उत्तराखंड में मदरसों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब सत्यापन के बाद ही मिलेगा प्रमाण पत्र,, मदरसों के चंदा जुटाने की प्रक्रिया होगी सख्त, दस्तावेजों की जांच से लेकर मौके पर सत्यापन तक की तैयारी; हर संस्थान का रिकॉर्ड रखा जाएगा सुरक्षित,,
नए फॉर्म में मदरसे का पता, संचालक, ट्रस्ट, मान्यता, जमीन-भवन, छात्र, शिक्षक, खर्च और ऑडिट रिपोर्ट समेत देनी होगी पूरी जानकारी

उत्तराखंड में मदरसों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब सत्यापन के बाद ही मिलेगा प्रमाण पत्र,,
मदरसों के चंदा जुटाने की प्रक्रिया होगी सख्त, दस्तावेजों की जांच से लेकर मौके पर सत्यापन तक की तैयारी; हर संस्थान का रिकॉर्ड रखा जाएगा सुरक्षित,,
नए फॉर्म में मदरसे का पता, संचालक, ट्रस्ट, मान्यता, जमीन-भवन, छात्र, शिक्षक, खर्च और ऑडिट रिपोर्ट समेत देनी होगी पूरी जानकारी

देहरादून, 30 अगस्त 2026। उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था और संचालन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। मदरसों के सत्यापन और उनसे जुड़े तस्दीकनामा (सत्यापन प्रमाण पत्र) जारी करने की प्रक्रिया को अब पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और दस्तावेज आधारित बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत मदरसों से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवश्यक दस्तावेज लिए जाएंगे तथा उनकी जांच के बाद ही सत्यापन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया का असर खासतौर पर रमजान के दौरान मदरसों के लिए चंदा जुटाने वाले सफीरों की तस्दीक व्यवस्था पर भी पड़ने की संभावना है। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सफीर चंदा जुटाने के लिए आते हैं और उन्हें तस्दीकनामा जारी किया जाता है। अब इस प्रक्रिया को केवल औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के सत्यापन से जोड़ने की तैयारी है।
नए फॉर्म में देनी होगी मदरसे की पूरी कुंडली
नई व्यवस्था के तहत मदरसों के लिए निर्धारित नया फॉर्म तैयार किया जा रहा है। इस फॉर्म में मदरसे से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां देना अनिवार्य होगा।
मदरसे का नाम, पूरा पता, मोहतमिम या नाजिम की जानकारी, ट्रस्ट का पंजीकरण, मान्यता से जुड़े दस्तावेज, जमीन और भवन के कागजात समेत अन्य आवश्यक दस्तावेज फॉर्म के साथ प्रस्तुत करने होंगे।
इसके अलावा मदरसे में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी दर्ज करनी होगी। इनमें कितने विद्यार्थी स्थानीय हैं और कितने दूसरे क्षेत्रों से आते हैं, इसकी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
शिक्षकों से लेकर सालाना खर्च तक का देना होगा हिसाब
नई प्रक्रिया में केवल मदरसे की पहचान और पते की जानकारी ही पर्याप्त नहीं होगी। मदरसे में शिक्षा व्यवस्था किस प्रकार संचालित की जा रही है, कितने शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं और किस तरह की पढ़ाई कराई जाती है, इसकी जानकारी भी देनी होगी।
इसके साथ ही मदरसे के वार्षिक खर्च, ऑडिट रिपोर्ट, परीक्षा परिणाम और रसीद बुक से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य मदरसों से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।
GPS कैमरे से फोटो और कक्षा का वीडियो भी देना होगा
नई व्यवस्था में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मदरसे की इमारत और बोर्ड की तस्वीरें GPS कैमरे से लिए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके साथ ही कक्षाओं और शिक्षण गतिविधियों का वीडियो भी उपलब्ध कराने को कहा जाएगा।
फॉर्म में स्थानीय स्तर पर मदरसे के संबंध में जानकारी रखने वाले सम्मानित लोगों की जानकारी भी शामिल की जाएगी। इससे प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों के साथ-साथ मदरसे की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जरूरत पड़ी तो मौके पर पहुंचकर होगी जांच
फॉर्म और दस्तावेज जमा होने के बाद उनकी बारीकी से जांच की जाएगी। यदि किसी मदरसे की जानकारी या दस्तावेजों को लेकर अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत महसूस होती है, तो मौके पर जाकर भी जांच की जा सकेगी।
मौके पर मदरसे की वास्तविक स्थिति, भवन, शिक्षण व्यवस्था और गतिविधियों का जायजा लिया जाएगा। सभी दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी से संतुष्ट होने के बाद ही शहर काजी की ओर से सत्यापन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
इससे भविष्य में किसी मदरसे के संबंध में सत्यापन को लेकर विवाद की स्थिति में रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
हर मदरसे का रिकॉर्ड कार्यालय में होगा सुरक्षित
नई व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी होगी कि प्रत्येक मदरसे का रिकॉर्ड शहर काजी के कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा। इससे हर साल होने वाली तजदीद यानी नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान पुराना रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहेगा।बताया गया है कि वार्षिक तजदीद के समय पिछले वर्ष का तस्दीकनामा और ऑडिट रिपोर्ट अथवा बैलेंस शीट प्रस्तुत करना पर्याप्त होगा, बशर्ते संस्था की मूल जानकारी और स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव न हुआ हो।
‘मकसद परेशानी पैदा करना नहीं, पारदर्शिता बढ़ाना’
देहरादून काजी हशीम अहमद सिद्दीकी के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी मदरसे के लिए अनावश्यक परेशानी खड़ी करना नहीं है। इसका मकसद तस्दीक की प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाना तथा सही और जरूरतमंद मदरसों तक सुविधाएं पहुंचाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। नई व्यवस्था में दस्तावेजी जांच और वास्तविक स्थिति के सत्यापन को महत्व दिया जाएगा, जिससे तस्दीकनामा जारी करने की प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बनाई जा सके।
मदरसा संचालन पर निगरानी का नया ढांचा
उत्तराखंड में मदरसा व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ समय से सत्यापन, पंजीकरण, मान्यता और संचालन से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे हैं। ऐसे में नई तस्दीक व्यवस्था को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद मदरसों को अपने संचालन, वित्तीय व्यवस्था, शिक्षण व्यवस्था और दस्तावेजों से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रखनी होगी। वहीं सत्यापन जारी करने वाली व्यवस्था के पास भी प्रत्येक संस्था का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। कुल मिलाकर उत्तराखंड में मदरसों से जुड़े सत्यापन और तस्दीकनामा जारी करने की प्रक्रिया अब अधिक दस्तावेजी, पारदर्शी और जांच आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। नए फॉर्म और प्रक्रिया को जल्द सार्वजनिक किए जाने की तैयारी है।



