बेंगलुरु में बोले मुफ्ती समुन काजमी: मदरसा शिक्षा में आधुनिक बदलाव से मुख्यधारा से जुड़ रहे अल्पसंख्यक छात्र,, आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस और श्रीश्री रविशंकर के 70वें जन्मदिन समारोह में उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था का किया उल्लेख, कहा—मदरसे के छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर और IAS बनने की दिशा में बढ़ रहे आगे

बेंगलुरु में बोले मुफ्ती समुन काजमी: मदरसा शिक्षा में आधुनिक बदलाव से मुख्यधारा से जुड़ रहे अल्पसंख्यक छात्र,,
आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस और श्रीश्री रविशंकर के 70वें जन्मदिन समारोह में उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था का किया उल्लेख, कहा—मदरसे के छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर और IAS बनने की दिशा में बढ़ रहे आगे

बेंगलुरु। आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के स्नेहपूर्ण आमंत्रण पर बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित विशेष समारोह में उत्तराखंड के पूर्व मदरसा बोर्ड अध्यक्ष मुफ्ती मौ. समुन काजमी ने शिरकत की। उन्होंने अपनी ओर से तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर को उनके 70वें जन्मदिन तथा द आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
समारोह के दौरान अपने संबोधन में मुफ्ती समुन काजमी ने उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को लेकर किए जा रहे बदलावों और आधुनिक शिक्षा से इसके जुड़ाव का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मदरसा शिक्षा को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुफ्ती काजमी ने कहा कि मदरसे में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने अब शिक्षा और करियर के अवसरों का दायरा व्यापक हो रहा है। आधुनिक शिक्षा के माध्यम से वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और IAS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में जाने का सपना पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किसी एक विषय तक सीमित रहना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की पहचान सदियों से योग, ध्यान, तप, साधना और आध्यात्मिक चेतना की भूमि के रूप में रही है। ऐसे में श्रीश्री रविशंकर और आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा शांति, सेवा, साधना और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सेवा और मानव कल्याण को भी व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया है। युवाओं में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व की भावना विकसित करने की दिशा में संस्था की भूमिका प्रेरणादायी है।
मुफ्ती काजमी ने कहा कि शिक्षा और आध्यात्मिकता दोनों ही समाज को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार, सेवा और मानवीय मूल्यों का समन्वय समाज को अधिक मजबूत बना सकता है।
इस अवसर पर उन्होंने श्रीश्री रविशंकर के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर सक्रिय जीवन की कामना करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी उनके मार्गदर्शन में सेवा, साधना, शांति और सद्भाव का अभियान और अधिक विस्तार प्राप्त करे।

उन्होंने एक बार फिर श्रीश्री रविशंकर को 70वें जन्मदिन तथा आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। समारोह में आध्यात्मिकता, शिक्षा, सेवा और सामाजिक सद्भाव से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।



