हरिद्वार में ‘ऑपरेशन प्रहार’ का ट्रेलर नहीं, पूरा एक्शन! कहीं पुलिस को देखकर भागा तस्कर तो कहीं स्कूटी में छिपी थी स्मैक की खेप,, एक दिन… तीन मोर्चे… तीन आरोपी! 522 ग्राम चरस, 16.10 ग्राम स्मैक और सट्टे का सामान बरामद—हरिद्वार पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में मचा हड़कंप
भूपतवाला में चरस लेकर भाग रहा तस्कर दबोचा, मंगलौर में इलेक्ट्रिक स्कूटी से स्मैक की सप्लाई का आरोप; पिरान कलियर में सट्टे की खाईबाड़ी का भी खुलासा—डायरी, पर्चियां और नकदी बरामद

हरिद्वार में ‘ऑपरेशन प्रहार’ का ट्रेलर नहीं, पूरा एक्शन! कहीं पुलिस को देखकर भागा तस्कर तो कहीं स्कूटी में छिपी थी स्मैक की खेप,,
एक दिन… तीन मोर्चे… तीन आरोपी! 522 ग्राम चरस, 16.10 ग्राम स्मैक और सट्टे का सामान बरामद—हरिद्वार पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध कारोबारियों में मचा हड़कंप

हरिद्वार.. शहर की सड़कों पर सब कुछ सामान्य था… गाड़ियां दौड़ रही थीं… लोग अपने काम में व्यस्त थे… लेकिन पुलिस की नजरें कुछ और तलाश रही थीं। फिर अचानक शुरू हुआ ऐसा पुलिस एक्शन, जिसने नशे और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के बीच खलबली मचा दी।
कहीं पुलिस टीम को देखकर एक संदिग्ध ने अचानक दौड़ लगा दी… कहीं चेकिंग के दौरान इलेक्ट्रिक स्कूटी से निकली कथित स्मैक की खेप… और कहीं सट्टे की डायरी ने खोल दिया अवैध खेल का राज।
एक दिन में तीन थाना क्षेत्र… तीन कार्रवाई… तीन आरोपी और नशे-सट्टे के खिलाफ पुलिस का सीधा वार।
पहला सीन—पुलिस को देखा तो दौड़ पड़ा, लेकिन कानून की पकड़ से नहीं बच पाया!
स्थान था बन्दा रोड, परमार्थ घाट के पास भूपतवाला। तारीख थी 9 सितंबर 2026। कोतवाली नगर पुलिस गश्त पर थी। तभी पुलिस टीम की नजर एक संदिग्ध व्यक्ति पर पड़ी।
बताया जा रहा है कि पुलिस को देखते ही वह सकपका गया।
फिर अचानक…
पीछे मुड़ा… और दौड़ लगा दी!
लेकिन पुलिस टीम भी पीछे हटने वाली नहीं थी। जवानों ने पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे दबोच लिया।
पूछताछ हुई तो पहचान सामने आई—सुंदर सिंह पुत्र स्वर्गीय रतन सिंह, निवासी गलाती, थाना धारचूला, जिला पिथौरागढ़।
इसके बाद हुई तलाशी ने पूरे मामले का रुख बदल दिया।
पुलिस के अनुसार उसके कब्जे से 522 ग्राम अवैध चरस बरामद हुई।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह अपने गांव की ओर से चरस सस्ते दाम पर खरीदकर हरिद्वार में बेचने के लिए लाया था।
यानी पुलिस की नजर से बचकर हरिद्वार पहुंची कथित नशे की खेप आखिरकार पुलिस के हाथ लग गई।
मामले में कोतवाली नगर में मुकदमा अपराध संख्या 500/2026, धारा 8/20 NDPS Act के तहत अभियोग दर्ज किया गया है।
दूसरा सीन—स्कूटी रोकी और खुल गया ‘स्मैक कनेक्शन’!
अब कैमरा घूमता है मंगलौर के लंढौरा क्षेत्र की तरफ।
पुलिस टीम संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। तभी एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस के रडार पर आया।
पुलिस ने उसे रोका।
तलाशी ली गई।
और फिर सामने आई कथित 16.10 ग्राम स्मैक।
पुलिस ने बरामद स्मैक की अनुमानित कीमत करीब 4.83 लाख रुपये बताई है।
लेकिन कहानी में एक और ट्विस्ट था।
पुलिस के मुताबिक नशे की तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक इलेक्ट्रिक स्कूटी भी बरामद की गई।
आरोपी की पहचान फैज मोहम्मद पुत्र फरागत, निवासी रणसूरा, कोतवाली लक्सर, जनपद हरिद्वार के रूप में हुई।
अब पुलिस इस पूरे मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि कथित स्मैक कहां से आई और इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था।
कार्रवाई में उपनिरीक्षक नवीन चौहान, हेड कांस्टेबल शूरबीर चौहान और कांस्टेबल नरेश कुमार शामिल रहे।
तीसरा सीन—नशे के बाद सट्टे पर पुलिस का वार!
फिल्म का तीसरा सीन पहुंचता है पिरान कलियर।
यहां पुलिस ने ऑपरेशन प्रहार के तहत कथित सट्टे की खाईबाड़ी पर कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार चेकिंग और गश्त के दौरान एक व्यक्ति सट्टे का खेल चलाते हुए पकड़ा गया।
तलाशी हुई तो पुलिस के हाथ लगे—
सट्टा डायरी… पैन… सट्टा पर्चियां… और 1,240 रुपये नकद।
आरोपी की पहचान मौहम्मद वसीम पुत्र तहसीन, निवासी मोहल्ला डुंगर सराय, थाना राय शक्ति, जिला संभल, उत्तर प्रदेश के रूप में बताई गई है।
पुलिस ने उसके खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 206/2026, धारा 13 जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई की है।
इस कार्रवाई में हेड कांस्टेबल सुबोध कुमार और कांस्टेबल अमर सिंह शामिल रहे।
एक्शन खत्म… लेकिन कहानी अभी बाकी है!
एक तरफ 522 ग्राम चरस, दूसरी तरफ 16.10 ग्राम स्मैक, और तीसरी तरफ सट्टे की डायरी और पर्चियां।
तीनों कार्रवाई अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई, लेकिन संदेश एक ही है—अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस का शिकंजा कस रहा है।
हरिद्वार पुलिस के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में नशे के अवैध कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
अब असली सवाल यह है कि पकड़े गए आरोपियों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है या नहीं?
चरस की सप्लाई लाइन कहां तक जाती है?
स्मैक की खेप किसके लिए थी?
और सट्टे की डायरी में दर्ज नामों के पीछे कौन-कौन से चेहरे छिपे हैं?
पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी तो कहानी के अगले किरदार भी सामने आ सकते हैं।
फिलहाल हरिद्वार पुलिस के इस ताबड़तोड़ एक्शन ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि नशे और अवैध गतिविधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन प्रहार’ की पटकथा अभी खत्म नहीं हुई है… अगला सीन किसी और इलाके में भी शुरू हो सकता है।



