दरगाह में फिर ‘पुरानी फाइल’ का नया खेल? पूर्व में निरस्त नियुक्ति को दोबारा जिंदा करने के आरोप से मचा बवाल,, “निरस्त हो चुकी नियुक्ति की फाइल फिर क्यों दौड़ रही?” — मोहम्मद रफी प्रकरण में दरगाह कार्यालय की भूमिका पर उठे तीखे सवाल,, “सिफारिश, मिलीभगत या पर्दे के पीछे कोई बड़ा संरक्षण?” — शिकायतकर्ता ने जांच, पारदर्शिता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठाई मांग

वाजिद अली हरिद्वार- दरगाह में फिर ‘पुरानी फाइल’ का नया खेल? पूर्व में निरस्त नियुक्ति को दोबारा जिंदा करने के आरोप से मचा बवाल,,
“निरस्त हो चुकी नियुक्ति की फाइल फिर क्यों दौड़ रही?” — मोहम्मद रफी प्रकरण में दरगाह कार्यालय की भूमिका पर उठे तीखे सवाल,,
“सिफारिश, मिलीभगत या पर्दे के पीछे कोई बड़ा संरक्षण?” — शिकायतकर्ता ने जांच, पारदर्शिता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उठाई मांग

उत्तराखंड की चर्चित दरगाह पिरान कलियर एक बार फिर गंभीर आरोपों और प्रशासनिक सवालों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला दरगाह कार्यालय में कथित रूप से पूर्व में निरस्त हो चुकी नियुक्ति को दोबारा आगे बढ़ाने के आरोपों से जुड़ा है। वार्ड नंबर-4 पिरान कलियर निवासी मोईन साबरी द्वारा दरगाह प्रबंधक को दिए गए शिकायत पत्र ने पूरे प्रकरण को नई बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। शिकायत में लगाए गए आरोप यदि सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक नियुक्ति विवाद नहीं बल्कि दरगाह प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद रफी पुत्र यामीन का मामला पहले भी विवादों में रह चुका है और पूर्व में उसकी नियुक्ति कथित रूप से विरोध और जांच के बाद निरस्त की जा चुकी थी। शिकायत में दावा किया गया है कि अब उसी व्यक्ति की फाइल को दोबारा आगे बढ़ाकर विशेष पद पर नियुक्त कराने की कोशिश की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि जब संबंधित व्यक्ति का मामला पहले विवादित रह चुका है, तो आखिर उसकी फाइल दोबारा सक्रिय कैसे हुई?
शिकायत में दरगाह कार्यालय के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की कथित सिफारिश और कार्यालय के भीतर मिलीभगत के जरिए इस पूरे मामले को आगे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। शिकायतकर्ता ने यहां तक कहा कि कुछ लोग तथ्यों को छिपाकर उच्चाधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं।
मामले में सबसे तीखा आरोप यह लगाया गया कि यदि कोई व्यक्ति दरगाह कार्यालय से नजदीकी बना लेता है तो उसके खिलाफ मौजूद विवादित तथ्यों को दबाकर उसे “दरगाह हितैषी” बताने का प्रयास किया जाता है, जबकि दूसरी ओर ईमानदार और साफ छवि वाले लोगों की छवि धूमिल किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। ऐसे आरोपों ने पूरे सिस्टम पर सवालों की परतें और गहरी कर दी हैं।
यह भी सवाल उठाया गया कि यदि दरगाह में वास्तव में किसी पद की आवश्यकता है, तो फिर नियुक्तियों के लिए वैधानिक प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही? नियमों के अनुसार पद रिक्त होने पर विज्ञप्ति जारी होनी चाहिए, आवेदन आमंत्रित होने चाहिए और चयन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि यहां पहले व्यक्ति तय किया जा रहा है और बाद में उसके लिए रास्ते तैयार किए जा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस शिकायत के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म बताया जा रहा है। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या दरगाह जैसे आस्था के बड़े केंद्र में नियुक्तियों को लेकर नियमों से अलग कोई समानांतर व्यवस्था काम कर रही है? यदि ऐसा है तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
शिकायतकर्ता मोईन साबरी ने मांग की है कि संबंधित व्यक्ति की पूर्व में निरस्त नियुक्ति की पूरी फाइल की जांच कराई जाए, वर्तमान में चल रही फाइल पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा इस पूरे प्रकरण में जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और कथित सिफारिशकर्ताओं की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि भविष्य में किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया को केवल विज्ञप्ति और पारदर्शी चयन प्रणाली के जरिए ही पूरा किया जाए।
हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक दरगाह प्रशासन या संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। लेकिन शिकायत पत्र ने एक बार फिर दरगाह पिरान कलियर के प्रशासनिक सिस्टम को सवालों के घेरे में जरूर खड़ा कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार अधिकारी इस प्रकरण पर क्या कदम उठाते हैं और जांच की दिशा किस ओर जाती है।



