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कलियर दरगाह में फाइल पास कराने को लेकर ‘2 लाख की डील’ का कथित सनसनीखेज ऑडियो! आखिर कौन खोलेगा फाइल और ऑडियो की गुत्थी?…. फाइल पास कराने के नाम पर कथित लेन-देन का दावा, ‘आखिर कितनी मोटी थी फाइल?’—भदौरिया एसोसिएट अधिवक्ताओं ने डीएम से निष्पक्ष व जांच की मांग,, क्योंकि असली कहानी शायद ऑडियो में नहीं, उस फाइल में छिपी है।

कलियर दरगाह में फाइल पास कराने को लेकर ‘2 लाख की डील’ का कथित सनसनीखेज ऑडियो! आखिर कौन खोलेगा फाइल और ऑडियो की गुत्थी?….

फाइल पास कराने के नाम पर कथित लेन-देन का दावा, ‘आखिर कितनी मोटी थी फाइल?’—भदौरिया एसोसिएट अधिवक्ताओं ने डीएम से निष्पक्ष व जांच की मांग,,

क्योंकि असली कहानी शायद ऑडियो में नहीं, उस फाइल में छिपी है।

हरिद्वार/पिरान कलियर। पिरान कलियर स्थित दरगाह प्रबंधन से जुड़ा एक कथित वायरल ऑडियो अब कई गंभीर सवालों को जन्म दे रहा है। फाइल पास कराने के नाम पर कथित तौर पर 2 लाख रुपये के लेन-देन की बातचीत होने का दावा करते हुए भदौरिया एसोसिएट अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी हरिद्वार से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सवाल सिर्फ वायरल ऑडियो का नहीं, बल्कि उस फाइल का भी है, जिसके इर्द-गिर्द कथित बातचीत होने का दावा किया जा रहा है।

आखिर वह फाइल कौन-सी थी? उसमें ऐसा क्या था? उसकी कीमत कितनी थी? और कथित तौर पर 2 लाख रुपये की रकम किसके लिए और किस काम के बदले मांगी जा रही थी? यही सवाल इस पूरे मामले की गुत्थी को और उलझा रहे हैं।

‘आखिर कितनी मोटी थी फाइल?’—कथित ऑडियो ने बढ़ाई हलचल

14 सितंबर 2026 को जिलाधिकारी हरिद्वार को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता अरुण भदौरिया, कमल भदौरिया और चेतन भदौरिया ने पूरे मामले की जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, कथित वायरल ऑडियो में एक ठेकेदार और सुपरवाइजर के बीच किसी फाइल को पास कराने को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है। इसमें कथित रूप से दो लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की रकम, फाइल पास कराने और चेक जारी होने से पहले कथित लेन-देन जैसी बातें सामने आने की बात कही गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर फाइल इतनी महत्वपूर्ण थी कि उसे पास कराने के लिए कथित तौर पर लाखों रुपये की चर्चा हो रही थी, तो आखिर वह फाइल कितनी ‘मोटी’ थी?

उस फाइल का कुल मूल्य कितना था? उसमें किस कार्य का भुगतान प्रस्तावित था? किस ठेकेदार का बिल था? और भुगतान की मंजूरी किस स्तर पर होनी थी?

अरुण भदौरिया अधिवक्ताओ शिकायतकर्ताओं ने जांच के लिए कई सीधे सवाल जिलाधिकारी के सामने रखे हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह पता लगाने की मांग की गई है कि कथित दो लाख रुपये की मांग-लेनदेन किस फाइल और किस कार्य से संबंधित थी। संबंधित ठेकेदार कौन है और दरगाह प्रबंधन में उसकी क्या भूमिका है? ऑडियो में बातचीत करने वाला सुपरवाइजर/कर्मचारी कौन है?
इसके साथ ही यह भी जांच की मांग की गई है कि क्या संबंधित फाइल बाद में पास हुई? क्या उसके आधार पर कोई भुगतान किया गया? क्या कोई चेक जारी हुआ? यदि भुगतान हुआ तो किसके आदेश पर हुआ और किस दस्तावेज के आधार पर हुआ?
यानी जांच का दायरा केवल वायरल ऑडियो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फाइल से लेकर भुगतान और चेक जारी होने तक पूरी प्रक्रिया की जांच किए जाने की मांग की गई है।

कथित बातचीत में ठेकेदार के दो लाख घूस ‘गिड़गिड़ाने’ का दावा

शिकायत में कथित बातचीत को लेकर यह दावा भी किया गया है कि रकम को लेकर ठेकेदार के गिड़गिड़ाने जैसी स्थिति सामने आती है।

यदि जांच में ऑडियो वास्तविक पाया जाता है तो यह बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है। लेकिन उससे पहले यह साबित होना जरूरी है कि ऑडियो असली है, आवाजें किसकी हैं और रिकॉर्डिंग में किसी प्रकार की एडिटिंग या छेड़छाड़ तो नहीं हुई। इसीलिए शिकायतकर्ताओं ने ऑडियो की तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

आखिर कौन खोलेगा इस फाइल और ऑडियो की गुत्थी?

