परचम लहराया, साबिर पाक के उर्स का बजा बिगुल! बरेली से 38वां साबरी झंडा लेकर कलियर पहुंचे अकीदतमंद,, जायरीनों के जत्थे का फूल-मालाओं से हुआ जोरदार इस्तकबाल, दरगाह के मुख्य द्वार पर पेश किया गया साबरी परचम,,
परचम-ए-साबरी की रस्म के साथ उर्स की तैयारियों का आगाज, सज्जादानशीन के नेतृत्व में बुलंद दरवाजे पर अदा हुई झंडा कुशाई की रस्म

परचम लहराया, साबिर पाक के उर्स का बजा बिगुल! बरेली से 38वां साबरी झंडा लेकर कलियर पहुंचे अकीदतमंद,,
जायरीनों के जत्थे का फूल-मालाओं से हुआ जोरदार इस्तकबाल, दरगाह के मुख्य द्वार पर पेश किया गया साबरी परचम,,
परचम-ए-साबरी की रस्म के साथ उर्स की तैयारियों का आगाज, सज्जादानशीन के नेतृत्व में बुलंद दरवाजे पर अदा हुई झंडा कुशाई की रस्म

कलियर/हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत साबिर पाक की दरगाह पिरान कलियर में सालाना उर्स की तैयारियों के बीच गुरुवार को उस समय रूहानी माहौल बन गया, जब बरेली से 38वां साबरी झंडा लेकर करीब डेढ़ सौ अकीदतमंदों का जत्था कलियर शरीफ पहुंचा। झंडा लेकर पहुंचे जायरीनों का स्थानीय अकीदतमंदों और दरगाह से जुड़े लोगों ने फूल-मालाओं से गर्मजोशी के साथ इस्तकबाल किया। इसके बाद साबरी परचम को दरगाह के मुख्य द्वार पर पेश किया गया और मुल्क में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की गई।
साबरी परचम के कलियर पहुंचने के साथ ही दरगाह परिसर और आसपास का माहौल पूरी तरह सूफियाना रंग में रंगा नजर आया। जायरीनों ने अकीदत के साथ परचम को सलामी दी और हजरत साबिर पाक की दरगाह में अपनी हाजिरी पेश की। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। परचम लेकर पहुंचे जत्थे में शामिल अकीदतमंदों के चेहरों पर उत्साह और रूहानी खुशी साफ दिखाई दी।
बरेली से आने वाले इस साबरी झंडे की रस्म को उर्स की महत्वपूर्ण परंपराओं में माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में अकीदतमंद इस परंपरा से जुड़ते हैं और दूर-दराज से झंडा लेकर कलियर पहुंचते हैं। इस बार भी जत्थे के पहुंचने पर रास्ते से लेकर कलियर तक अकीदतमंदों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
बरेली से कलियर तक गूंजता रहा साबिर पाक का नाम, फूल-मालाओं से हुआ अकीदतमंदों का इस्तकबाल
बरेली से रवाना हुआ करीब डेढ़ सौ जायरीनों का जत्था जब कलियर शरीफ पहुंचा तो दरगाह क्षेत्र में अकीदतमंदों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया। परचम को सम्मान के साथ आगे ले जाया गया। इस दौरान साबिर पाक की शान में नारे और दुआओं की आवाज से पूरा माहौल आध्यात्मिक नजर आया।
दरगाह के मुख्य द्वार पर पहुंचने के बाद साबरी झंडे को पेश करने की रस्म अदा की गई। अकीदतमंदों ने हाथ उठाकर देश में अमन और खुशहाली के लिए दुआ की। लोगों ने कहा कि सूफी संतों की दरगाहें सदियों से इंसानियत, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश देती रही हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में प्रेम और सद्भाव को मजबूत करने का संदेश भी सामने आता है।जत्थे में शामिल अकीदतमंदों ने बताया कि साबरी परचम लेकर कलियर पहुंचना उनके लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अकीदत और रूहानी जुड़ाव का विषय है। लंबे सफर के बाद कलियर पहुंचकर दरगाह पर परचम पेश करने और दुआ करने का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है।
परचम पेश किए जाने के दौरान दरगाह क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी नजर आई। उर्स के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस स्तर पर तैयारियों को लेकर पहले से ही गतिविधियां तेज हैं। बड़ी संख्या में जायरीनों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए यातायात, पार्किंग, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी संबंधित विभाग सक्रिय हैं।
परचम-ए-साबरी की रस्म में गूंजा कलियर, सज्जादानशीन के नेतृत्व में हुई झंडा कुशाई
साबरी परचम की रस्म के दौरान कलियर की फिजा में अकीदत और रूहानियत का रंग और गहरा हो गया। दरगाह के सज्जादानशीन के नेतृत्व में बुलंद दरवाजे पर परचम यानी झंडा कुशाई की रस्म अदा की गई। रस्म के दौरान बड़ी संख्या में जायरीन और स्थानीय अकीदतमंद मौजूद रहे। सभी ने दुआ में शामिल होकर मुल्क की तरक्की, शांति और खुशहाली की कामना की।
परचम-ए-साबरी की रस्म को उर्स की शुरुआत से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में देखा जाता है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में कलियर में जायरीनों की आवाजाही और बढ़ने की उम्मीद है। देश के विभिन्न राज्यों से अकीदतमंद यहां पहुंचते हैं और दरगाह पर चादर, फूल और अन्य नजराने पेश कर अपनी मुरादों के लिए दुआ करते हैं।
कलियर पहुंचने वाले जायरीनों के लिए उर्स केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-मिलाप का भी बड़ा अवसर होता है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों से लोग यहां पहुंचते हैं और सूफी परंपरा के अमन तथा भाईचारे के संदेश से जुड़ते हैं।
इस बीच परचम-ए-साबरी की रस्म ने उर्स को लेकर तैयारियों में एक नया उत्साह भर दिया है। दरगाह क्षेत्र में अकीदतमंदों की चहल-पहल बढ़ने लगी है। स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों में भी उर्स को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में जायरीनों की संख्या बढ़ने के साथ कलियर में रौनक और बढ़ने की संभावना है।
परचम लहराने के साथ एक बार फिर कलियर शरीफ की फिजा में साबिर पाक की अकीदत का रंग दिखाई दिया। बरेली से पहुंचे डेढ़ सौ जायरीनों के जत्थे ने परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 38वां साबरी झंडा पेश किया और अमन-खुशहाली की दुआ की। परचम-ए-साबरी की रस्म के साथ अब कलियर में उर्स को लेकर धार्मिक और रूहानी गतिविधियों का सिलसिला तेज होने की उम्मीद है।



