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‘मियां’ शब्द पर सियासी संग्राम, भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना,, शादाब शम्स बोले—‘मियां’ का अर्थ सम्मानित व्यक्ति, श्रीमान; तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को संबोधन से आपत्ति क्यों?

‘मियां’ शब्द पर सियासी संग्राम, भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना,,

शादाब शम्स बोले—‘मियां’ का अर्थ सम्मानित व्यक्ति, श्रीमान; तुष्टिकरण की राजनीति करने वालों को संबोधन से आपत्ति क्यों?

देहरादून। ‘मियां’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर छिड़े राजनीतिक विवाद ने अब उत्तराखंड की सियासत में नया रंग ले लिया है। इस मामले में उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने ‘मियां’ शब्द को लेकर उठ रहे सवालों पर पलटवार करते हुए कहा कि इस शब्द का शाब्दिक अर्थ सम्मानित व्यक्ति अथवा ‘श्रीमान’ होता है। ऐसे में इस संबोधन को लेकर आपत्ति जताना अपने आप में सवाल खड़े करता है।

शादाब शम्स ने कहा कि राजनीतिक बहस को अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाने के बजाय शब्दों के वास्तविक अर्थ को समझने की जरूरत है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति के आरोपों से घिरे रहे हैं और मुस्लिम वोट बैंक को लेकर राजनीति करते हैं, उन्हें ‘मियां’ जैसे सम्मानसूचक शब्द के इस्तेमाल पर नाराजगी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता विभिन्न समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते रहे हैं। ऐसे में यदि किसी संबोधन में ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल हुआ है तो इसे राजनीतिक विवाद का मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है।

‘मियां’ शब्द को लेकर शादाब शम्स का विपक्ष पर पलटवार

भाजपा प्रवक्ता शादाब शम्स ने कहा कि ‘मियां’ शब्द को लेकर जिस तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ रही है, उससे लगता है कि विपक्ष इस सामान्य शब्द को भी राजनीतिक चश्मे से देख रहा है। उन्होंने कहा कि भाषा और संबोधन का अपना सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ होता है और किसी शब्द को उसके वास्तविक अर्थ से अलग करके पेश करना उचित नहीं है।

उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि जब उनकी राजनीति में लंबे समय से मुस्लिम समाज के बीच पहुंच बनाने और वोट बैंक की राजनीति के आरोप लगते रहे हैं, तो फिर ‘मियां’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति किस बात की है?

शम्स ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि विपक्ष की पसंद और उसकी कथित तुष्टिकरण की राजनीति के अनुरूप ही उसे कोई सम्मानजनक संबोधन दिया जा रहा है तो फिर नाराजगी की कोई वजह नहीं होनी चाहिए। बल्कि उन्हें इसे सम्मान के तौर पर स्वीकार करना चाहिए।

राहुल गांधी को लेकर भी कसा राजनीतिक तंज

शादाब शम्स ने अपने बयान में राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेता समय-समय पर विभिन्न समुदायों के बीच जाकर संवाद करते हैं और उनके कार्यक्रमों में पारंपरिक वेशभूषा में नजर आते हैं। ऐसे में किसी सम्मानसूचक संबोधन को लेकर विवाद खड़ा करना राजनीतिक विरोधाभास को दर्शाता है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि कोई नेता किसी समुदाय के बीच जाकर उनकी संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप दिखाई देता है, तो उसे लेकर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए। लेकिन दूसरी ओर यदि किसी संबोधन में ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल होता है तो उसे लेकर राजनीतिक आपत्ति जताना समझ से परे है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राजनीति में शब्दों के इस्तेमाल को लेकर संवेदनशीलता जरूरी है, लेकिन हर शब्द को विवाद का विषय बना देना स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मुद्दों पर बहस करनी चाहिए, शब्दों के अर्थ को तोड़-मरोड़कर विवाद पैदा करने से बचना चाहिए।

‘तुष्टिकरण’ के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा

शादाब शम्स ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा लगातार तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ आवाज उठाती रही है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की राजनीति ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर केंद्रित है, जबकि कांग्रेस पर भाजपा लगातार वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक समझने की राजनीति अब जनता स्वीकार नहीं करेगी। समाज के प्रत्येक वर्ग को समान सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि वह वास्तव में सभी समुदायों का सम्मान करता है तो फिर ‘मियां’ जैसे शब्द को लेकर आपत्ति क्यों?

शादाब शम्स का बयान बना राजनीतिक चर्चा का विषय

‘मियां’ शब्द को लेकर शादाब शम्स के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। भाजपा जहां इसे सम्मानसूचक शब्द बताते हुए विपक्ष की प्रतिक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं इस मुद्दे को लेकर विपक्ष की ओर से अलग राजनीतिक व्याख्या सामने आने की संभावना है।

शादाब शम्स ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि किसी भी शब्द को उसके संदर्भ और अर्थ के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के वास्तविक मुद्दों—विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था—पर चर्चा करनी चाहिए, न कि शब्दों के इस्तेमाल को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना चाहिए।

उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि किसी को ‘मियां’ शब्द सम्मानजनक संबोधन के रूप में दिया गया है तो उसे लेकर नाराजगी जताने के बजाय उसे सम्मान के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।

बाइट— शादाब शम्स, प्रदेश प्रवक्ता भाजपा/अध्यक्ष वक्फ बोर्ड उत्तराखंड

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