अजय, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वसुंधरा सहित संबंधित ब्लॉक प्रभारी, अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के माध्यम से जिलाधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि मातृ मृत्यु की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को जमीनी स्तर तक सक्रिय निगरानी, समयबद्ध जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान और त्वरित चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही डेंगू सीजन में क्षेत्रीय सर्वे और जनजागरूकता अभियान को प्रभावी बनाकर संभावित संक्रमण की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान देना होगा।



