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फार्मा कनेक्ट 2026 ने हरिद्वार में जगाई नई तकनीक की अलख, फार्मा उद्योग को ऊर्जा बचत और गुणवत्ता का दिया मंत्र…. 300 से ज्यादा कंपनियों की भागीदारी, ISHRAE के मंच से एचवीएसी, क्लीन रूम, फिल्ट्रेशन और ग्रीन एनर्जी पर मंथन; दवा निर्माण को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और ऊर्जा दक्ष बनाने का संकल्प

फार्मा कनेक्ट 2026 ने हरिद्वार में जगाई नई तकनीक की अलख, फार्मा उद्योग को ऊर्जा बचत और गुणवत्ता का दिया मंत्र….

300 से ज्यादा कंपनियों की भागीदारी, ISHRAE के मंच से एचवीएसी, क्लीन रूम, फिल्ट्रेशन और ग्रीन एनर्जी पर मंथन; दवा निर्माण को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और ऊर्जा दक्ष बनाने का संकल्प

हरिद्वार। फार्मास्यूटिकल उद्योग में लगातार बदलती तकनीक, बढ़ती ऊर्जा जरूरत और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर हरिद्वार में आयोजित फार्मा कनेक्ट 2026 ने उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मंच के रूप में अपनी पहचान मजबूत की। कार्यक्रम में फार्मा कंपनियों, इंजीनियरिंग विशेषज्ञों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने एक मंच पर आकर दवा निर्माण के वातावरण, एचवीएसी सिस्टम, ऊर्जा बचत, क्लीन रूम, फिल्ट्रेशन और नई तकनीक पर विस्तार से चर्चा की।

इंडियन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेटिंग एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स (ISHRAE) के प्रतिनिधित्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य फार्मास्यूटिकल कंपनियों को उन नई तकनीकों और इंजीनियरिंग समाधानों से रूबरू कराना रहा, जो दवा निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ ऊर्जा की खपत को कम करने में मदद कर सकते हैं। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में हरिद्वार, रुड़की, देहरादून और दिल्ली-एनसीआर की 300 से अधिक कंपनियों के रजिस्ट्रेशन हुए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि फार्मा उद्योग में ऊर्जा दक्षता, आधुनिक एचवीएसी सिस्टम और नियंत्रित उत्पादन वातावरण को लेकर रुचि लगातार बढ़ रही है।

फार्मा और इंजीनियरिंग के बीच सेतु बना फार्मा कनेक्ट

फार्मा कनेक्ट 2026 के चेयर वैभव गुप्ता ने कार्यक्रम की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि ISHRAE एक नो-प्रॉफिट, नो-लॉस सोसाइटी के रूप में इंजीनियरिंग और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। फार्मा कनेक्ट का उद्देश्य इसी तकनीकी ज्ञान को फार्मास्यूटिकल उद्योग तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि फार्मा कंपनियों में चिलर, कूलिंग टावर, एएचयू, डीह्यूमिडिफायर और फिल्ट्रेशन जैसे सिस्टम उत्पादन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन सिस्टम को बेहतर तरीके से संचालित करके ऊर्जा खपत कम करने के साथ उत्पादन वातावरण को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ परिस्थितियों में एयर कंडीशनिंग सिस्टम की तापमान सेटिंग को 24 से 25 डिग्री सेल्सियस करने से लगभग 6 प्रतिशत तक ऊर्जा बचत का अंतर आ सकता है। वास्तविक बचत सिस्टम की डिजाइन, बाहरी परिस्थितियों और संचालन पर निर्भर करती है, लेकिन बड़े फार्मा प्लांट में छोटी-सी ऊर्जा बचत भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।

ऊर्जा बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

फार्मा कनेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष ऊर्जा दक्षता को केवल बिजली का बिल कम करने तक सीमित न रखना रहा। आयोजकों ने इसे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास से जोड़ते हुए उद्योग को ग्रीन टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ने का संदेश दिया। बड़े फार्मास्यूटिकल प्लांट में एचवीएसी सिस्टम लगातार संचालित होते हैं और इसलिए उनकी ऊर्जा दक्षता का असर सीधे कुल बिजली खपत पर पड़ता है। यदि कंपनियां आधुनिक उपकरण, ऑटोमेशन, बेहतर मॉनिटरिंग और नियमित मेंटेनेंस अपनाती हैं तो ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। फार्मा कनेक्ट ने इसी विचार को उद्योग के सामने व्यावहारिक रूप में रखा कि छोटी-छोटी तकनीकी बचत को बड़े स्तर पर लागू करके आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

