एससी-एसटी पीड़ितों को राहत में नहीं होगी देरी: एडीएम वैभव गुप्ता के सख्त निर्देश,, एफआईआर के साथ सभी जरूरी दस्तावेज समय पर भेजे पुलिस, ताकि तत्काल जारी हो सहायता राशि,, जागरूकता अभियान, जवाबदेही और सामाजिक समरसता पर जोर; जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में कई अहम फैसले

एससी-एसटी पीड़ितों को राहत में नहीं होगी देरी: एडीएम वैभव गुप्ता के सख्त निर्देश,,
एफआईआर के साथ सभी जरूरी दस्तावेज समय पर भेजे पुलिस, ताकि तत्काल जारी हो सहायता राशि,,
जागरूकता अभियान, जवाबदेही और सामाजिक समरसता पर जोर; जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में कई अहम फैसले
हरिद्वार, 4 जुलाई 2026।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को रोशनाबाद स्थित जिला कार्यालय सभागार में जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता ने की। बैठक में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और समिति सदस्यों ने एससी-एसटी एक्ट के प्रभावी पालन, अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक एससी-एसटी एक्ट के तहत 13 मामले प्राप्त हुए हैं। इनमें से 10 पीड़ितों को आर्थिक सहायता राशि का भुगतान किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों के लिए समाज कल्याण निदेशालय, हल्द्वानी से बजट की मांग भेजी गई है। बजट प्राप्त होते ही बाकी पात्र पीड़ितों को भी सहायता राशि जारी कर दी जाएगी।
अपर जिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने पुलिस विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्रत्येक मुकदमे में एफआईआर, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित समय के भीतर समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में देरी के कारण किसी भी पीड़ित को शासन द्वारा निर्धारित आर्थिक सहायता मिलने में विलंब नहीं होना चाहिए।
एडीएम ने यह भी निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में एससी-एसटी अत्याचार की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां पुलिस और समाज कल्याण विभाग संयुक्त रूप से जागरूकता अभियान चलाएं। समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से कानून की जानकारी, अधिकारों के प्रति जागरूकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया जाए।बैठक में विधायक हरिद्वार के प्रतिनिधि श्यामल कुमार ने सुझाव दिया कि एससी-एसटी मामलों में आरोप पत्र दाखिल करने की समय-सीमा तय की जाए तथा अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने, अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में मिनी स्टेडियम और खेल सुविधाओं के विकास तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार और लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने की भी मांग उठाई।
समिति सदस्य अनूप कुमार ने जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि वर्ष 1985 के अभिलेखों के बजाय उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उपलब्ध अभिलेखों को आधार बनाया जाना चाहिए, जिससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
विधायक झबरेड़ा वीरेंद्र जाति ने बैठक में कहा कि कई मामलों में अनुसूचित जाति के लोगों की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती और कई प्रकरणों में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी जाती है। इस पर अपर जिलाधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि एवं क्षेत्राधिकारी सदर को ऐसे मामलों की गंभीरता से समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वहीं विधायक भगवानपुर ममता राकेश ने भगवानपुर क्षेत्र में एससी-एसटी अत्याचार की रोकथाम के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर बल दिया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पुलिस विभाग की अपराध समीक्षा बैठकों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विधायकों को भी आमंत्रित किया जाए, ताकि क्षेत्रीय समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सके।
बैठक के अंत में समिति के सभी सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, पीड़ितों को समयबद्ध आर्थिक सहायता, त्वरित न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और व्यापक जनजागरूकता के माध्यम से ही सामाजिक न्याय एवं समानता के उद्देश्य को मजबूती प्रदान की जा सकती है।



