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दरगाह कलियर में सोहन हलवा, हलवा पराठा ठेके का नया खेल/साजिश या नियमों की अनदेखी? शीरमाल विवाद ने खोले कई सवाल, एक दुकान के ठेके से सात दुकानों तक कैसे पहुंचा कारोबार? ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का बड़ा बयान—”किसी ठेकेदार को दूसरे दुकानदारों की शीरमाल बिक्री रोकने का अधिकार नहीं”, आदेश और शर्तों में दिखा विरोधाभास एक करोड़ से अधिक टर्नओवर की चर्चा, दरगाह राजस्व को नुकसान की आशंका; छोटे दुकानदार बोले—रोज़ी-रोटी बचाइए, सिंडिकेट पर कार्रवाई करिए

दरगाह कलियर क्षैत्र में हलवा पराठा/सोहन हलवा ठेका या 'फ्रेंचाइजी' मॉडल? शीरमाल विवाद से भी उठे बड़े सवाल, नियमों से लेकर राजस्व तक घिरा दरगाह सिस्टम! टेंडर में सिर्फ हलवा-परांठा, सोहन हलवा बाद में आदेश से जुड़ा शीरमाल; ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बोले—'किसी को रोकने का अधिकार नहीं', फिर विवाद क्यों? एक दुकान के ठेके पर सात दुकानों की फ्रेंचाइजी चर्चा, करोड़ों के कारोबार और संभावित राजस्व नुकसान की मांग की उठी जांच

दरगाह कलियर में सोहन हलवा, हलवा पराठा ठेके का नया खेल/साजिश या नियमों की अनदेखी? शीरमाल विवाद ने खोले कई सवाल, एक दुकान के ठेके से सात दुकानों तक कैसे पहुंचा कारोबार?

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का बड़ा बयान—”किसी ठेकेदार को दूसरे दुकानदारों की शीरमाल बिक्री रोकने का अधिकार नहीं”, आदेश और शर्तों में दिखा विरोधाभास

एक करोड़ से अधिक टर्नओवर की चर्चा, दरगाह राजस्व को नुकसान की आशंका; छोटे दुकानदार बोले—रोज़ी-रोटी बचाइए, सिंडिकेट पर कार्रवाई करिए

इन्तजार रजा पिरान कलियर, हरिद्वार।
विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत साबिर पाक कलियर में इस वर्ष सोहन हलवा-हलवा परांठा के ठेके के साथ शीरमाल को शामिल किए जाने का मामला अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। ठेका प्रक्रिया, बाद में जारी कार्यालय आदेश, छोटे दुकानदारों की शिकायत और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ के ताज़ा बयान के बाद कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब दरगाह प्रबंधन और प्रशासन को देना होगा।

फाइल फोटो दुकान नं 06

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मूल ई-निविदा और ठेका शर्तों में केवल “सोहन हलवा एवं हलवा परांठा” की बिक्री का उल्लेख था और स्पष्ट लिखा गया था कि “इसके अलावा अन्य किसी चीज की बिक्री नहीं की जाएगी”, तो फिर बाद में कार्यालय आदेश जारी कर शीरमाल को उसी ठेके में किस आधार पर शामिल किया गया?

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 की ई-निविदा में दुकान संख्या-6 के लिए केवल सोहन हलवा एवं हलवा परांठा विक्रय का ठेका आमंत्रित किया गया था। ठेका शर्तों के बिंदु संख्या-5 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि ठेकेदार केवल सोहन हलवा और हलवा परांठा ही बेचेगा, अन्य कोई वस्तु नहीं। लेकिन 19 जून 2026 को जारी कार्यालय आदेश में ठेकेदार के आवेदन के आधार पर शीरमाल को भी उसी ठेके का हिस्सा बना दिया गया। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई।

छोटे दुकानदारों का आरोप—रोज़गार पर संकट

दरगाह क्षेत्र के वर्षों पुराने शीरमाल विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से स्वतंत्र रूप से शीरमाल बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ठेके में शीरमाल जोड़ने के बाद कुछ लोगों द्वारा उन पर दबाव बनाया जाने लगा कि अब शीरमाल केवल ठेकेदार ही बेच सकता है।

दुकानदारों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि उनसे अवैध वसूली की कोशिश की गई और कुछ दुकानदारों को दुकान बंद कराने तक की धमकी दी गई। उन्होंने मांग की कि शीरमाल को ठेका व्यवस्था से बाहर रखा जाए और पहले की तरह सभी को स्वतंत्र रूप से बिक्री करने दी जाए।

निष्पक्ष पृवत्ति के धनी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने किया बड़ा खुलासा

जब पूरे मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ से जानकारी ली गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा—

“Dargah has not permitted any contractor to stop sale of Sheermal from any others.”

