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758वें पिरान कलियर उर्स की तैयारियां युद्धस्तर पर: प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा से लेकर सफाई तक सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश,, 13/14 अगस्त से 03/04 सितंबर तक चलेगा विश्व प्रसिद्ध उर्स, लाखों जायरीनों के आगमन को देखते हुए विभागों को सौंपे गए जिम्मेदारी भरे दायित्व,, तैयारियों के बीच ठेका- हलवा-पराठा और शीरमाल बिक्री आदेश विवाद फिर चर्चा में, फ्रेंचाइजी मॉडल पर उठ रहे सवालों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग तेज

758वें पिरान कलियर उर्स की तैयारियां युद्धस्तर पर: प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा से लेकर सफाई तक सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश,,

13/14 अगस्त से 03/04 सितंबर तक चलेगा विश्व प्रसिद्ध उर्स, लाखों जायरीनों के आगमन को देखते हुए विभागों को सौंपे गए जिम्मेदारी भरे दायित्व,,

तैयारियों के बीच ठेका- हलवा-पराठा और शीरमाल बिक्री आदेश विवाद फिर चर्चा में, फ्रेंचाइजी मॉडल पर उठ रहे सवालों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग तेज

हरिद्वार, 22 जुलाई। विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर शरीफ के 758वें सालाना उर्स/मेला-2026 की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं। उर्स के दौरान देश-विदेश से लाखों जायरीनों के आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी विभागों को पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जिला कार्यालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में मेले की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार ने की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उर्स प्रारंभ होने से पहले सभी व्यवस्थाएं हर हाल में पूरी कर ली जाएं और किसी भी विभाग की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में जानकारी दी गई कि 758वें सालाना उर्स/मेला-2026 का आयोजन 13/14 अगस्त से 03/04 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। चांद दिखाई देने के बाद पारंपरिक मेहंदी डोरी की रस्म के साथ उर्स का शुभारंभ होगा, जबकि मुख्य धार्मिक कार्यक्रम 24-25 अगस्त से 28-29 अगस्त तक आयोजित होंगे। इन दिनों दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्र में भारी भीड़ रहने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विस्तृत खाका तैयार किया है।

अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार ने निर्देश दिए कि उर्स शुरू होने से पहले मेला क्षेत्र से सभी अवैध अतिक्रमण हटाए जाएं, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाया जाए तथा श्रद्धालुओं के लिए आवागमन के सभी मार्ग सुगम रखे जाएं। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और तय समय सीमा में अपने दायित्व पूरे करें, ताकि किसी भी जायरीन को परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में अस्थायी पुलिस चौकियों की स्थापना, जर्मन हैंगर, बैरिकेडिंग, अस्थायी दुकानों का निर्धारण, विद्युत व्यवस्था, मोबाइल शौचालय, पार्किंग, साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा सुविधाएं, अग्निशमन और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश कार्यों की ई-टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष कार्य भी तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।

मेले के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, अस्थायी पुलिस चौकियां, भीड़ नियंत्रण की विशेष व्यवस्था, जल पुलिस और मोटर बोट की तैनाती की जाएगी। रेलवे और परिवहन विभाग को अतिरिक्त ट्रेनों, शटल बसों और पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सकों, एम्बुलेंस और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था करने तथा नगर पंचायत पिरान कलियर को पूरे मेले के दौरान स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बैठक में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ ने विभागवार तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी विभाग समय से कार्य पूरे करें और नियमित रूप से प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराएं। वहीं पिरान कलियर विधायक फुरकान अहमद ने कहा कि उर्स मेले का सफल आयोजन सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है और बेहतर समन्वय से ही लाखों जायरीनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

तैयारियों के बीच फिर सुर्खियों में दरगाह से जुड़े पुराने विवाद

उर्स मेले की तैयारियों के साथ ही दरगाह पिरान कलियर से जुड़े पुराने विवाद भी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। विशेष रूप से हलवा-पराठा, सोहन हलवा और विवादित शीरमाल आदेश से जुड़े मामलों के बाद अब ठेका व्यवस्था के कथित ‘फ्रेंचाइजी मॉडल’ को लेकर क्षेत्र में नई बहस शुरू हो गई है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि एक दुकान के नाम पर कथित रूप से कई दुकानों का संचालन किया जा रहा है। कुछ लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाए हैं कि यदि ऐसा हो रहा है तो इससे दरगाह की राजस्व व्यवस्था, ठेका प्रक्रिया और नियमों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन या दरगाह प्रबंधन की ओर से भी इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप और चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

शीरमाल आदेश को लेकर पहले भी हो चुका है विवाद

गौरतलब है कि कुछ समय पहले शीरमाल बिक्री को लेकर जारी प्रशासनिक आदेश भी विवादों में रहा था। उस समय प्रशासन की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया था कि किसी भी वैध ठेकेदार को कारोबार से नहीं रोका गया है। इसके बावजूद उर्स से पहले एक बार फिर शीरमाल, हलवा-पराठा और सोहन हलवा की बिक्री तथा ठेका व्यवस्था को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायतें सामने आई हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। वहीं यदि सभी व्यवस्थाएं नियमों के अनुरूप हैं तो प्रशासन और दरगाह प्रबंधन को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, जिससे अनावश्यक विवाद समाप्त हो सकें।

उर्स मेले की तैयारियों के बीच अब लोगों की नजरें ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ की निगरानी में होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर भी टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ठेका व्यवस्था, फ्रेंचाइजी मॉडल या राजस्व से जुड़े मामलों में शिकायतें मिली हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को स्पष्ट रूप से तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि उसकी पहली प्राथमिकता 758वें सालाना उर्स/मेला-2026 का शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन कराना है। इसके लिए सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीन बिना किसी असुविधा के धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सकें।

बैठक में नगर मजिस्ट्रेट हरगिरि, जिला पर्यटन अधिकारी सुशील नौटियाल, आरटीओ (प्रवर्तन) कृष्ण चंद्र पलारिया, उप नगर आयुक्त रुड़की अमरजीत कौर, तहसीलदार विकास अवस्थी, पुलिस विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। उर्स की तैयारियों के साथ-साथ दरगाह से जुड़े विवादों पर उठ रहे सवालों ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन एक ओर जहां ऐतिहासिक उर्स मेले को सफल बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर ठेका व्यवस्था और अन्य विवादों को लेकर उठ रही शिकायतों पर क्या कदम उठाता है। यदि प्रशासन पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ दोनों मोर्चों पर कार्रवाई करता है तो इससे न केवल जायरीनों का विश्वास मजबूत होगा, बल्कि दरगाह प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का भी स्पष्ट जवाब मिल सकेगा।

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