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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद में फिरोज खान का बड़ा दावा, ब्रिटिश दस्तावेजों के हवाले से प्रशासन के नैरेटिव पर उठाए सवाल!…. 1861 और 1867 के रिकॉर्ड का हवाला देकर कहा—जब जमीन ही तत्कालीन कलेक्टर को पुरखों ने दी थी, तो मस्जिद बाद में बनने का दावा कैसे सही? पठानपुरा की 517 बीघा जमीन और पुराने किराये के दस्तावेज सामने होने का दावा

सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद में फिरोज खान का बड़ा दावा, ब्रिटिश दस्तावेजों के हवाले से प्रशासन के नैरेटिव पर उठाए सवाल!….

1861 और 1867 के रिकॉर्ड का हवाला देकर कहा—जब जमीन ही तत्कालीन कलेक्टर को पुरखों ने दी थी, तो मस्जिद बाद में बनने का दावा कैसे सही? पठानपुरा की 517 बीघा जमीन और पुराने किराये के दस्तावेज सामने होने का दावा

सहारनपुर। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब फिरोज खान ने ब्रिटिश शासनकाल के दस्तावेजों का हवाला देते हुए प्रशासन और कुछ दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से बताए जा रहे कथित नैरेटिव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि मस्जिद को बाद में निर्मित बताने की कोशिश ऐतिहासिक दस्तावेजों के विपरीत है।

फिरोज खान के मुताबिक, घंटाघर से लेकर काजी की मस्जिद और हकीकत नगर तक का विस्तृत क्षेत्र पूर्व में ‘पठानपुरा’ के नाम से जाना जाता था। उनका कहना है कि इस इलाके की जमीन उनके जमींदार पुरखों के स्वामित्व में थी और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान इसी जमीन को तत्कालीन प्रशासन ने कलेक्टर कार्यालय सहित सरकारी उपयोग के लिए हासिल किया था।

1861 और 1867 के रिकॉर्ड का दिया हवाला

फिरोज खान ने वर्ष 1861 और 1867 के ब्रिटिशकालीन राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर मिस्टर रॉबर्ट पॉल ने उनके जमींदार पुरखों से जमीन हासिल की थी। उनके अनुसार दस्तावेजों में जमीन से संबंधित किराये और क्षेत्रफल का उल्लेख भी दर्ज है।

उनका दावा है कि रिकॉर्ड में 517 बीघा जमीन के लिए 800 रुपये सालाना किराया निर्धारित किए जाने का उल्लेख मिलता है, जबकि जमीन की दर 2 रुपये 5 पैसे प्रति बीघा बताई गई है। फिरोज खान का कहना है कि इन दस्तावेजों से उस दौर में जमीन और ब्रिटिश प्रशासन के बीच संबंधों की स्थिति स्पष्ट होती है।

‘जब पुरखों ने कलेक्टर को जमीन दी तो मस्जिद बाद की कैसे?’

फिरोज खान का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ब्रिटिश काल में उनके पुरखों की जमीन तत्कालीन कलेक्टर और प्रशासनिक व्यवस्था के अधीन आई थी, तो उसी परिसर में मौजूद धार्मिक स्थल को बाद में बनाया गया बताने के दावे का आधार क्या है?

उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से यदि यह कहा जा रहा है कि कलेक्ट्रेट की इमारत पहले से मौजूद थी और मस्जिद का निर्माण उसके बाद हुआ, तो इस दावे की पुष्टि भी ऐतिहासिक राजस्व एवं प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर होनी चाहिए।

फिरोज खान ने आरोप लगाया कि ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज कर एक ऐसा नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, जिससे मस्जिद के अस्तित्व और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर सवाल खड़ा किया जा सके। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनके द्वारा बताए गए दस्तावेजों की आधिकारिक जांच अभी आवश्यक है।

मुखिया, नंबरदार और सिटी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का भी दावा

फिरोज खान के अनुसार उनके पुरखों को ब्रिटिश शासनकाल में मुखिया और नंबरदार की जिम्मेदारी दी गई थी तथा उन्हें सिटी मजिस्ट्रेट से संबंधित शक्तियां भी प्रदान की गई थीं। उनका कहना है कि यह पूरा इतिहास ब्रिटिशकालीन दस्तावेजों में दर्ज है और इन्हें सार्वजनिक कर विवाद का तथ्यात्मक समाधान किया जा सकता है।

उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि यदि कलेक्ट्रेट परिसर और उससे जुड़े क्षेत्र के इतिहास को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन का वास्तविक इतिहास क्या है और मस्जिद का निर्माण कब हुआ।

दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकता है सच

कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है। एक पक्ष जहां मस्जिद के निर्माण को बाद की घटना बताने का दावा कर रहा है, वहीं फिरोज खान ब्रिटिशकालीन दस्तावेजों के आधार पर इसके विपरीत सवाल उठा रहे हैं।

ऐसे में विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे, बंदोबस्त अभिलेख, भूमि हस्तांतरण संबंधी दस्तावेज और प्रशासनिक रिकॉर्ड हो सकते हैं। यदि फिरोज खान द्वारा बताए गए दस्तावेज आधिकारिक अभिलेखों से प्रमाणित होते हैं, तो वे इस विवाद के ऐतिहासिक पक्ष को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल जरूरत इस बात की है कि दावों और प्रतिदावों से आगे बढ़कर संबंधित पुराने दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनके आधार पर सार्वजनिक रूप से तथ्य सामने रखे जाएं। यही प्रक्रिया कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के इतिहास को लेकर उठ रहे सवालों का प्रमाणिक जवाब दे सकती है।

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