यानी दरगाह ने किसी भी ठेकेदार को अन्य दुकानदारों की शीरमाल बिक्री रोकने का अधिकार नहीं दिया है।

इसके बाद उन्होंने कहा कि—

“It’s just that, he can also sale Sheermal.”

अर्थात ठेकेदार भी शीरमाल बेच सकता है, लेकिन उसे दूसरों को रोकने का कोई विशेष अधिकार नहीं है।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट का यह ब्यान कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया कि दरगाह प्रशासन ने किसी को भी शीरमाल की बिक्री पर एकाधिकार (Exclusive Right) नहीं दिया है।

आदेश और ठेका शर्तों में विरोधाभास?

अब सबसे बड़ा कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न यही है कि—

  • ई-निविदा में केवल हलवा और हलवा परांठा था।
  • ठेका शर्तों में अन्य वस्तु बेचने पर रोक थी।
  • बाद में कार्यालय आदेश से शीरमाल जोड़ दिया गया।
  • फिर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट स्वयं कह रहे हैं कि अन्य दुकानदार भी शीरमाल बेच सकते हैं।

ऐसी स्थिति में सवाल उठ रहा है कि यदि सभी दुकानदार शीरमाल बेच सकते हैं तो फिर ठेके में शीरमाल जोड़ने की आवश्यकता क्या थी? और यदि जोड़ा गया तो उसकी कानूनी स्थिति क्या है?

एक दुकान का ठेका, सात दुकानों की चर्चा

इस पूरे प्रकरण में एक और गंभीर चर्चा कलियर क्षेत्र में जोरों पर है। दस्तावेजों के अनुसार ठेका केवल दुकान संख्या-6 का है।लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि वर्तमान में इसी ठेके के नाम पर क्षेत्र में लगभग सात दुकानें संचालित हो रही हैं। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि ये दुकानें कथित रूप से फ्रेंचाइजी मॉडल की तरह संचालित की जा रही हैं।

यदि ऐसा है तो यह जांच का विषय बनता है कि—

  • क्या एक दुकान के ठेके पर कई दुकानों का संचालन किया जा रहा है?
  • यदि हां, तो उसकी अनुमति किसने दी?
  • अतिरिक्त दुकानों से होने वाली आय का लेखा-जोखा कहां है?
  • क्या दरगाह को उसका वास्तविक राजस्व मिल रहा है?

ठेके के तहत हलवा पराठा और सोन हलवा की एक दुकान और अन्य 6 दुकान से करोड़ों के राजस्व/कारोबार की चर्चा

स्थानीय व्यापारियों के बीच चर्चा है कि सोन हलवा और हलवा पराठा का कारोबार सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। यदि यह दावा सही पाया जाता है और ठेका केवल एक दुकान का होने के बावजूद कई दुकानों से कारोबार हो रहा है, तो दरगाह के संभावित राजस्व नुकसान की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है। हालांकि, एक करोड़ रुपये के कारोबार या राजस्व नुकसान के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसकी पुष्टि सक्षम जांच के बाद ही हो सकेगी।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/दरगाह प्रबंधन और मुख्य प्रशासन से उठी पारदर्शिता की मांग

अब स्थानीय व्यापारियों और क्षेत्रवासियों की मांग है कि दरगाह प्रबंधन और प्रशासन पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करे। यदि शीरमाल की बिक्री सभी दुकानदारों के लिए खुली है, तो इसकी लिखित व्यवस्था जारी की जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अवैध वसूली या दबाव की स्थिति उत्पन्न न हो।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि दुकान संख्या-6 के ठेके की वास्तविक सीमा क्या है और यदि अतिरिक्त दुकानें संचालित हो रही हैं तो उनकी वैधता क्या है।दरगाह क्षेत्र में यह मामला अब केवल शीरमाल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ठेका प्रक्रिया की पारदर्शिता, राजस्व संरक्षण और छोटे व्यापारियों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब निगाहें मुख्य प्रशासक, दरगाह प्रबंधन और जिला प्रशासन पर हैं कि वे इन सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब कब देते हैं तथा यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

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