अब पूरा मामला इसी सवाल पर आकर टिक गया है—आखिर कौन खोलेगा इस फाइल और ऑडियो की गुत्थी?

जांच में सबसे पहले उस फाइल को सामने लाना होगा, जिसका कथित ऑडियो में जिक्र बताया जा रहा है। इसके बाद उसकी नोटशीट, स्वीकृति प्रक्रिया, बिल, भुगतान रिकॉर्ड और चेक से संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जाना जरूरी होगा।

यदि फाइल में दर्ज अधिकारियों की टिप्पणियां और स्वीकृति प्रक्रिया कथित बातचीत से जुड़ती है, तो मामले की तस्वीर बदल सकती है।

इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि कथित ऑडियो में बातचीत करने वाला सुपरवाइजर/कर्मचारी कौन है और संबंधित ठेकेदार की दरगाह प्रबंधन में क्या भूमिका है।

‘2 लाख’ की कथित रकम किसके लिए थी?

मामले का सबसे बड़ा वित्तीय सवाल भी अभी अनुत्तरित है।

कथित 2 लाख रुपये किसके लिए थे?
क्या यह किसी भुगतान को जारी कराने के लिए कथित मांग थी?
क्या यह फाइल पास कराने के नाम पर कथित रकम थी?
क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी तक रकम पहुंचाने की बात थी?
या फिर वायरल ऑडियो को किसी अन्य संदर्भ में पेश किया जा रहा है?

इन सवालों का जवाब बिना जांच के देना उचित नहीं होगा। इसलिए शिकायत में दस्तावेजों और ऑडियो दोनों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

ऑडियो पुराना था तो इतने दिन तक कार्रवाई क्यों नहीं?

शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि कथित ऑडियो पहले से जिम्मेदार लोगों के संज्ञान में था तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

यदि ऑडियो पुराना था तो इस दौरान संबंधित फाइल कहां रही? उस पर क्या निर्णय हुआ? क्या भुगतान हुआ? क्या चेक जारी किया गया?

और यदि किसी स्तर पर इस मामले को दबाने या छिपाने की कोशिश हुई, तो किसकी भूमिका थी?

यही वह बिंदु है जिसकी जांच पूरे प्रकरण को नई दिशा दे सकती है।

फाइल से लेकर चेक तक होगी जांच तो सामने आएगा सच

भदौरिया एसोसिएट अधिवक्ताओं ने मांग की है कि जांच में संबंधित फाइल, नोटशीट, भुगतान रिकॉर्ड, चेक तथा अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए। साथ ही कथित ऑडियो में बातचीत करने वाले बताए जा रहे व्यक्तियों की पहचान कर पूछताछ की जाए और संबंधित ठेकेदार की भूमिका भी जांची जाए।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

सच क्या है—‘डील’ या सिर्फ वायरल दावा?

फिलहाल इस मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि वायरल ऑडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना जांच से पहले उचित नहीं होगा।

लेकिन सवाल इतने गंभीर हैं कि उन्हें नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

एक तरफ कथित 2 लाख रुपये की बातचीत है, दूसरी तरफ वह रहस्यमयी फाइल है और तीसरी तरफ भुगतान एवं चेक का रिकॉर्ड।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। क्या ऑडियो की फॉरेंसिक जांच होगी? क्या संबंधित फाइल को कब्जे में लेकर दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा? क्या ठेकेदार और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ होगी?

क्योंकि असली कहानी शायद ऑडियो में नहीं, उस फाइल में छिपी है।

जनहित में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर कौन खोलेगा इस फाइल और ऑडियो की गुत्थी? अगर कथित बातचीत सच निकली तो 2 लाख की कथित डील अब निष्पक्ष जांच ही तय करेगी कि मामला ‘फाइल पास कराने की कथित डील’ का है या फिर किसी और बड़े खेल का।

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