दवाओं की गुणवत्ता में वातावरण की अहम भूमिका

कार्यक्रम के तकनीकी सत्रों में यह भी समझाया गया कि फार्मास्यूटिकल उत्पादन में केवल दवा का फॉर्मूला ही महत्वपूर्ण नहीं है। जिस वातावरण में दवा तैयार होती है, वहां तापमान, ह्यूमिडिटी, एयर क्वालिटी, फिल्ट्रेशन और क्लीन रूम की निर्धारित स्थितियों का पालन भी जरूरी है।विशेषज्ञों ने बताया कि नियंत्रित वातावरण उत्पादन प्रक्रिया में गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करता है। विशेष रूप से स्टेराइल और संवेदनशील उत्पादों के लिए क्लीन रूम की परिस्थितियों की निगरानी और नियंत्रण का महत्व और बढ़ जाता है। फार्मा कनेक्ट के माध्यम से कंपनियों को इसी तकनीकी पक्ष की जानकारी उपलब्ध कराई गई, ताकि वे आधुनिक इंजीनियरिंग सिस्टम को समझकर अपनी जरूरत के अनुसार बेहतर समाधान अपना सकें।

फिल्ट्रेशन से लेकर ह्यूमिडिटी कंट्रोल तक तकनीकी चर्चा

कार्यक्रम में फिल्ट्रेशन सिस्टम को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। वक्ताओं ने बताया कि फिल्टर की स्थिति, एयरफ्लो और एएचयू की कार्यक्षमता की नियमित निगरानी जरूरी है। इसी तरह डीह्यूमिडिफिकेशन सिस्टम और ह्यूमिडिटी कंट्रोल दवा निर्माण के वातावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निर्धारित परिस्थितियों को बनाए रखने के लिए उपकरणों की नियमित जांच और समय पर रखरखाव आवश्यक है। फार्मा कनेक्ट ने इन तकनीकी विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उद्योग प्रतिनिधियों को नई तकनीकों और संभावित इंजीनियरिंग समाधानों से परिचित कराने का प्रयास किया।

नए शेड्यूल एम के दौर में तकनीक की बढ़ती भूमिका

कार्यक्रम में नए Schedule M के संदर्भ में भी फार्मा उद्योग में हो रहे बदलावों पर चर्चा हुई। वक्ताओं के अनुसार आधुनिक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप फार्मा कंपनियों को अपनी उत्पादन प्रणालियों, उपकरणों और वातावरण नियंत्रण व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

नई तकनीक अपनाने से शुरुआती लागत बढ़ सकती है, लेकिन आधुनिक उपकरणों के माध्यम से गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन प्रक्रिया और ऊर्जा दक्षता में सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं। कार्यक्रम में उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि उत्तराखंड का फार्मास्यूटिकल सेक्टर नई तकनीक अपनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। कई कंपनियां नए मानकों के अनुरूप अपने सिस्टम को अपडेट कर रही हैं और अन्य कंपनियां भी अपग्रेडेशन की प्रक्रिया में हैं।

विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का संदेश

फार्मा कनेक्ट 2026 का आयोजन ऐसे समय में हुआ जब विश्व फार्मासिस्ट दिवस भी मनाया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने फार्मासिस्ट की भूमिका और दवा की गुणवत्ता को लेकर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दवा का निर्माण केवल उत्पादन का विषय नहीं है। निर्माण से लेकर डिस्पेंसिंग और वितरण तक हर स्तर पर गुणवत्ता और सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। वक्ताओं ने यह भी बताया कि किसी दवा के गुणवत्ता परीक्षण में विफल होने के पीछे हमेशा कच्चे माल या एपीआई की समस्या ही कारण नहीं होती। उत्पादन प्रक्रिया, तकनीकी मानक, वातावरण, स्टोरेज और कंटैमिनेशन से जुड़ी परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

