हरिद्वार के DPRO पद हाईकोर्ट के आदेश के बाद तबादले की पटकथा पलटी, हरिद्वार में फिर DPRO पद पर अतुल प्रताप सिंह की नियुक्ति,, 15 जून की संबद्धता से 15 जुलाई के चम्पावत तबादले तक चला सस्पेंस, 21 सितंबर को हाईकोर्ट के आदेश ने बदला पूरा खेल; शासन ने तीनों पुराने आदेश किए निरस्त

हरिद्वार के DPRO पद हाईकोर्ट के आदेश के बाद तबादले की पटकथा पलटी, हरिद्वार में फिर DPRO पद पर अतुल प्रताप सिंह की नियुक्ति,,
15 जून की संबद्धता से 15 जुलाई के चम्पावत तबादले तक चला सस्पेंस, 21 सितंबर को हाईकोर्ट के आदेश ने बदला पूरा खेल; शासन ने तीनों पुराने आदेश किए निरस्त

हरिद्वार/देहरादून।
पंचायतीराज विभाग में जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह की तैनाती को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही प्रशासनिक उठापटक पर सोमवार को बड़ा मोड़ आ गया। जिस कुर्सी को लेकर 15 जून से लेकर 21 सितंबर तक आदेशों और न्यायालयी कार्रवाई का सिलसिला चला, आखिरकार उसी कुर्सी पर अतुल प्रताप सिंह की वापसी का रास्ता साफ हो गया।
उत्तराखंड शासन ने 21 सितंबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अतुल प्रताप सिंह को जनपद हरिद्वार के जिला पंचायत राज अधिकारी के पद पर पूर्व की भांति यथावत रखा गया है। शासन ने इससे जुड़े पूर्व के आदेशों को अवक्रमित करते हुए उन्हें हरिद्वार में ही पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया है।
कहानी में आया पहला ट्विस्ट—15 जून को देहरादून संबद्धता
पूरे मामले की शुरुआत 15 जून 2026 से हुई। शासन के कार्यालय आदेश के तहत हरिद्वार के जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह को प्रशासनिक आधार पर अग्रिम आदेशों तक पंचायतीराज निदेशालय, देहरादून से संबद्ध किया गया था।
इसके बाद घटनाक्रम ने फिर करवट ली। शासन ने 15 जुलाई 2026 को पूर्व संबद्धता आदेश को निरस्त करते हुए अतुल प्रताप सिंह का तबादला हरिद्वार से जनपद चम्पावत कर दिया।
यानी एक आदेश में देहरादून संबद्धता और फिर अगले चरण में चम्पावत तबादला—मामला यहीं नहीं रुका।
फिर हाईकोर्ट की एंट्री, चम्पावत तबादला ‘Abeyance’
शासन के तबादला आदेश के खिलाफ मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंचा। शासनादेश के अनुसार हाईकोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के क्रम में 25 अगस्त 2026 को शासन ने 15 जुलाई के चम्पावत तबादले वाले आदेश को तत्काल प्रभाव से आस्थगित (Abeyance) कर दिया।
इसके बाद मामला एक बार फिर न्यायालय के सामने पहुंचा और 21 सितंबर 2026 की सुनवाई ने पूरे घटनाक्रम को निर्णायक मोड़ दे दिया।
21 सितंबर 2026—कोर्ट में सुनवाई और बदल गया पूरा सीन
शासन के आदेश में उल्लेख है कि रिट याचिका संख्या 471/2026, अतुल प्रताप सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य में 21 सितंबर को हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई हुई।दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को विस्तारपूर्वक सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश के क्रम में याचिकाकर्ता को जिला पंचायत राज अधिकारी, हरिद्वार के पद पर कार्यभार ग्रहण कराने के आदेश दिए।इसके बाद शासन ने बिना देर किए न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नया कार्यालय आदेश जारी कर दिया।
तीन पुराने आदेश हुए ‘अवक्रमित’, हरिद्वार में फिर वही तैनाती
शासन द्वारा जारी आदेश में 15 जून 2026, 15 जुलाई 2026 और 25 अगस्त 2026 से जुड़े पूर्व आदेशों को अवक्रमित करते हुए अतुल प्रताप सिंह को जनपद हरिद्वार में जिला पंचायत राज अधिकारी के पद पर पूर्व की भांति यथावत रखने का निर्णय लिया गया है।
आदेश में संबंधित अधिकारी को हरिद्वार के जिला पंचायत राज अधिकारी के पद पर कार्यभार ग्रहण कर इसकी सूचना शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद फिलहाल इतना साफ है कि प्रशासनिक आदेशों और न्यायालयी प्रक्रिया के लंबे दौर के बाद अतुल प्रताप सिंह हरिद्वार के DPRO पद पर बने रहेंगे।
शिकायतों का मुद्दा भी चर्चा में
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों में शिकायतकर्ताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अतुल प्रताप सिंह की ओर से कथित शिकायतकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, कथित फर्जी हस्ताक्षर और एफिडेविट से जुड़े आरोपों पर भी कार्रवाई की मांग का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा शासन द्वारा शिकायतकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने संबंधी कोई आदेश इस उपलब्ध शासनादेश में नहीं है। इसलिए इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के बाद ही निकलेगा।
जिस तबादले ने मचाया था सस्पेंस, वही आदेश हुआ खत्म
कहानी अगर फिल्मी अंदाज में देखें तो जून में शुरू हुआ ट्रांसफर वाला ‘ट्विस्ट’ जुलाई में चम्पावत पहुंचा, अगस्त में हाईकोर्ट की एंट्री हुई और सितंबर में अदालत के आदेश के बाद कहानी ने यू-टर्न ले लिया।
अब शासन के 21 सितंबर के आदेश के बाद तस्वीर साफ है—चम्पावत तबादला नहीं, हरिद्वार की कुर्सी ही बरकरार।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े शिकायतों और आरोपों पर आगे क्या प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई होती है। लेकिन शासन के ताजा आदेश ने अतुल प्रताप सिंह की हरिद्वार में DPRO पद पर तैनाती को लेकर चल रहे सस्पेंस पर फिलहाल पूर्ण विराम लगा दिया है।



