सवारी बनकर सड़क पर उतरे एआरटीओ निखिल शर्मा, खुल गया किराए की मनमानी का पूरा खेल!……. ₹50 की सवारी के मांगे ₹300, अफसर ने मौके पर खोला राज; 105 चालान, 25 वाहन जब्त
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा और एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा ने आम यात्रियों की तरह सफर शुरू किया और शुरू हो गया किराए की मनमानी का पर्दाफाश। वर्दी नहीं थी… पहचान छिपी थी… और जांच शुरू थी

सवारी बनकर सड़क पर उतरे एआरटीओ निखिल शर्मा, खुल गया किराए की मनमानी का पूरा खेल!…….
₹50 की सवारी के मांगे ₹300, अफसर ने मौके पर खोला राज; 105 चालान, 25 वाहन जब्त

हरिद्वार– कहानी वही थी… सवारी बैठी, वाहन चला और किराए की मांग हुई। लेकिन इस बार कहानी का ट्विस्ट कुछ ऐसा था कि चालक भी दंग रह गए।
सड़क पर आम यात्री बनकर बैठे थे परिवहन विभाग के अधिकारी और सामने था ऑटो-विक्रम चालकों का असली चेहरा। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा और एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा ने आम यात्रियों की तरह सफर शुरू किया और शुरू हो गया किराए की मनमानी का पर्दाफाश।
वर्दी नहीं थी… पहचान छिपी थी… और जांच शुरू थी
परिवहन विभाग की टीम ने इस बार कार्रवाई का अंदाज बदल दिया। न कोई सायरन, न सरकारी वाहन का रौब और न ही पहले से कोई सूचना। अधिकारी सीधे आम यात्री बनकर ऑटो और विक्रम में सवार हो गए।मकसद था सिर्फ एक—देखना कि सड़क पर यात्रियों से वास्तव में कितना किराया वसूला जा रहा है।जैसे-जैसे सफर आगे बढ़ा, वैसे-वैसे किराए की तस्वीर भी सामने आती गई।
फिर आया असली ‘ट्विस्ट’—₹50 की जगह ₹300!
रानीपुर मोड़ से रेलवे स्टेशन तक का सफर शुरू हुआ। निर्धारित किराया था ₹50।लेकिन दो विक्रम चालकों ने किराए के नाम पर सीधे ₹300 मांग डाले।यानी ₹50 की सवारी के बदले ₹300!यह वही पल था, जब आम यात्री समझकर बैठे अधिकारी ने पूरे खेल की पोल पकड़ ली। परिवहन विभाग ने दोनों विक्रमों को मौके पर ही जब्त कर लिया और चालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी।
एक्शन यहीं खत्म नहीं हुआ…
दो विक्रमों पर कार्रवाई के बाद अभियान रुका नहीं। परिवहन विभाग की टीम ने अलग-अलग मार्गों पर वाहनों की जांच तेज कर दी।नतीजा सामने आया तो कार्रवाई का आंकड़ा चौंकाने वाला था—
105 चालान।
25 वाहन जब्त।
जांच में एक ई-रिक्शा ओवरलोडिंग करता मिला, जबकि दो ई-रिक्शा बिना पंजीकरण सड़क पर दौड़ते पाए गए। तीनों वाहनों को भी जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
अब किराए की मनमानी पर ‘कट’ नहीं, सीधे एक्शन!
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि यात्रियों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी।
निर्धारित किराए से ज्यादा वसूली हो या ओवरलोडिंग, बिना पंजीकरण वाहन हो या कोई अन्य परिवहन नियमों का उल्लंघन—सड़क पर पकड़े गए तो कार्रवाई तय है।
अभियान में एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा, परिवहन निरीक्षक अनिल, निपुल समेत विभागीय स्टाफ मौजूद रहा।
निखिल शर्मा, एआरटीओ प्रशासन हरिद्वार ने कहा कि निर्धारित किराए से अधिक वसूली, ओवरलोडिंग और बिना पंजीकरण वाहन संचालन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यात्रियों से अपील है कि मनमाना किराया मांगने वाले वाहन का नंबर नोट कर विभाग को सूचना दें। जिलाधिकारी के निर्देश पर ऐसे औचक अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
अगली सवारी कौन है… पता नहीं!
परिवहन विभाग की इस कार्रवाई ने वाहन चालकों को साफ संदेश दे दिया है कि अब सिर्फ विभागीय चेकिंग देखकर नियमों का पालन करने से काम नहीं चलेगा।
क्योंकि अगली बार सड़क पर बैठी सवारी कौन है—यात्री या अधिकारी—इसका पता चालक को आखिरी वक्त तक नहीं चलेगा।
एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा ने यात्रियों से अपील की कि यदि कोई चालक निर्धारित किराए से अधिक रकम मांगता है तो वाहन नंबर नोट करें और परिवहन विभाग को सूचना दें।जिलाधिकारी के निर्देश पर ऐसी आकस्मिक जांच आगे भी जारी रहेगी।हरिद्वार की सड़कों पर अब खेल किराए का नहीं, नियमों का होगा… और ₹50 के सफर के ₹300 मांगने वालों के लिए अगली सवारी सीधे ‘सरकारी कार्रवाई’ लेकर आ सकती है।



