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उत्तराखंड में ब्यानबाज़ी पर सियासत गरमाई, एडवोकेट हिना मलिक का पलटवार,, “उत्तराखंड किसी के बाप का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का हिस्सा है”— मुस्लिम समाज महासभा की राष्ट्रीय महासचिव का बड़ा बयान,, मुख्यमंत्री से नफरत फैलाने वाले ब्यानों पर कार्रवाई की मांग, संविधान और भाईचारा बनाए रखने की अपील

उत्तराखंड में ब्यानबाज़ी पर सियासत गरमाई, एडवोकेट हिना मलिक का पलटवार,,

“उत्तराखंड किसी के बाप का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का हिस्सा है”— मुस्लिम समाज महासभा की राष्ट्रीय महासचिव का बड़ा बयान,,

मुख्यमंत्री से नफरत फैलाने वाले ब्यानों पर कार्रवाई की मांग, संविधान और भाईचारा बनाए रखने की अपील

हरिद्वार/देहरादून। उत्तराखंड में हाल के दिनों में बयानबाज़ी को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी क्रम में मुस्लिम समाज महासभा की महिला विंग की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी एडवोकेट हिना मलिक ने हिंदू रक्षा दल के नेता ललित शर्मा के कथित बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड किसी एक व्यक्ति या संगठन की जागीर नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत का अभिन्न हिस्सा है और देश का प्रत्येक नागरिक यहां समान अधिकार रखता है।

एडवोकेट हिना मलिक ने अपने बयान में कहा, “उत्तराखंड किसी के बाप का नहीं है। यह पूरे हिंदुस्तान का हिस्सा है और मुसलमान भी इस देश का अभिन्न हिस्सा हैं।” उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली भाषा सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती है।

उन्होंने प्रदेश में भाईचारा, सामाजिक एकता और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उत्तराखंड हमेशा से शांति और आपसी सद्भाव की भूमि रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार के भड़काऊ बयान समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं, जिन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग

एडवोकेट हिना मलिक ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अपील करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन समाज में नफरत फैलाने वाले बयान दे रहा है, उसके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका कहना था कि कानून सभी के लिए समान है और किसी को भी संविधान से ऊपर नहीं माना जा सकता।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार संविधान और कानून की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज

हिना मलिक के इस बयान के बाद उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के पालन को लेकर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द प्रभावित न हो।

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