हरिद्वार में शराब की दुकानों पर हाईकोर्ट की सख्ती: जनहित याचिका पर डीएम की सुनवाई टली, अब 22 जुलाई को होगा फैसला,, सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और अस्पतालों के पास संचालित शराब की दुकानों को हटाने की मांग, हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही कार्रवाई,, नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्णकांत की जनहित याचिका पर प्रशासन की नजर,,

हरिद्वार में शराब की दुकानों पर हाईकोर्ट की सख्ती: जनहित याचिका पर डीएम की सुनवाई टली, अब 22 जुलाई को होगा फैसला,,
सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों और अस्पतालों के पास संचालित शराब की दुकानों को हटाने की मांग, हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही कार्रवाई,,
नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट अध्यक्ष कृष्णकांत की जनहित याचिका पर प्रशासन की नजर,,
हरिद्वार। सार्वजनिक स्थानों, शिक्षण संस्थानों, स्कूलों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों के आसपास संचालित शराब की दुकानों को हटाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर जिलाधिकारी हरिद्वार के समक्ष प्रस्तावित सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। इस मामले पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका सीधा संबंध जनस्वास्थ्य, शिक्षा के माहौल और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
बताया जा रहा है कि नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत ने इस संबंध में उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि राष्ट्रीय एवं राजकीय राजमार्गों, शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों तथा घनी आबादी वाले क्षेत्रों के निकट संचालित शराब की दुकानों को नियमों के अनुरूप हटाया जाए, जिससे आमजन, विशेषकर विद्यार्थियों और महिलाओं को सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण मिल सके।
मामले की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इस विषय को गंभीर मानते हुए हरिद्वार के जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे कि वह संबंधित सभी पक्षों की सुनवाई कर छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लें। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक हित और लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा सोमवार को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई थी। हालांकि प्रशासनिक कारणों से निर्धारित तिथि पर सुनवाई नहीं हो सकी और इसे स्थगित करते हुए अब 22 जुलाई की नई तिथि तय की गई है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में संबंधित विभागों, आबकारी अधिकारियों और अन्य पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी, जिसके बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है।
इस जनहित याचिका को लेकर सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों में भी काफी रुचि देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों के समीप शराब की दुकानों के संचालन से सामाजिक वातावरण प्रभावित होता है तथा युवाओं पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं दूसरी ओर संबंधित कारोबारियों की ओर से भी अपने पक्ष को रखने की तैयारी की जा रही है।
अब सभी की निगाहें 22 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन कोई ठोस निर्णय लेता है तो हरिद्वार जिले में कई शराब की दुकानों के संचालन और उनके स्थान को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह मामला भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।



