Daily Live Uttarakhand updateउत्तराखंडएक्सक्लूसिव खबरें

TET की अनिवार्यता और पुरानी पेंशन के मुद्दे पर CM धामी से मिला शिक्षक-कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल, समाधान का मिला सकारात्मक आश्वासन,, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत की मांग, पुरानी पेंशन बहाली पर भी हुई विस्तार से वार्ता; 13 सितंबर की पेंशन महारैली के बाद मुख्यमंत्री ने दिया बातचीत का समय

TET की अनिवार्यता और पुरानी पेंशन के मुद्दे पर CM धामी से मिला शिक्षक-कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल, समाधान का मिला सकारात्मक आश्वासन,,

2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से राहत की मांग, पुरानी पेंशन बहाली पर भी हुई विस्तार से वार्ता; 13 सितंबर की पेंशन महारैली के बाद मुख्यमंत्री ने दिया बातचीत का समय

देहरादून, 21 सितंबर। उत्तराखंड में 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष विस्तारपूर्वक रखा। बातचीत के दौरान TET के मुद्दे पर मुख्यमंत्री की ओर से जल्द समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिए जाने की बात संगठन की ओर से कही गई है।

शिक्षक-कर्मचारी संगठनों का कहना है कि दोनों मुद्दे लंबे समय से उनके बीच प्रमुख मांगों के रूप में उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग को लेकर शिक्षक संगठनों की ओर से सरकार के समक्ष लगातार अपना पक्ष रखा जाता रहा है।

13 सितंबर की महारैली के बाद मुख्यमंत्री से हुई वार्ता

उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, हरिद्वार के जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान ने बताया कि 13 सितंबर को देहरादून के परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक पेंशन महारैली एवं घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया था।

अश्वनी चौहान के मुताबिक, आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि की ओर से संगठन के पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर वार्ता के लिए आमंत्रित किए जाने का आश्वासन दिया गया था। इसी क्रम में सोमवार को मुख्यमंत्री की ओर से प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात के लिए समय दिया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान शिक्षक एवं कर्मचारी हितों से जुड़े दोनों प्रमुख विषयों को सरकार के सामने रखा और इनके समाधान की दिशा में ठोस पहल किए जाने की मांग की।

2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों का TET मुद्दा प्रमुखता से उठा

वार्ता में 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की बाध्यता का मुद्दा प्रमुखता से रखा गया। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री को बताया गया कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस विषय को लेकर शिक्षकों के बीच लगातार चिंता बनी हुई है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि नियुक्ति की तिथि और उस समय लागू व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की बाध्यता से राहत देने की दिशा में निर्णय लिया जाए।

अश्वनी चौहान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरता से सुना और TET के विषय में जल्द समाधान की दिशा में रास्ता निकालने का सकारात्मक आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय के लिए यह महत्वपूर्ण विषय है और मुख्यमंत्री से मिले आश्वासन के बाद शिक्षकों में इस मामले के समाधान को लेकर उम्मीद जगी है।

पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी मुख्यमंत्री के सामने

बैठक में पुरानी पेंशन योजना की बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश के शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किए जाने की मांग कर रहे हैं।

संगठन की ओर से कहा गया कि 13 सितंबर को आयोजित पेंशन महारैली में भी पुरानी पेंशन बहाली की मांग प्रमुख रही थी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक और कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हुए थे।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के भविष्य की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए इस मामले में सरकार की ओर से सकारात्मक पहल किए जाने की आवश्यकता है।

अश्वनी चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन से जुड़े प्रतिनिधिमंडल के पक्ष को भी गंभीरता से सुना और इस विषय पर आगे बातचीत तथा सकारात्मक पहल की दिशा में आश्वस्त किया।

कौन-कौन रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल?

पुरानी पेंशन बहाली संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री इंजीनियर मुकेश रतूड़ी, प्रदेश कोषाध्यक्ष इंजीनियर शांतनु शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, इंजीनियर जगमोहन सिंह रावत, देहरादून जिलाध्यक्ष संतोष गड़ोई, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा, हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुखदेव सैनी, जिला महामंत्री दीपक चौहान सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

संवाद के जरिए समाधान की कोशिश

अश्वनी चौहान ने कहा कि संगठन का उद्देश्य शिक्षक एवं कर्मचारी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों का समाधान लोकतांत्रिक तरीके और संवाद के माध्यम से कराना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रतिनिधिमंडल को समय देकर दोनों विषयों को सुनना और विशेष रूप से TET के मामले में सकारात्मक आश्वासन देना स्वागतयोग्य है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठन आगे भी तथ्यों और मजबूती के साथ शिक्षक एवं कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों को सरकार के समक्ष उठाते रहेंगे।

फिलहाल बैठक के बाद शिक्षक संगठनों की नजर सरकार की अगली पहल पर है। TET की अनिवार्यता से राहत और पुरानी पेंशन बहाली दोनों ही मुद्दे प्रदेश के शिक्षक-कर्मचारी संगठनों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल को मिले आश्वासन के बाद अब संगठन इन मांगों पर आगे होने वाली सरकारी कार्रवाई और निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

Related Articles

Back to top button