तकनीकी ज्ञान को उद्योग तक पहुंचाने की मजबूत पहल

फार्मा कनेक्ट 2026 को लगातार तीसरे वर्ष आयोजित किया जाना इस पहल की निरंतरता को दर्शाता है। कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ताओं ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों के साथ अपने अनुभव और नई तकनीकों से जुड़ी जानकारी साझा की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यही रहा कि यहां फार्मा उद्योग और एचवीएसी इंजीनियरिंग क्षेत्र के बीच सीधा संवाद हुआ। कंपनियों को नई तकनीक समझने, विशेषज्ञों से सवाल पूछने और ऊर्जा दक्ष समाधान तलाशने का अवसर मिला। आयोजकों का कहना है कि भविष्य में फार्मा उद्योग को और अधिक ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए ऐसे संवाद जरूरी हैं।

हरिद्वार से फार्मा सेक्टर को नई दिशा देने की कोशिश

फार्मा कनेक्ट 2026 ने हरिद्वार को फार्मास्यूटिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्र के संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में सामने रखा। 300 से अधिक कंपनियों की भागीदारी और तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञों की चर्चा ने कार्यक्रम के व्यापक दायरे को दर्शाया। फार्मा कनेक्ट का संदेश स्पष्ट रहा—आधुनिक तकनीक को अपनाकर ऊर्जा बचत की जाए, उत्पादन वातावरण को नियंत्रित रखा जाए और दवाओं की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

ऊर्जा दक्षता, ग्रीन टेक्नोलॉजी और बेहतर इंजीनियरिंग समाधान के जरिए फार्मा उद्योग न केवल अपनी उत्पादन क्षमता और लागत प्रबंधन को बेहतर कर सकता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकता है। इसी सोच के साथ फार्मा कनेक्ट 2026 ने फार्मा उद्योग, इंजीनियरिंग विशेषज्ञों और तकनीकी कंपनियों के बीच एक उपयोगी संवाद का मंच तैयार किया और भविष्य के अधिक सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण तथा ऊर्जा दक्ष फार्मास्यूटिकल उद्योग की दिशा में एक सकारात्मक पहल का संदेश दिया।

वैभव गुप्ता, चेयरपर्सन ISHRAE:
फार्मा कनेक्ट का उद्देश्य फार्मास्यूटिकल उद्योग और इंजीनियरिंग क्षेत्र के बीच एक मजबूत तकनीकी सेतु बनाना है। आज फार्मा कंपनियों में ऊर्जा की खपत का बड़ा हिस्सा एचवीएसी सिस्टम पर होता है। नई तकनीक, बेहतर फिल्ट्रेशन, ह्यूमिडिटी और तापमान कंट्रोल के जरिए ऊर्जा की बचत के साथ उत्पादन वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है। हमारा प्रयास है कि उद्योग को नई तकनीकों और इनोवेशन से लगातार रूबरू कराया जाए, ताकि गुणवत्ता और सस्टेनेबिलिटी दोनों को बढ़ावा मिले।

अनीता भारती, वरिष्ठ ड्रग्स इंस्पेक्टर हरिद्वार:
दवा बनाना केवल उत्पादन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि दवा किस वातावरण में और किन मानकों के अनुसार बनाई जा रही है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। तापमान, ह्यूमिडिटी, फिल्ट्रेशन और क्लीन रूम की स्थिति का सही नियंत्रण दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। फार्मा कनेक्ट जैसे तकनीकी कार्यक्रम उद्योग को नई तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं की जानकारी देते हैं। विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर मेरा संदेश है कि दवा की गुणवत्ता और मरीज की सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

अनिल शर्मा, दवा निर्माता एवं महासचिव फार्मा एसोसिएशन सिडकुल हरिद्वार:
फार्मास्यूटिकल उद्योग लगातार नई तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नए मानकों और बदलती जरूरतों के साथ आधुनिक उपकरणों और बेहतर उत्पादन प्रणालियों को अपनाना जरूरी है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता और प्रक्रिया नियंत्रण मजबूत होते हैं। नई तकनीक में शुरुआती निवेश बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय में ऊर्जा दक्षता और बेहतर गुणवत्ता का लाभ मिलता है। फार्मा कनेक्ट जैसे मंच उद्योग को नई तकनीकों, इनोवेशन और विशेषज्ञों के अनुभव से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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