हरिद्वार में राष्ट्रीय लोक अदालत का बड़ा आयोजन, 1500 मामलों का रेफरल—शाम तक 3 हजार तक मामले निस्तारण की उम्मीद,, जनपद न्यायाधीश, सीजीएम और एसीजीएम बेंचों में सैकड़ों मामलों का निस्तारण, प्री-लिटिगेशन मामलों में भी समझौते से न्याय दिलाने की पहल,, विधिक सचिव सिमरनजीत कौर ने दी जानकारी

हरिद्वार में राष्ट्रीय लोक अदालत का बड़ा आयोजन, 1500 मामलों का रेफरल—शाम तक 3 हजार तक मामले निस्तारण की उम्मीद,,
जनपद न्यायाधीश, सीजीएम और एसीजीएम बेंचों में सैकड़ों मामलों का निस्तारण, प्री-लिटिगेशन मामलों में भी समझौते से न्याय दिलाने की पहल,, विधिक सचिव सिमरनजीत कौर ने दी जानकारी
हरिद्वार। राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत शनिवार को हरिद्वार जनपद में विभिन्न न्यायालयों और बेंचों के समक्ष मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया जारी रही। लोक अदालत में बड़ी संख्या में वादकारी अपने मामलों के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से मामलों का त्वरित निस्तारण कर वादकारियों को जल्द राहत उपलब्ध कराना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सिमरनजीत कौर ने बताया कि लोक अदालत में करीब 1500 मामलों का रेफरल किया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिन समाप्त होने तक निस्तारित मामलों का आंकड़ा ढाई से 3 हजार के बीच पहुंच सकता है। हालांकि अंतिम और सटीक आंकड़ा शाम तक सभी बेंचों से प्राप्त होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जनपद न्यायाधीश की बेंच से करीब 350 मामलों का निस्तारण
लोक अदालत में अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार जनपद न्यायाधीश की प्रथम बेंच में करीब 350 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। वहीं सीजीएम कोर्ट की बेंच में लगभग 600 मामलों के निस्तारण की जानकारी सामने आई है। एसीजीएम कोर्ट में भी करीब 400 से 450 मामलों का निस्तारण होने की बात सामने आई है। इसके अलावा सिविल कोर्ट और फैमिली कोर्ट में भी करीब 30 से 40 मामलों का निस्तारण हुआ है। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न बाह्य न्यायालयों में गठित बेंचों में भी मामलों की सुनवाई और निस्तारण की प्रक्रिया लगातार जारी थी। सभी बेंचों से आंकड़े प्राप्त होने के बाद राष्ट्रीय लोक अदालत की कुल उपलब्धि सामने आएगी।

एमवी एक्ट और आरटीओ मामलों की सुनवाई भी जारी
राष्ट्रीय लोक अदालत में एमवी एक्ट से संबंधित मामलों और आरटीओ के चालानों का निस्तारण भी किया जा रहा है। इन मामलों में भी बड़ी संख्या में प्रकरण लोक अदालत के समक्ष रखे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार कई मामलों में आपसी सहमति के आधार पर समाधान का रास्ता निकाला जा रहा है। वहीं पहले से न्यायालयों में लंबित सिविल और शमनीय प्रकृति के पोस्ट-लिटिगेशन मामलों को भी संबंधित न्यायालयों से लोक अदालत की बेंचों के समक्ष संदर्भित किया गया था। इनमें से बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण होने की जानकारी दी गई है।
प्री-लिटिगेशन मामलों के समाधान पर भी जोर
लोक अदालत की सबसे महत्वपूर्ण पहल उन मामलों को लेकर रही जो अभी न्यायालय तक पहुंचे ही नहीं हैं। ऐसे प्री-लिटिगेशन मामलों में संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर उन्हें लोक अदालत के माध्यम से आपसी समझौते का अवसर दिया जाता है। सिमरनजीत कौर के अनुसार बैंक और ऋण से जुड़े कई प्री-लिटिगेशन मामले भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में रखे गए हैं। इन मामलों में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर आपसी सामंजस्य स्थापित कराने का प्रयास किया जा रहा है। यदि पक्षकार न्यायालय जाने से पहले ही आपसी सहमति से विवाद का समाधान कर लेते हैं तो इससे न केवल संबंधित व्यक्ति को जल्दी राहत मिलती है, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने से भी रोका जा सकता है।
वादकारी का हित सर्वोपरि—जल्द मिले न्याय और राहत
सिमरनजीत कौर ने कहा कि न्याय व्यवस्था में वादकारी का हित सर्वोपरि है। ऐसे कई विवाद होते हैं जिन्हें केवल आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से आसानी से समाप्त किया जा सकता है। लोक अदालत इसी उद्देश्य को पूरा करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब दोनों पक्षों को एक मंच पर बैठाकर उनकी समस्याओं को समझा जाता है और सहमति का रास्ता निकाला जाता है तो विवाद का समाधान अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है। इससे पक्षकारों का समय और खर्च दोनों बचते हैं।

बढ़ते मुकदमों के बोझ पर लग सकता है पूर्ण विराम
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जो विवाद न्यायालय में पहुंचने वाले होते हैं, यदि उनका समाधान पहले ही हो जाए तो लंबी कानूनी प्रक्रिया से पक्षकारों को राहत मिल सकती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने कहा कि लोक अदालत का आयोजन तभी सार्थक माना जाएगा जब अधिक से अधिक लोगों को शीघ्र न्याय और राहत मिले। इसी दिशा में सभी संबंधित बेंचों और अधिकारियों द्वारा मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
शाम तक सामने आएगा अंतिम आंकड़ा
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय लोक अदालत में सैकड़ों मामलों का निस्तारण हो चुका है, जबकि कई मामलों की सुनवाई जारी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि दिन समाप्त होने तक कुल निस्तारण का आंकड़ा ढाई से 3 हजार के बीच पहुंच सकता है। अंतिम आंकड़ा सभी न्यायालयों और बेंचों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद स्पष्ट होगा। राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए आपसी सहमति से विवादों के समाधान की यह प्रक्रिया लोगों को त्वरित न्याय दिलाने के साथ-साथ न्यायालयों पर लंबित मुकदमों के दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



